वो इधर-उधर देख रही थी।
लेकिन घने जंगल के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। तभी उसे एक आवाज सुनाई दी। यह आवाज सुनकर वो अचानक से डर गई और झाड़ियों के बीच जा छिपी। उसने देखा कि चार आदमी कंधे पर एक ताबूत उठाए आगे बढ़ रहे हैं। और उन्हें पहचानते ही वो बेहद डर गई।
हे काली दुनिया की देवी मुझे बचा लीजिए। वो चारों उस लड़की के जितना करीब आ रहे थे
उसके दिल में खौफ और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा था। वो उस तक पहुंचने ही वाले थे। तभी अचानक उसे झटका लगा। अरे उठ दमियंती बेटी क्या हो गया तुझे? वो नींद से जागी। उसने देखा कि उसकी मां उसे जगा रही थी और वो पूरी तरह से पसीनो से भीगी थी। हे भगवान शुक्र है सपना ही था। ये रोजाना सोते समय क्या हो जाता है तुझे? पता नहीं मां क्यों रोज-रोज़ एक ही सपना आता है।
पता नहीं क्यों।
दमयंती बिस्तर से उठी। और फिर उसने अपने मां-बाप के साथ नाश्ता किया। उसके पिता एक किसान थे और खेती करके ही वह अपने और अपने परिवार का घर जलाते थे।
एक शाम उसके पिता खेतों से वापस नहीं लौटे और शाम हो चली थी। ये कहां रह गए? मुझे बहुत चिंता हो रही है इनकी। मां मैं पिताजी को देख कर आती हूं। अच्छा ठीक है बेटी। चल मैं भी तेरे साथ चलती हूं। नहीं मां मैं चली जाऊंगी। आपके घुटनों में पहले ही दर्द है। आप यहीं आराम कीजिए। संभल के जाना बेटी। दमयंती अपने पिता को ढूंढने के लिए घर से निकली और खेतों की तरफ चली गई। वो खेतों में पहुंची तो सुनसान रास्ता और घना अंधेरा देखकर उसे डर लगने लगा। हे भगवान रात में तो यह इलाका कितना डरावना लग रहा है।
वो तेज-तेज़ कदमों के साथ आगे बढ़ रही थी।
तभी दमयंती उसे एक आवाज सुनाई दी। कौन है? कौन है? दमयंती मेरे पास चली आओ। तुम अभी इस दुनिया के योग्य नहीं हो। यह आवाज सुनकर दमयंती बेहद डर गई। हे भगवान मुझे ये आवाज बार-बार क्यों सुनाई देती है? तभी उसे कुछ ही दूरी पर एक बड़े से पेड़ के नीचे एक आकृति दिखाई दी। कौन है? चली आओ दमयंती। तुम इस दुनिया के योग्य नहीं हो। ये देखकर उसके माथे पर पसीने आ गए।
और वो डर कर वापस से घर की तरफ भागी। लेकिन उसके कानों में बार-बार वही आवाज आ रही थी। चली आओ दमयंती तुम इस दुनिया के योग्य नहीं हो।
दमयंती मेरे पास चली आओ। तुम अभी इस दुनिया के योग्य नहीं हो। और लंबी-लंबी सांसे लेने लगी। [हांफने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] अरे दमयंती बेटा क्या हुआ? मां मां दमयंती अपनी मां से लिपट गई। तभी उसके पिता बोले बस नाटक शुरू। क्यों गई थी तू खेतों में? बता मुझे। पिताजी मैं तो आपको देखने गई थी। तू चुप कर। पता है मुझे। तुझे बस बाहर जाने का बहाना चाहिए। गई होगी? अपने किसी प्रेमी से मिलने। नहीं जी। ये आपको ही देखने गई थी। ये आप क्या कह रहे हैं?
तू चुप कर। तूने ही पैदा किया है इसको। अगर बेटा पैदा करती तो मेरा काम मैं हाथ बटाता।
इसकी तरह मुसीबत नहीं पैदा करता। दमयंती अपने पिता के स्वभाव से बहुत दुखी थी। दिन में बाप के ताने और रात में उसे रोजाना वही सपना आता था।
जिसमें चार लोग कंधे पर ताबूत उठाए घूम रहे होते थे। दिन और रात उसे कभी सुकून नहीं था। उसी समय गांव में भी अजीब सी घटनाएं घटने लगी थी। एक आदमी मोहन नगर से घर को लौट रहा था। आज तो कितने दिनों बाद बीवी से मिलूंगा। आज की रात बहुत खूबसूरत होगी। नौजवान जरा इधर देखो। ये आवाज सुनते ही मोहन ने पीछे पलट कर देखा। उसने पाया कि पीछे भड़कीले कपड़े पहने एक लड़की खड़ी है।
गोरा मखमली बदन। काले घने बाल वो कोई अप्सरा लग रही थी।
उसके चेहरे पर नकाब लगा था। इसके बावजूद उसकी नीली आंखें मोहन के दिल पर किसी तेज खंजर से ही गहरा हमला कर रही थी। कौन हो तुम? मेरे करीब आओ मोहन। अपनी पत्नी को भूल जाओगे। [हंसी] ये सुनकर मोहन के चेहरे पर मुस्कान झलक आई। और वो भागकर झट से उस लड़की के गले लग गया। वो उसकी कोमल कमर पर हाथ फेर रहा था। तभी उस लड़की ने भी उसे कसकर गले लगा लिया। तभी मोहन को उसके शरीर की गर्मी महसूस हुई। तुम इतनी गर्म कैसे हो रही हो? [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] यह कहते हुए वो उससे अलग हुआ। तो अब उस लड़की की आंखें लाल चमक रही थी।
यह देखकर मोहन का दिल दहल उठा और उसकी चीख जंगल में गूंज कर रह गई। कुछ देर बाद मोहन की लाश एक पेड़ की डाल पर लटकी थी।
उसका शरीर पूरी तरह से पीला पड़ा था। गांव के लोग इन घटनाओं से परेशान थे। और दमयंती के साथ अभी भी उसके पिता की तरफ से बुरा व्यवहार चल रहा था। इसी तरह उसकी उम्र 25 साल हो गई थी और अब उसकी मां को उसके विवाह की चिंता होने लगी थी।
हमारी दमयंती विवाह के योग्य हो गई है जी। हमें लड़का देखना शुरू कर देना चाहिए। क्या मतलब है तेरा? लड़का देखना शुरू कर देना चाहिए। क्या तेरे पास दान दहेज है उसे देने के लिए? अरे हमारा जो कुछ भी है उसी का तो है। कौन सा अपना बेटा है जो आपको उस संपत्ति उसके नाम करनी है। मैंने सोच लिया है। मैं उसका विवाह जमींदार से करवा दूंगा। ये आप क्या कह रहे हैं? जमींदार तो आपकी उम्र का है।
आप हमारी पुत्री का विवाह उससे कैसे करवा सकते हैं? ये सब दमयंती अपने कमरे से सुन रही थी। और मन ही मन वो अपने आप को कोस रही थी।
मैंने उससे बात कर ली है।
वो विवाह भी करेगा और हमें 500 स्वर्ण मुद्राएं भी देगा। क्या आपने अपनी पुत्री का सौदा कर लिया? 5000 मुद्राओं के लिए आप उसको बेच देंगे? यह सुनकर दमयंती के पैरों तले जमीन निकल गई। और वो उसी रात को अपने माता-पिता के सोने के बाद घर से भाग निकली।
कहते हैं इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसका अकेलापन होता है जो अब उसके साथ था। जिन अंधेरों से उसे डर लगता था अब वो उसका सामना कर रही थी।
वह जंगल में एक पुराने से झोपड़े में रहने लगी।
लेकिन अभी भी वो आवाजें उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी। तुमको अभी तक कुछ समझ नहीं आया। आखिर कब तक तुम इस तरह जिओगी? तुम इस दुनिया के योग्य नहीं हो दमयंती। आ जाओ मेरे पास चली आओ। उसे महसूस हुआ कि कोई उसकी झोपड़ी के बाहर भटक रहा है।
तो उसका डर और ज्यादा बढ़ गया। वो कोने में सिमट कर बैठ गई और कांपने लगी। लेकिन वो आवाज और कदमों की आहट उसे बार-बार सुनाई दे रही थी।
इसी तरह उसकी रात निकल गई।
मैं यहां नहीं रह सकती। मुझे इंसानों के बीच ही रहना होगा। वहीं मैं सुरक्षित हूं। इसी सोच के साथ दमयंती उस समय विजयनगर के राजा भीम सिंह के यहां हाजिर हुई। उसे देखकर महाराज के मन में अजीब भावनाएं उत्पन्न होने लगी। सुंदरी कौन हो तुम? दमयंती ने महाराज को अपनी पूरी जीवन गाथा सुनाई। [संगीत] जिसे सुनकर महाराज को बहुत आश्चर्य हुआ। दमयंती हमें बहुत अफसोस है कि आपके साथ इतना कुछ हुआ। सिर्फ इस वजह से कि आप कन्या हैं। इतना कुछ होने के बाद भी आपने कोई गलत कदम नहीं उठाया।
हम आपकी सराहना करते हैं और आपको अपने महल में रहने का प्रस्ताव रखते हैं। यह सुनकर दमयंती बहुत खुश हुई। महाराज की जय हो। महाराज भीम सिंह की जय हो। दमयंती को महाराज ने कक्ष दे दिया और वो उसमें आकर बहुत खुशी थे। कितने न्यायप्रिय राजा है
भीम सिंह। जहां हमारे पिता ने हमें उनके घर में बोध समझा वहीं महाराज ने मुझे अपने इतने बड़े महल में जगह दे दी।
यह तुम्हारी गलत सोच है दमयंती। तुम इस दुनिया के योग्य नहीं हो। मेरे पास चली आओ। यह आवाज सुनकर दमयंती ने अपने कानों पर हाथ रख लिया। नहीं। तभी उसके दरवाजे पर दस्तक हुई। दमयंती जी उसने उठकर दरवाजा खोला तो एक सिपाही सामने खड़ा था।
दमयंती तुमको महाराज ने बुलाया है।
क्या महाराज ने हमें बुलाया है इतनी रात में? जी जल्दी चलिए वरना वो क्रोधित हो जाएंगे। यह सुनकर दमयंती उस सिपाही के साथ कक्ष से निकली और महाराज के कक्ष में पहुंची। जहां महाराज मदिरा पान कर रहे थे।
आओ दमयंती आओ बैठो। यश सुन दमयंती उनके सामने जाकर बैठ गई। दमयंती हमने तुमसे ज्यादा खूबसूरत कन्या अपने पूरे जीवन काल में नहीं देखी। महाराज हमने भी आपके जैसा कोमल हृदय पुरुष अपने जीवन काल में नहीं देखा। हम सोच रहे थे आपको अपनी रानी बनाए। लेकिन ये क्या महाराज? ये आप क्या सोच रही हैं? अगर आपकी जाति ऊंच होती तो हम आपको रानी बना लेते। महाराज मैं आपकी दासी बनके ही खुश हूं। मुझे रानी बनने का कोई लोभ नहीं। अवश्य आप हमारी मुख्य दासी हैं।
ये कहकर महाराज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने करीब खींच लिया। महाराज यह आप क्या कर रहे हैं? महाराज ने दमयंती को कसकर गले लगा लिया। तुम हमारी दासी हो। एक दासी का कर्तव्य पूर्ण कीजिए। यह सुनकर दमयंती हैरान रह गई।
उसकी चीखें कक्ष के बाहर तक जा रही थी।
नहीं छोड़िए मुझे। छोड़िए नहीं। [चीखने की आवाज़] और उसके बाहर खड़ा पहरेदार भी उनको सुनकर मुस्कुरा रहा था। आधी रात के समय महाराज को नींद आ गई लेकिन दमयंती वहीं पड़ी रो रही थी। [हंसी] [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] उसने एक बार महाराज की तरफ गुस्से से देखा और फिर बाहर निकली। उस समय बाहर खड़ा पहरेदार भी सो गया था। अब दमयंती महल से भी चुपचाप निकल आई। लेकिन अब उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो कहां जाए। वो आंसू बहाती हुई सुनसान रास्ते से आगे बढ़ रही थी।
तभी उसे कुछ याद आया। सही थी तुम। मैं इस दुनिया के योग्य नहीं हूं। कोई मुझे कुछ नहीं समझता। मुझे तुम्हारी जरूरत है। मुझे पता था कि तुम एक दिन मेरी पुकार जरूर सुनोगी। हां, अब मुझे समझ आ गया है। लेकिन अब तुमको भी मेरे सामने आना होगा।
कहां हो तुम? जहां तुम हो, उससे दक्षिण दिशा में कुछ कदम की दूरी पर श्मशान भूमि से दो कोस दूर मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं। दमयंती दक्षिण दिशा में रवाना हुई।
और कुछ कदम चलने के बाद वो श्मशान भूमि पहुंची। उसके बाद दो कोस चलने के बाद वो एक जगह पहुंची जहां उसने देखा एक स्त्री कुंड के सामने बैठी है। आओ दमयंती। कहिए आप मुझे कैसे जानती हैं? आपकी आवाज मुझ तक कैसे पहुंचती थी? वो सब मेरी शक्तियों का असर था। मैं एक सिद्ध तांत्रिका हूं। मुझे तुम्हारी जरूरत है
और तुमको मेरी। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो भगवान के खेल को समझते हैं। जो हमेशा हम मनुष्य को परेशानी में डालता है। भुखमरी लाता है।
भूकंप लाता है। कभी मनुष्यों द्वारा तो कभी सीधे तौर पर हमें परेशानियां दुख दर्द देता रहता है। लेकिन फिर भी लोग उसकी पूजा उपासना करते हैं।
लेकिन मुझे पता था कि तुम एक दिन उसकी चालाकी समझ जाओगे और मेरे पास जरूर आओगे। हां, मुझे नफरत है इंसानों से। मुझे हर एक मर्द से नफरत है। मेरे पिता मुझे बोझ समझते थे और जिस राजा ने मुझे अपने महल में पनाह दी, उसने मेरे साथ वो किया जो उसे शोभा नहीं देता। और यह सब मेरे साथ तब हुआ जब मैं भगवान को बहुत कुछ समझती थी। लेकिन अब मुझे भगवान में विश्वास नहीं है।
नहीं है वो। बहुत अच्छे। लेकिन तुमको मेरी मदद करके क्या मिलेगा? तुमने मुझे ही क्यों चुना? मेरी उम्र 30 वर्ष हो गई है। अब मुझे एक महाविद्या करने के लिए एक शिष्य की जरूरत है। अगर तुम मेरी शिष्य बनकर मेरी बताई विद्या की क्रिया संपन्न करने में मेरी मदद करोगे तो तुम्हारे अंदर अपार शक्तियां आ जाएंगी और मेरी शक्तियां दोगुनी हो जाएंगी। मैं करूंगी। जो आप कहेंगे मैं सब करूंगी।
ये सुनकर तांत्रिका के चेहरे पर मुस्कान झाला आई। [हंसी] जा मेरी उस कुटिया में जा और जो वस्त्र वहां रखे हैं उन्हें धारण करके आ। उसके कहने पर दमयंती उसकी कुटिया में गई और कुछ देर बाद बाहर निकली। उसके द्वारा दिए गए कपड़े काफी भड़कीले थे।
शैतान को खुश करना है
तो ऐसे वस्त्र धारण करना स्वाभाविक है। हैरान ना हो। अपनी आंखें बंद कर लो। दमयंती ने अपनी आंखें बंद कर ली। और फिर तांत्रिका ने महामंत्रों का जाप शुरू किया।
वो कई बड़े-बड़े मंत्रों को पढ़ती और उनके पूरा होते ही दमयंती के शरीर पर अभिमंत्रित जल डालते। सर्दी के मौसम में ठंडा पानी दमयंती के कोमल दमकते शरीर पर पड़ता तो वह सियाहार उठती। लेकिन वो अपनी जगह पर आंखें बंद किए बैठी थी।
इसी तरह तीन रातों तक उस तांत्रिका ने दमयंती का जल नहान किया और फिर उसने दमयंती को एक बड़ा सा पत्र दिया। इस मंत्र को याद कर लो। मंत्र बड़ा है, लेकिन इसको तुम्हें पूरा याद करना है। दमयंती मंत्र को याद करने में लग गई। वह पूरे-पूरे दिन उस पत्र को लेकर बैठी रहती है।
और करीब चार दिनों में जाकर। तंत्रिका अब मुझे वो मंत्र पूरा याद हो गया है।
बहुत अच्छे। यह कहकर तांत्रिका ने दमयंती के सामने एक मटका रखा और बोली आज से तुमको मध्य रात्रि से लेकर सुबह होने तक वही मंत्र पढ़ना है
और हर मंत्र के पूर्ण हो जाने पर इस मटकी के पानी में फूंकना है।
जी जैसा आप बोले। यह कहकर दमयंती वो क्रिया करने में लग गई। अब तांत्रिका अपनी कुटिया में आराम करने लगी और दमयंती ने पूरी रात मंत्रो जाप किया। सुबह सूरज निकलने से पहले तांत्रिका उसके पास पहुंची। बहुत अच्छी दमयंती अब तुम विश्राम कर सकती हो।
यह सुनकर दमयंती खड़ी हुई और फिर कुटिया में चली गई और वो तांत्रिका उस मटकी को लेकर घने जंगल की तरफ चली गई। यह तंत्रिका कहां चली गई?
अब दमयंती इसी तरह से रोजाना मंत्रों को जाप करके मटके में फूंकती और फिर तांत्रिका उसे उठाकर जंगल की तरफ चली जाती। और यह देखकर ना जाने क्यों वो दमयंती के दिल में सवाल उठ रहे थे। कि तंत्रिका आखिर रोजाना जाती कहां है। एक दिन दमयंती चुपचाप तांत्रिका के पीछे चली गई। तांत्रिका बहुत ही घने जंगल में जा रही थी। जहां जाते समय दमयंती को भी डर लग रहा था।
उसने देखा कि तांत्रिका एक बड़ी सी मूर्ति के सामने जाकर रुकी। और उसने अपना नकाब हटाया तो पता चला उसका आधा चेहरा जलसा हुआ था।
यह देखकर दमयंती चौंक पड़ी। शैतानों की देवी क्रिया पूरी होने वाली है।
अपना आशीर्वाद दीजिए। उसके इतना कहते ही उस मूर्ति से एक दिव्य रोशनी निकली। और फिर वो उस मटके के अंदर चली गई। धन्य हो शैतानों की देवी। यह कहकर वो झाड़ियों में चली गई। यह कहां गई? तभी झाड़ियों में हलचल हुई। तांत्रिका वहां से एक लड़के को निकाल कर लाई।
पैर रस्सी से बंधे थे।
[चीखने की आवाज़] तभी तांत्रिका की आंख लाल होकर चमकने लगी और उसने उस लड़के पर हमला बोल दिया। तांत्रिका ने उस लड़के के साथ वो किया जो दमयंती के लिए देखना बहुत ही भयानक था और कुछ ही देर में वो लड़का मृत हो गया। उसका शरीर नीला पड़ गया।
ये तो एक डायनी है। तंत्र का नहीं। [हंसी] क्रिया पूर्ण होते ही मैं इस मटकी का अभिमंत्रित जल पी लूंगी। और तभी मैं कर्ण पिशाचिनी की शक्तियां भी हासिल कर लूंगी। उसके बाद अपने इस झूल से शरीर को छोड़कर मेरी आत्मा दमयंती के शरीर में वास कर लेगी।
तब मैं बनूंगी इस संसार की सबसे खूबसूरत डायनी जिसके पास कर्ण पिशाचिनी की शक्तियां भी होंगी। [हंसी] ये सुनकर दमयंती के पैरों तले जमीन निकल गई।
वो वहां से भागी।
और चुपचाप आकर अपनी जगह पर लेट गई। अब मैं क्या करूं? यह सिर्फ मेरा इस्तेमाल कर रही है। यह मुझसे क्रिया करवा रही है।
जिससे यह किसी कर्ण-पिशाचिनी की शक्तियां हासिल कर लेगी और मेरे शरीर में वास कर लेगी। इसका मतलब मैं मर जाऊंगी। दमयंती को अब बहुत ही बुरा लग रहा था। लेकिन इस बार उसने इस मुसीबत से निकलने का एक हाल खोज लिया था।
वो अगली रात भी क्रिया करने के लिए पहुंची।
आज की क्रिया पूर्ण होते ही तुम्हारे अंदर अपार शक्तियां आ जाएंगी और मुझे हासिल होंगी कर्ण पिशाचिनी की शक्तियां। आज की रात भी उतनी ही लगन से क्रिया करना।
दमयंती। यह कर्ण पिशाचिनी कौन होती है?
कर्ण पिशाचिनी में वो शक्ति होती है कि वह सामने मौजूद इंसान के मन की बात सुन सकती है और किसी इंसान को देखकर उसका भूतकाल भी जान सकती है।
यह सुनकर दमयंती ने कुछ सोचा और फिर क्रिया करने बैठ गई जो कि आखिरी रात थी। आज रात तांत्रिका को भी नींद नहीं आ रही थी। वो दमयंती के पास बैठकर उसे निहार रही थी। दमयंती को मंत्र पढ़ते हुए सुबह होने ही वाली थी। तभी डायनी खुश होते हुए खड़ी हुई और दमयंती की तरफ बढ़ी।
वो उस मटकी को उठाने ही वाली थी
कि तभी दमयंती ने अपने कमर बंद में छिपा खंजर निकाला और [चीखने की आवाज़] तभी डायनी जमीन पर गिर कर तड़पने लगी। [चीखने की आवाज़] हा [हंसी] और तभी दमयंती ने मटकी उठाकर अपने मुंह से लगा ली। यह देखकर डायनी चिल्ला उठी। नहीं दमयंती ने पूरा पानी पी लिया और मटके को जमीन पर मारकर फोड़ दिया।
[चीखने की आवाज़] डायनी एक तेज चीख के साथ राख बनकर खत्म हो गई। दमयंती अभी उसे देख ही रही थी कि तभी तेज हवा चली और तूफान आ गया।
दमयंती अपने आप हवा में उड़ गई।
[चीखने की आवाज़] और वो उसी मूर्ति के सामने जाकर गिरी। दमयंती तुमने डायनी को उसकी क्रिया के समय मार डाला। इसीलिए अब डायनी की सारी शक्तियां तुम्हारे शरीर में आ चुकी हैं।
इसके साथ ही तुमने जो क्रिया की थी उसके जरिए कर्ण पिशाचिनी की शक्तियां भी तुमको हासिल हो गई हैं। अब तुम हो मेरी सबसे प्रिय शिष्य, सबसे ज्यादा शक्तिशाली और सुंदर दाहिनी दमयंती। यह सुनकर दमयंती ने उसके सामने हाथ जोड़ लिए और भयानक अंदाज में हंसने लगी। [हंसी] दमयंती के साथ आगे क्या होगा और उसका निशिलर मुलों के साथ क्या संबंध है? यह जानने के लिए बने रहिए ताबूत के अगले भाग में भी।
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