TABOOT 6 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

देखो अगर हमने गांव के लोगों को यह बात बता दी कि तुम ही राजकुमारी मेघालय हो तो हो सकता है

वो लोग तुम पर गुस्सा करें। हमें थोड़ी समझदारी से काम लेना होगा। लेकिन हम [संगीत] कर क्या सकते हैं? कैसे पता करें कि पिताजी आई मीन महाराज और मेघालय का आगे क्या हुआ? रुको हमें महाराज और राजकुमारी मेघालय के बारे में तो पता है ना।

अब बीरमपुर पुराण खत्म हो गया तो जरूरी नहीं कि बाद की कहानी भी इतिहास से मिट गई हो। तुम कहना क्या चाहती हो इशिता?

मेरा मतलब है कि हमें हिस्ट्री के प्रोफेसर नवीन से बात करनी चाहिए।

उन्होंने इतिहास की हर तरह की अजीब से अजीब और पुरानी से पुरानी कथाओं, घटनाओं के बारे में पढ़ने का शौक है। हो सकता है उन्होंने राजकुमारी मेघालय और महाराज विश्वजीत के बारे में भी पढ़ा हो। हां, सही कहा। हम लोग कल ही उनसे मिलने चलते हैं।

अगली सुबह ये तीनों बिना किसी को बताए।

गांव से निकल गए। मेघना अनुज की बराबर में बैठी थी। और इशिता पीछे थी। वैसे अनुज एक बात पूछूं? हां बोलो। मैं तो मेघना की बेस्ट फ्रेंड हूं। लेकिन तुम मेघना के लिए इतना क्यों फील कर रहे हो जो उसकी हेल्प करने के लिए हमेशा तैयार रहते हो?

इस पर मेघना ने इशिता की तरफ देखा। इशिता, मैं इस टाइम बहुत सीरियस हूं। तुम प्लीज ऐसी कोई बात मत करो। मुझे अपने ऊपर इतनी गिल्टी फील हो रही है कि मैं यह मैं ही जानती हूं।

बीरमपुर से 2 घंटे का सफर तय करके यह सभी प्रोफेसर नवीन के घर पहुंचे। हेलो प्रोफेसर नवीन। हेलो इशिता। कैसे हो? ठीक हूं प्रोफेसर। ये मेरी फ्रेंड है मेघना और ये अनुज। कहो कोई परेशानी? प्रोफेसर [संगीत] हमें आपकी थोड़ी मदद चाहिए थी।

सन 1600 में मध्य प्रदेश में राजा विश्वजीत का शासन था। जिनकी एक राजकुमारी भी थी मेघालय। क्या आप आपने उनके बारे में कुछ पढ़ा है?

विश्वजीत और राजकुमारी मेघालय प्रोफेसर कुछ देर तक सोचे और फिर बोले नहीं इनके बारे में तो मैंने कभी नहीं पढ़ा। ओह नो अब क्या करें? वैसे तुमको इनके बारे में क्या जानना है? कौन थे ये दोनों? प्रोफेसर बीरमपुर गांव में महाराज विश्वजीत और उनकी राजकुमारी मेघालय का शासन था। उन्होंने अपने राज्य के लोगों की जान बचाने के लिए अपने राज्य को ही छोड़ दिया था

और उसके बाद उन दोनों का क्या हुआ यह किसी को पता नहीं चला। हां और हमें यही जानना है कि अपने राज्य से निकलने के बाद उन दोनों का क्या हुआ।

ओ राजा विश्वजीत याद आया।

मैंने इनके बारे में रहस्यमई घटनाओं की किताब पढ़ा है। रहस्यमई घटना हां रुको मैं [संगीत] उसे लेकर आता हूं। प्रोफेसर ने एक किताब निकाली और कुछ पन्ने पलटने के बाद उन्होंने इशिता के सामने किताब रख दी। सन 1600 में जनकपुरी में एक अधेड़ उम्र का आदमी पहुंचा और वो एक सेठ के यहां काम करने लगा। सेठ [संगीत] यह देखकर हैरान था

कि उस आदमी का चाल चलन बोलने का तरीका उठने बैठने खाने-पीने का अंदाज बिल्कुल राजा महाराजाओं वाला था। लेकिन पूछने पर वो बताता था

कि वो एक मजदूर का बेटा है और अब अनाथ है।

लेकिन इसके बावजूद किसी को उसकी बात पर भरोसा नहीं था। रात को सोते समय वो बार-बार राजकुमारी मेघालय का नाम पुकारा करता था।

धीरे-धीरे उसकी तबीयत बहुत खराब होने लगी और उसके माथे पर हमेशा चिंता की लकीरें नजर आती थी। कुछ ही महीनों में उसकी हालत बहुत बुरी हो गई और वो मरने के कगार पर आ गया। उसकी आखिरी ख्वाहिश भी बड़ी अजीब थी। उसने कहा कि उसे मरने के बाद उसका अंतिम संस्कार ना किया जाए। बल्कि उसकी लाश को बीरमपुर गांव पहुंचा दिया जाए।

लेकिन उस समय जनकपुर और बीरमपुर के बीच कहासनी चल रही थी।

इसलिए उस सेठ ने उसकी लाश को ताबूत में बंद किया और उसे जनकपुरी के जंगल की एक गुफा में रखवा दिया। यह सुनकर मेघना की आंखों में हल्के से अश्क नजर आए।

मतलब उन्होंने मरते-मरते भी अपनी प्रजा की सोची। मतलब आपका बहुत-बहुत शुक्रिया प्रोफेसर। आपकी वजह से हमारी बहुत हेल्प हुई है। यू आर वेलकम। ये तीनों प्रोफेसर से विदा लेकर वहां से निकले। अब हमें जनकपुरी जाना है और उस गुफा के अंदर उस ताबूत को खोज निकालना है।

लेकिन इतने सालों बाद उनकी लाश हमें मिलेगी भी कि नहीं?

वो तो वहां जाकर ही पता चलेगा। ये तीनों अब वापस से बीरमपुर पहुंचे। अनुज, इशिता, मेघना। हां पिताजी। तुम तीनों कहां से आ रहे हो? वो पिताजी ये सब देखने जानने के बाद हम तीनों को काफी डर लग रहा था। तो हमने सोचा थोड़ा घूम कर आते हैं। ठीक है।

लेकिन अभी भी निशिर मोलों से हम आजाद नहीं है। रात में कोई कहीं नहीं जाएगा। ठीक है। जी पिताजी। ये तीनों घर के अंदर पहुंचे और अनुज इनके साथ कमरे में गया।

हम लोग शाम को 5:00 बजे यहां से निकलेंगे। ठीक है।

लेकिन किसी ने देख लिया तो। कोई नहीं देखेगा। हम वहां जाएंगे महाराज विश्वजीत की लाश ढूंढेंगे और उसे लाकर खंडहर में रख देंगे। बाकी का प्लान बाद में करेंगे। ये क्या बातें कर रहे हो तुम तीनों? मुखिया की आवाज सुनकर ये तीनों चौंक पड़े। उस समय मुखिया के साथ तांत्रिक महाराज और ठाकुरन ने भी इनकी बातें सुन ली थी। पिताजी वो क्या अनुज बेटा जो भी बात है

ठीक से बताओ। महाराज विश्वजीत के बारे में तुम क्या बोल रहे थे?

निशिलो इसीलिए गांव में घूम रहे हैं क्योंकि उनको महाराज विश्वजीत की लाश चाहिए। उनकी लाश जनकपुरी के जंगल की गुफा में रखी है।

लेकिन तुमको यह सब कैसे पता? और जैसा कि राजकुमारी मेघालय ने तय किया था कि निशिरलो जब ही जाएंगे जब राजकुमारी के कदम बीरमपुर की जमीन पर पड़ेंगे। तो ऐसा कैसे हुआ? इस पर मेघना ने एक कदम आगे बढ़ाया। क्योंकि राजकुमारी यहां आ चुकी है।

कौन? मैं मेघना। पिछले जन्म में राजकुमारी मेघालय मैं ही थी। यह सुनकर सभी की हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा। मुखिया का मुंह खुला का खुला रह गया। ये तुम क्या कह रही हो? हां, जब से हम यहां आए हैं, तभी से वह वापस आए हैं

और वह चाबी जिस तक पहुंचने में हमने आप लोगों की मदद की थी, उसके बारे में भी हमें हमारे सपने में पता चला था। जिसमें हमने हमारे पिछले जन्म के बारे में बहुत कुछ देखा था। जो भी हमने सपने में देखा वो सभी राजमहल में मौजूद है।

मेघना की बातें सुनकर इन सभी को अब यकीन हो गया था कि वही राजकुमारी मेघालय है। तो मेघना बेटा जनकपुरी में हम भी तुम्हारे साथ चलते हैं।

उस ताबूत को ढूंढने में हम सभी को मेहनत करनी होगी। यह सुनकर [संगीत] अब इन तीनों की हिम्मत बंध गई थी। अब मुखिया ने भी अपनी गाड़ी निकाली और यह सभी जनकपुर के जंगल की तरफ चल दिए। वो रही गुफा

उन्होंने टॉर्च निकाली और फिर गुफा के अंदर रवाना हो गए।

जैसे ही मेघना ने गुफा के अंदर कदम रखा तो जमीन अजीब तरह से हिली। अरे ये क्या? और काफी देर बाद जमीन का हिलना बंद हुआ। लगता है सालों से यहां कोई नहीं आया।

ये कैसी आवाज है?

गुफा में अजीब सी आवाज गूंजी। जैसे कई सारे कीड़े एक साथ रेंग रहे हैं। तभी इनको सामने से काले मकड़ों की फौज आती हुई नजर आई। अरे बचो। ये सभी इधर-उधर भागे और छोटे-छोटे टीलों पर चढ़ गए। वो सभी मकड़े तेज शोर के साथ गुफा के बाहर निकल गए।

हमें बहुत संभल के चलना होगा। ये फिर से एक साथ सामने की तरफ रवाना हुए। गुफा के अंदर कई जानवरों की लाशें और कंगाल नजर आ रहे थे।

जो एक बहुत ही डरावना माहौल बनाने में कामयाब हो रहे थे।

कुछ देर बाद इन सभी को सामने घना अंधेरा नजर आया। वहां तो बहुत अंधेरा है। लगता है गुफा खत्म होने वाली है। यह सभी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ते रहे।

उसी समय गुफा में एक कोने में एक ताबूत रखा हुआ था। अचानक से उससे धमधम की आवाज आने लगी। [चीखने की आवाज़] ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसे अंदर से पीट रहा हो। इधर ये सभी अब काफी आगे आ चुके थे। यह गुफा तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही और अंधेरा बढ़ता जा रहा है। मुझे तो अब डर लगने लगा है। तकरीबन 10 मिनट तक और चलने के बाद इनको सामने एक ताबूत नजर आया। ग्रेट ये रहा ताबूत। इसे खोल कर देखें। नहीं।

इसे यहां खोलना ठीक नहीं होगा। इसे पहले गांव ले चलते हैं। उसके बाद ही खोलेंगे। इन्होंने ताबूत को बाहर निकाला। उसके बाद यह सभी ताबूत समेत गांव में लौट आए। उस समय चौक पर ठुराइन के साथ सभी गांव के लोग जमा थे।

अरे तांत्रिक महाराज यह ताबूत कैसा है?

बस यह समझ लीजिए कि आज हमारी परेशानी दूर हो सकती है। इस ताबूत को उतारो। गांव के लोगों ने ताबूत को उतारा और नीचे रखा। उसके बाद मेघना आगे बढ़ी और उसने ताबूत के ढक्कन पर हाथ रखा। सभी गांव के लोग यह देख हैरान थे कि शहर से आई यह लड़की ही इस ताबूत को क्यों खोल रही है। मेघना ने एक लंबी सांस भरी और फिर झट से उसे खोल दिया। ताबूत के खुलते ही सभी लोग हैरान रह गए। उसके अंदर अभी भी महाराज का कंकाल था। जिसके गले में कीमती मालाएं और शाही लॉकेट डला हुआ था। उसे देखते हुए मेघना की आंख में हल्के से आंसू झलक आए। पिताश्री अरे यह क्या कर रही है?

अंधेरा होने वाला है। आज आप सभी अपने घरों से बिल्कुल बाहर नहीं निकलेंगे। कोई खिड़की, कोई दरवाजा खुला ना रहे। सब कुछ बंद रखकर यही प्रार्थना करेंगे कि आज रात हम सभी को निशुर मूलों से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाए।

सभी ने तांत्रिक महाराज की बातों को स्वीकार किया और एक-एक करके सभी अपने घरों में चले गए। सभी खिड़की और दरवाजे बंद हो गए। चौक पर इस समय सिर्फ यह छह लोग खड़े थे। अनुज मेघना को बड़ी गौर से देख रहा था।

तांत्रिक महाराज लेकिन निशिर मूलक पिताजी के शव को लेकर कहां जाएंगे? यह तो हमें भी नहीं पता पुत्री। अगर तुमको यह करने में दुख हो रहा है

तो तुम यहां से जा सकती हो। हम लोग जिस तरह से 400 साल पहले जी रहे थे। फिर से वैसे ही जी लेंगे। नहीं, हमने उस जन्म में भी अपनी प्रजा की सोची थी। इस जन्म में भी हम आप सभी को निश्रमों से आजाद करवा कर ही दम लेंगे।

उस समय सभी को मेघना में राजकुमारी मेघालय की झलक नजर आ रही थी। धीरे-धीरे रात के 9:00 बज गए और गांव में निशु मोलू की आवाज गूंजने लगी।

उनकी आवाज सुनकर अपने घरों में बैठे सभी गांव के लोग डर गए। और सभी हाथ जोड़कर निशिर मोलों से बचने के लिए प्रार्थना करने लगे। वो अपने भारी कदमों के साथ आगे बढ़ रहे थे और तलाश में थे कि उन्हें कोई नजर आए और वो कब उसे उठाकर साथ ले जाएं।

मेघना कुएं के पास खड़ी थी।

अब मुखिया और बाकी सभी कोठी के अंदर बैठे मेघना को देख रहे थे। तांत्रिक महाराज निशिलो मेघना को साथ तो नहीं ले जाएंगे ना?

नहीं बेटा ऐसा मत बोलो। निशोलो अपनी मध्यम चाल चलते हुए कुएं की तरफ बढ़ रहे थे। जैसे ही उनको सामने मेघना नजर आई तो उनकी आंखें और तेज चमकने लगी।

उन्होंने रुक कर मेघना को देखा और फिर ताबूत खुलने लगा।

उसके अंदर से सुनहरी रोशनी निकलने लगी। और मेघना उसकी तरफ खींचने लगी। आ नहीं हमें मत ले जाइए। निशुलू की आंखें गुस्से से और लाल हो गई थी

और मेघना ताबूत की तरफ खींची जा रही थी

नहीं [चीखने की आवाज़] मेघना अनु जल्दी से बाहर की तरफ भागा। इस तरफ मेघना ताबूत तक पहुंचने ही वाली थी। तभी हम राजकुमारी मेघालय हैं।

राजकुमारी मेघालय। इतना कहते ही उन चारों ने एक दूसरे की तरफ देखा। और फिर ताबूत के अंदर से उस रोशनी का निकलना बंद हो गया और ताबूत वापस बंद हो गया। हम जानते हैं हमने आने में देरी कर दी लेकिन जैसा हमने वादा किया था।

हम अपने पिता श्री महाराज विश्वजीत की लाश लेकर आपके सामने प्रस्तुत हैं।

मेघना तुम ठीक हो? इस समय निशुर मूलों ने अनुज पर ध्यान नहीं दिया और वह सभी एक साथ बोले कहां है वो दुष्ट राजा विश्वजीत?

उसके इतना कहते ही मेघना और अनुज ने मिलकर सामने रखे ताबूत से कपड़ा हटा दिया और उसे खोल दिया। उसके अंदर पड़े कंकाल को देखकर निशुरमोलो जोर से हुंकार भरने लगे। वो ताबूत के पास आकर रुके। उसका ताबूत खुला और रोशनी निकली। महाराज का कंकाल उस ताबूत से निकलकर उनके ताबूत में आ गया और फिर वो चारों वही आवाज करते हुए वहां से कब्रिस्तान की तरफ चल दिए। लोग भी कोठी से बाहर आ गए। मेघना तो ठीक है।

हां बेटी हम तुम्हारा धन्यवाद किस मुंह से करें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। मुझे खुशी है कि जो परेशानी मेरे कदम रखने की वजह से गांव में आई थी,

मैंने उसको आप सभी की मदद से दूर कर दिया है। उसके बाद मेघना ने अनुज की तरफ देखा और मुस्कुरा दी। अनुज ने भी मेघना को स्माइल पास की। अगली सुबह मेघना और इशिता गांव की सरहद पर पहुंची थी और सभी उनको छोड़ने के लिए वहां जमा थे।

इशिता मेघना आओ बैठो। शहर जाने वाली बस 11:00 बजे आ जाएगी। ठीक है मुखिया जी। नमस्ते। नमस्ते अंकल। एंड आंटी हमसे कोई गलती हुई हो तो माफ कर देना। अरे नहीं बेटी तुम दोनों तो बहुत ही अच्छी हो। मैं ही बेवजह बात पर भड़क रही थी। [हंसी] मेघना और इशिता गाड़ियों में बैठी। अनुज निशमोलो जब हमें ले जा रहे थे तो तुम बिना कुछ सोचे क्यों बाहर भाग आए? वो तुमको साथ ले जाते तो? अरे तुमको मुसीबत में देखकर मैं अंदर कैसे बैठा रह सकता था?

हां, इसकी तो अंदर ही अंदर कुल्फी जम रही थी। तांत्रिक महाराज निरमोला मेघना को साथ तो नहीं ले जाएंगे ना? [हंसी] बस बस इतना भी मत हंसो।

अनुज ने मेघना और इशिता को बस में बैठाया। और जब तक बस आगे नहीं बढ़ी वो वहीं खड़ा उन्हें देखता रहा। मेघना भी खिड़की से तब तक उसे देखती रही जब तक वो बस स्टॉप से आगे नहीं निकल आए। काश यह गांव में जल्दी वापस आए

वैसे राजकुमारी मेघालय आपने मृत्युंजय अमृत का सैंपल इसीलिए लिया है ना कि गांव में वापस जल्दी आ सको। इस पर मेघना मुस्कुराई।

अवश्य आएंगे सखी। [चीखने की आवाज़] उस रात बीरमपुर गांव के लोग बहुत ही खुश थे और इस तरफ मेघना किसी सोच में डूबी थी। इशिता वो दमयंती किस गुफा में है इसका पता तो हमने लगाया ही नहीं ना। तभी जनकपुर का माहौल बदल गया था।

तेज तूफानी हवाएं चलने लगी और आसमान में काले बादल छा गए। हे भगवान आज तो लगता है तूफान आने वाला है।

आसमान में बिजली कड़क कर बार-बार गुफा पर गिर रही थी

उसकी गहराई में एक और ताबूत रखा था जो पिछली बार भी हमने देखा था। उसके अंदर से धमधम की आवाज हुई और फिर उसका ढक्कन खुल गया।

धीरे से उसके अंदर से दमयंती बाहर आई।

उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी। उसकी आंखें लालाल चमक रही थी और नाखून बहुत पहने हो गए थे। [हंसी] हम जाग उठे हैं। हम फिर से आजाद हो गए। आजाद हो गए हम। [हंसी] वो भयानक अंदाज में हंसती हुई गुफा से बाहर की ओर बढ़ गई। उसके चेहरे पर एक रहस्यमय मुस्कान थी। जो आने वाले खतरे की तरफ इशारा कर रही थी। वाओ


Taboot Horror Story Part 05 Link :- Click Here Now