TABOOT 8 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchalदमयंती अब बहुत खुश थी। अब मेरे अंदर डायनी की शक्तियां भी हैं और कर्ण पिशाचिनी की भी। इसका मतलब अब मैं सबसे ज्यादा शक्तिशाली हूं।
दमयंती ने राक्षसी देवी को प्रणाम किया और फिर राजा भीम सिंह के महल की तरफ चली गई।
राजा भीम सिंह उस समय अपने शयन कक्ष में सो रहा था। तभी उसे महसूस हुआ कि कोई उसके सीने को सहला रहा है। वो हड़बड़ाहट में नींद से जागा। कौन है? आंख खुलने पर उसने दमयंती को अपने बिस्तर पर पाया तो वो हैरान रह गया।
अरे दमयंती तुम जी महाराज हम कहां चली गई थी आप?
उस रात से आप कहीं नजर ही नहीं आई। हमने आपको कितना खोजा आपको पता है? महाराज आपने हमारे साथ जो किया उससे हमें बहुत बुरा लगा था।
लेकिन बाद में हमने सोचा कि आपने हम पर इतनी दया की थी। हमें अपने महल में जगह दी थी। आपके एहसानों के बदले तो हमें जीवन भर आपकी सेवा करने में ही गुजार देना चाहिए। यह सुनकर राजा खुश हो गया। ऐसा नहीं है दमयंती।
आप बस हर रात हमारा अकेलापन दूर कीजिए।
यही हमारे लिए काफी है। क्यों नहीं महाराज? यह कहकर दमयंती महाराज पर झपटी। महाराज बेड पर वापस गिर गए और दमयंती उनके सीने पर बैठ गई।
वो महाराज के चेहरे पर प्यार से हाथ फेरने लगी।
महाराज भी उसकी कमर पर हाथ फेर रहे थे और अपनी आंखें बंद करके उसके कोमल जिस्म का स्पर्श महसूस कर रहे थे। तभी दमयंती की आंखें लालाल चमक उठी।
उसके नाखून लंबे होकर राजा के सीने में चुभने लगे। आ भीम सिंह ने जैसे ही आंखें खोली तो दमयंती का नया रूप देखकर वो हैरान रह गया। हटिए। कौन है आप? हम वही हैं महाराज जिनको आप सदैव अपनी दासी बनाकर रखना चाहते हैं।
करीब आइए ना। दमयंती ने अपना तेज पंजा राजा के सीने पर ऐसा जलाया कि अगले ही पल भीम सिंह का दिल दमयंती के हाथ में था।
राजा भीम सिंह को खत्म कर दमयंती खिड़की से बाहर कूद गए और बिजली की रफ्तार से वहां से भाग निकली।
वो अब बहुत खुश थी। उसके बाद वो सीधा अपने मां-बाप के पास पहुंची। अरे दमयंती बेटी। उसकी मां ने उठकर उसे गले से लगा लिया। कहां चली गई थी बेटी? अब कहीं नहीं जाऊंगी मां। लेकिन उसका पिता तभी उस पर गरज कर बोला
कहां मुंह काला कर रही थी इतने दिनों से?
मिल गया होगा कोई प्रेमी जिसके साथ तू रंगरलियां मना रही होगी। आप ऐसा क्यों बोल रही हैं? हमारी बेटी इतने दिनों बाद आई है। इसी बात का तो दुख है।
अब तो इससे जमींदार भी शादी नहीं करेगा क्योंकि गांव में यह बात फैल गई है कि मेरी पुत्री घर से भाग गई थी। यह सुनते हुए दमयंती अपने पिता को गुस्से भरी निगाहों से देख रही थी। वही जमींदार ना पिताजी जिसको आप अपनी इस पुत्री को 500 मुद्राओं में बेचने वाले थे।
यह सुनकर दमयंती का पिता हैरान रह गया। अगर हम भागते नहीं तो अभी तक आप हमें बेच चुके होते। उसे विवाह नहीं बेचरोख कहते हैं पिताजी।
यह सुनकर उसका पिता दांत भीते हुए अपने कमरे में चला गया। मां मुझे भूख लगी है। खाना लगाओ। दमयंती की मां ने उसके लिए खाना लगाया और दमयंती ने खाना शुरू किया। लेकिन काफी खाने के बाद भी उसकी भूख मिट नहीं रही थी। मां और दो ना भूख लगी है।
बेटी तुम आठ रोटी खा चुकी हो।
अभी तक तुम्हारी भूख शांत नहीं हुई। यह सुनकर दमयंती को भी बहुत अजीब लगा क्योंकि इस बात पर उसने भी ध्यान नहीं दिया था। कोई बात नहीं बेटी मैं अभी बनाती हूं। रुक। दमयंती की मां ने उसके लिए चार रोटियां और डाली। लेकिन उन्हें खाने के बाद भी दमयंती की भूख शांत नहीं हो रही थी। ठीक है मां, मैं सोने जा रही हूं। ये मुझे क्या हो रहा है?
इतना खाने के बाद भी भला मैं भूखा क्यों महसूस कर रही हूं? आधी रात का पैर था। चारों तरफ घना जंगल। दमयंती डरी सहमी सी अंधेरे के बीच खड़ी थी।
ये मैं कहां आ गई? क्या मैं सही जगह हूं? वो इधर-उधर देख रही थी।
लेकिन घने जंगल के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। तभी उसे एक आवाज सुनाई दी। यह आवाज सुनकर वो अचानक से डर गई और झाड़ियों के बीच जा छिपी।
उसने देखा कि चार आदमी कंधे पर एक ताबूत उठाए आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें पहचानते ही वो बेहद डर गई। हे काली दुनिया की देवी मुझे बचा लीजिए। वो चारों दमयंती के जितना करीब आ रहे थे उसके दिल में खौफ और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा था।
वो उस तक पहुंचने ही वाले थे।
तभी अचानक उसे झटका लगा। उसने पाया कि वो जमीन पर पड़ी है क्योंकि वो तभी घाट से नीचे गिरी थी। यह भी स्वप्न था। इतना कुछ हो गया जिंदगी में लेकिन यह स्वप्न अभी भी वहीं का वहीं है। उसने उठकर पानी पिया। लेकिन उसकी प्यास और ज्यादा बढ़ गई। ये क्या हो रहा है मुझे? उसके शरीर में सिहरन होने लगी थी और उसकी आंखें अपने आप ही लाल होने लगी थी।
वो उसी समय एक जंगल की तरफ भाग निकली। उसके नाखून लंबे हो गए और वो बहुत गर्मी महसूस करने लगी। उसकी चमड़ी भी भयानक हो गई थी। ये मुझे क्या हो रहा है? तभी उसे एक अक्ष दिखाई दिया जो कि तांत्रिका का था। तंत्रिका तूने मुझे मारकर मेरी शक्तियां तो ले ली है ना। तू भी अब मेरी तरह दाहिनी बन चुकी है। तुझे अब रोजाना एक इंसान का खून पीना होगा।
तभी तू खूबसूरत और जवान रह सकेगी। यह कहकर वो आग से गायब हो गया। और यह सुनकर दमयंती के पैरों तले जमीन निकल गई।
वो तेजी से गांव की तरफ दौड़ी।
उसे बहुत प्यास लगी थी और अब उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। वो चौक पर खड़ी गांव के घरों को देख रही थी। इनमें से किसी घर में जाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी। वरना मैं ऐसे ही बदसूरत बनी रहूंगी। तभी उसे सामने एक आदमी आता हुआ नजर आया जिसने खुद को चादर से ढका हुआ था। वो बिजली की रफ्तार से भागी और उस पर झपट पड़ी।
वो उसे लेकर झाड़ियों में गिरी और अगली बार झाड़ियों से उस आदमी के चीखने की आवाें गूंजने लगी। काफी देर बाद दमयंती उस आदमी से अलग हुई। अब उसका शरीर फिर से इंसानों के जैसा हो गया था। उसकी आंखें, उसके नाखून सब पहले जैसे हो गए थे।
और अब वो खूबसूरत दिख रही थी।
अब मुझे घर चलना चाहिए। कहीं मां ने देख लिया तो सदमे में चली जाएगी। वो उसी समय वहां से भागी और घर पहुंचकर आराम से सो गई।
अब उसकी प्यास बुझने के बाद उसे चैन की नींद आ गई थी। अगली सुबह घर में अजीब सा मातम सुनकर उसकी आंख खुली। वो कमरे से निकली तो उसके घर के बाहर कुछ लोग जमा थे। उसके पिता की लाश जमीन पर पड़ी थी और उसकी मां वहीं खड़ी आंसू बहा रही थी। ये क्या? ये कैसे हुआ? जरूर इस पर किसी जानवर ने हमला किया होगा।
पूरे शरीर से खून गायब है।
उसने देखा कि उसके पिता के लाश के पास वही चादर पड़ी थी जो उस आदमी ने ओढ़ी थी जिसका शिकार उसने पिछली रात को किया था। यह जानकर उसके पैरों तले जमीन निकल गई कि उसने अपने ही पिता को मार दिया था। उसके पिता का अंतिम संस्कार किया गया और अपनी मां को सफेद साड़ी में देखकर उसे बहुत बुरा लग रहा था। लेकिन अब जो हो गया था
उसे बदला नहीं जा सकता था। वह रात को एक मर्द का खून पीने जाती और उसकी सुंदरता निखरती जाती। जो भी लड़का उसे पसंद करता वो उसी को अपना शिकार बनाती क्योंकि उसको मर्द के नाम से ही नफरत हो गई थी। इसी तरह 40 साल और गुजर गए।
और अब उसकी मां भी बूढ़ी होकर खत्म हो गई।
गांव के लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें करने लगे थे क्योंकि वो 75 साल के होने के बाद भी बूढ़ी नहीं हो रही थी। लोग उसके करीब जाने तक से डरने लगे थे और इसी तरह से 23 साल और निकल गए। एक रात इसी तरह से वो अपना शिकार करके घर लौटी तो उसको अपने शरीर में अजीब सी सिहरन महसूस होने लगी। ये मुझे क्या हो रहा है?
तभी उसे काली दुनिया की देवी की आवाज सुनाई दी। दमयंती तुम्हारी आयु अब 98 साल छ माह हो गई है। तुम्हारे पास अब 18 माह का समय है। 18 माह मतलब? मतलब 100 वर्ष की आयु होने के बाद 15 माह के बाद तुम एकदम बूढ़ी हो जाओगी। और उसके बाद कुछ ही महीनों में तुम्हारी मौत हो जाएगी। यह सुनकर दमयंती के पैरों तले जमीन निकल गई।
लेकिन मैं कैसे मर सकती हूं? मैं तो बहुत शक्तिशाली हूं। डायनी योनि का एक नियम होता है। आयु के 100 वर्ष पूर्ण होने के बाद वो किसी भी इंसान का खून नहीं पी सकती। ना ही किसी मनुष्य का शिकार कर सकती है। उस समय उसे एक क्रिया करनी होती है जिसमें उसको जिंदा मनुष्य नहीं बल्कि 11 मुर्दों का खून पीना पड़ता है और यह क्रिया 100 वर्ष की आयु होने के 55 दिनों के भीतर करनी पड़ती है। अन्यथा 56वें दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी।
लेकिन जब मैं किसी मनुष्य को मार ही नहीं सकती और जिंदा मनुष्य का खून पी नहीं सकती तो इस क्रिया को करूंगी कैसे? वो तुमको करना है। कैसे करना है यह सब तुमको देखना है। लेकिन उस क्रिया को करने के बाद ही तुम्हारी आयु 1000 साल बढ़ जाएगी।
अन्यथा तुम्हारा अंत हो जाएगा। यह सुनकर दमयंती को कुछ भी समझ नहीं आया कि वो आगे क्या करें। इस तरह बीरमपुर में राजा विश्वजीत के प्रजाजन महामारी से जूझ रहे थे। महाराज नगर में फैली महामारी अब और बढ़ चुकी है।
अब इससे नहीं निपटा गया तो राज्य पूरी तरह से तबाह बर्बाद हो जाएगा। इस महामारी से निपटने का बंदोबस्त हम अवश्य करेंगे। मंत्री जी। उसी समय एक आदमी वहां पहुंचा। महाराज की जय हो। जी। कौन है आप? महाराज हम आपके पड़ोसी राज्य बल्लभगढ़ के राजा इंद्रसेन के दूत हैं। उन्होंने आपको शीघ्र ही मिलने बुलाया है।
उनका कहना है कि आपके राज्य पर जो संकट आया है
उससे निपटने में वह आपकी सहायता करना चाहते हैं। पिता श्री हमें नहीं लगता कि वह हमारी इस महामारी से निपटने में कोई सहायता कर सकते हैं।
हमें स्वयं ही कुछ करना पड़ेगा।
समस्या गंभीर है राजकुमारी। हमें एक बार अवश्य ही उनसे मिलना चाहिए। हम आज रात ही उनके राज्य के लिए निकलते हैं।
ठीक है पिताश्री इस महामारी का जो भी हल निकले आप शीघ्र ही वापस आने की कोशिश करें क्योंकि अगर आप इस बीमारी का इलाज नहीं ढूंढ पाए तो हमें ही कुछ करना होगा। अवश्य राजकुमारी। उसके बाद महाराज विश्वजीत सेनापति के साथ महल से निकले थे और फिर रास्ते में उनको एक सुंदर कन्या मिली जो कोई और नहीं बल्कि दमयंती ही थी।
दमयंती राजा विश्वजीत को किस तरह मिली और कैसे उसने राजा विश्वजीत को अपने प्रेम जाल में फंसाकर अपनी 11 मुर्दों के खून पीने वाली क्रिया को अंजाम दिया।
यह सब आप पिछले भाग में देख चुके थे। अंत में राजकुमारी मेघालय ने दमयंती पर हमला करके उसकी क्रिया भंग की थी और फिर दमयंती के शरीर वापस शक्ति पाने से पहले राज्य की सेना ने दमयंती को एक गुफा में बंद कर दिया था।
कहा गया था कि अगर राजकुमारी मेघालय के कदम उस गुफा पर पड़ेंगे तो दमयंती जिंदा हो सकती है।
और छठवें भाग में आपने देखा कि राजकुमारी मेघालय जो इस जन्म में मेघना है उसने अपने पिछले जन्म के पिता की लाश को एक गुफा से ढूंढकर निशिरलों के हवाले कर दिया था।
और फिर अपने शहर वापस आ गई थी। लेकिन भाग्य के अंत में हमने देखा था कि दमयंती एक ताबूत से बाहर आ गई है जो कि उसी गुफा में रखा था। वो कैसे वापस आई और अब आगे क्या करने वाली है यह सब जानने के लिए आइए देखते हैं आगे की कहानी।
तभी जनकपुर का माहौल बदल गया था।
तेज तूफानी हवाएं चलने लगी और आसमान में काले बादल छा गए। हे भगवान आज तो लगता है तूफान आने वाला है।
आसमान बिजली कड़क कर बार-बार गुफा पर गिर रही थी। उसकी गहराई में एक और ताबूत रखा था जो पिछली बार भी हमने देखा था। उसके अंदर से धमधम की आवाज हुई और फिर उसका ढक्कन खुल गया। धीरे से उसके अंदर से दमयंती बाहर आई। उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी। उसकी आंखें लालाल चमक रही थी और नाखून बहुत बहने हो गए थे।
हम जाग उठे हैं। हम फिर से आजाद हो गए। आजाद हो गए हम। वो भयानक अंदाज में हंसती हुई गुफा से बाहर की ओर बढ़ गई।
उसके चेहरे पर एक रहस्यमय मुस्कान थी।
जो आने वाले खतरे की तरफ इशारा कर रही थी। वो तालाब के किनारे पहुंची तो उसे पानी में उसका अक्स नजर आया। उसने पाया कि वो बूढ़ी दिख रही है। अरे ये क्या? मैं बूढ़ी कैसे हो सकती हूं? मेरी आयु तो 1000 साल हो गई थी।
तभी उसे तांत्रिका की आवाज सुनाई दी।
घबरा नहीं। पहले के जैसे अब तुझ में कमजोरी नहीं आएगी। लेकिन मैं बूढ़ी क्यों हो गई? इस तरफ मेघना इशिता से बात कर रही थी।
इशिता वो दमयंती किस गुफा में है? इसका पता तो हमने लगाया ही नहीं ना। अरे यार हम उस गांव में गए थे मृत्युंजय अमृत का सैंपल लाने। उसके बाद तू वहां की राजकुमारी निकली। निशिलों से हमारा सामना हुआ और आखिर में तूने उन्हें महाराज की लाश देकर हमेशा के लिए वापस भेज दिया। अब इस चैप्टर को क्लोज कर ना यार।
उस दमयंती का क्या हुआ? तू इस बारे में क्यों सोच रही है?
नहीं हमें उसके बारे में पता होना चाहिए ना। ओ बहन तू अब काम पर ध्यान दे। दमयंती तब तक जिंदा नहीं होगी जब तक तू उस गुफा में कदम नहीं रखेगी जिस गुफा में उसे रखवाया गया था। पर हमें तो उस गुफा के बारे में कुछ पता ही नहीं है।
इसका मतलब ना तो कभी उस गुफा के अंदर जाएगी ना कभी वो वापस उठेगी। यह सुनकर मेघना चुप तो हो गई लेकिन उसके दिमाग में अभी भी बहुत से सवाल चल रहे थे।
वहीं बीरमपुर में अनुज अपने घर पर बैठा हुआ था। अरे खाना खाएगा या नहीं? कब से इसी सोफे पर चिपक के बैठा है। मां मुझे भूख नहीं लग रही है। जब लगेगी तो खा लूंगा ना। आप खा लो। अब उन्हें कैसे बताऊं कि मुझे मेघना की याद आ रही है।
इससे अच्छा तो निशिलो कभी इस गांव से जाते ही नहीं।
मेघना यहां मेरे साथ तो रहती। इस तरफ दमयंती जो अब बूढ़ी हो चुकी थी। उसको समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ ऐसा क्या हो रहा है। तभी उसे एक आवाज सुनाई दी और उसने आसमान में देखा। अरे ये क्या चीज है जो आसमान में उड़ रही है? यह तो कोई विमान लगता है।
उसने आंखें बंद की तो उसे विमान में बैठे हुए लोगों की आवाजें सुनाई दी। अरे इस विमान में मनुष्य बैठे हैं। मतलब इस युग में मनुष्य हवा में उड़कर यात्रा करते हैं।
ये संसार इतना आगे निकल गया है। ऐसे मैं कितने सालों बाद उठी हूं। कहीं मेरे 1000 वर्ष पूरे तो नहीं हो गए? तभी उसे जोरों की प्यास लगने लगी। आ बहुत प्यास लगी है। कोई शिकार ढूंढना पड़ेगा। वो अब गांव की तरफ बढ़ गई।
जनकपुरी में सभी गांव के लोग अपने-अपने घरों में घुस गए थे। इस तरह का तूफान तो जनकपुरी में कभी नहीं आया। इतनी तेज हवा कहीं घर की छत छप्पर ना उड़ जाए जहां सभी गांव के लोग घरों में घुस चुके थे। वहीं कोई था जो कि अभी भी गलियों में भटक रहा था।
बड़े दिनों के बाद चोरी करने का प्लान बना था। इस कमबख्त तूफान ने सब खराब कर दिया। अब तो घरों में सभी लोग जाग रहे होंगे। चोरी भी नहीं कर पाऊंगा।
तभी उसे सामने से दमयंती आती हुई नजर आई। अरे यह बूढ़ी कौन है? बाद में कुछ कदम बढ़ाकर दमयंती के पास पहुंचा। दमयंती उसको ऊपर से नीचे तक देखने लगी। इसने कितने विचित्र वस्त्र पहने हैं। शायद इस जमाने के लोग यहीं पहनते हैं।
अरे अम्मा इतने तूफान में कहां जा रही हो? घर चली जाओ।
इसको सुनसान जगह ले जाकर इसी का शिकार कर लेती हूं। बेटा मैं अपने घर ही जा रही थी। अपनी पुत्री से भेंट करके आ रही हूं। भेंट करके वो क्या होता है? अब मतलब मिलकर आ रही हूं बेटा। लेकिन अब चला नहीं जा रहा। कोई बात नहीं अम्मा जी।
आओ मैं आपको घर छोड़ देता हूं। आइए मेरी पीठ पर चढ़ जाइए। उस आदमी ने दमयंती को अपनी पीठ पर बैठा लिया और आगे बढ़ गया। इस जमाने के लोग तो काफी शरीफ हैं। ये अच्छा है। मुझे इनका शिकार करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।
तभी वो आदमी मन में सोचने लगा।
इस बुढ़िया के घर में कोई नहीं रहता होगा। तभी तो अकेली आ रही है। अब इसके घर जाऊंगा और फिर इसे मौत के घाट उतार कर इसका सारा धन लूट कर रघु चक्कर हो जाऊंगा। उस आदमी के मन की बात दमयंती ने सुन ली और उसे गुस्सा आ गया।
उसने अपने हाथों को उसकी गर्दन पर जकड़ लिया। अरे अम्मा क्या कर रही है? तेरा यह दुस्साहस तू मुझे मौत के घाट उतारने की सोच रहा है।
यह सुनकर उस आदमी को बहुत हैरानी हुई। दमती ने पूरी ताकत से उसका गला घोट लिया। वो जमीन पर गिरकर खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगा। उसकी चीख सुनकर आसपास पेड़ों पर बैठे पक्षी भड़भड़ाते हुए फिजा में उड़ गए।
दमयंती उसे पूरी तरह से खाली करके उठ खड़ी हुई। अब सुकून मिल रहा है। तभी उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा।
अब ये क्या हो रहा है?
तभी उसके शरीर की रंगत बिखरने लगी। उसके बाल भी काले घने हो गए। देखते ही देखते वो पूरी तरह से जवान और खूबसूरत हो गई। उसने अपने चेहरे पर हाथ फेरा तो अपनी खूबसूरती को वापस पाकर उसे बहुत खुशी हुई।
मतलब मैं बूढ़ी सिर्फ इस वजह से हुई थी कि मैंने पिछले कई वर्षों से खून नहीं पिया था। इसका मतलब मेरी जिंदगी के 1000 वर्ष पूरे नहीं हुए। अब मैं राजकुमारी मेघालय से अपने साथ हुई सभी धोखेबाजी का बदला लूंगी। मार दूंगी।
उसको चारों तरफ से मार दूंगी उसको। चारों तरफ तबाही मचा दूंगी। दमयंती आगे क्या करने वाली है? वो अचानक कैसे आजाद हो गई? क्या अब मेघना की जिंदगी में खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। अनुज मेघना को पसंद करने लगा है। क्या होगा इसकी प्रेम कहानी में? बने रहिए हमारे साथ। इस रोमांचक और डरावनी कहानी के अगले भाग।
ताबूत पार्ट नौ में भी सिर्फ और सिर्फ Www.ScaryPanchal.Com पर

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