TABOOT 5 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal
मेघना बेटा तुमको इस पुराण के बारे में कैसे पता चला?शायद अभी सच बोलना ठीक नहीं होगा। मुझे माफ कीजिएगा अंकल। मैं एक रात यहां अकेले आई थी। तभी मैंने उस चाबी को रखे देखा था।
लेकिन वो उस तहखाने की है ये मुझे नहीं पता था। कोई बात नहीं बेटा। तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद कि तुमने हमें बीरमपुर पुराण तक पहुंचाया। तांत्रिक महाराज अब जल्दी कीजिए। तांत्रिक महाराज ने किताब को खोला और पढ़ना शुरू किया। महाराज दमयंती के जवान और खूबसूरत हो जाने से बहुत खुश थे। और इस तरफ राज्य के लोग निशिरलों के खौफ से डर में थे।
ऐसे ही तीन माह गुजर गए।
और एक दिन प्रजा के दो आदमी महल में पहुंचे। महाराज आपके सिपाहियों ने हमारे गांव के चार निश मोलों को मार दिया और उस मुर्दे को लेकर आपके पास चले आए। आप ऐसा क्या कर रहे हैं महाराज? प्रजा होने के नाते हमारा यह जानने का हक है
कि आपने इस तरह का हुक्म क्यों दिया था और आप उन मुर्दों का क्या करते थे? इस पर महाराज कुछ बोलते। उससे पहले ही दमयंती बोली तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये सवाल महाराज से करने की? दमयंती आप हमें बात करने दीजिए। नहीं महाराज ये क्या? कौन हो तुम? दमयंती एक डायन। ये सुनकर सभी हैरान और खौफ में थे। महाराज का भी शरीर थर-थर कांप रहा था।
तो तो आपने हमसे विवाह क्यों किया? क्यों प्रेम का खेल रचाया हमारे साथ? मैं यह पति-पत्नी के किसी धर्म को नहीं मानती। मैंने जो कुछ भी किया सिर्फ इसलिए किया कि मुझे समय पर मुर्दों का खून मिलता रहे और उसी से मैं अपनी उम्र को 1000 साल बढ़ा लूं। क्या? ये क्या कह रही है पिताश्री? हां, यही सच्चाई है और इस काम में तुमने मेरी मदद की। इसलिए मैं तुमको छोड़ रही हूं। अब निकल जाओ दोनों पिता और पुत्री यहां से। इस राज्य पर अब सिर्फ मेरा राज होगा डायन दमयंती का। यह कहकर दमयंती ने अपने हाथ की एक उंगली महाराज की तरफ की। और तभी राजकुमारी और महाराज इस तरह से महल से बाहर पहुंच गए। जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें फेंका हो। अब दमयंती सिंहासन पर बैठ गई थी।
उसने एक मांत्रिक को भी अपनी शक्तियों को बढ़ाने के लिए महल में रख लिया था। जो दिन और रात बस एक कमरे में बंद काली दुनिया के मंत्रों का जाप करता रहता था। महाराज और राजकुमारी भी बहुत परेशान थे। वो एक पहाड़ी पर छिपे बैठे थे। अब हम क्या करें?
हमने अपने राज्य को भी मुसीबत में डाल दिया और खुद भी फंस गए। पिता श्री आपने बहुत बड़ी गलती की है और हमें किसी भी तरह से इससे निपटना पड़ेगा। महाराज ने कुछ सोचा फिर बोले हमें ब्राह्मण जी से मिलकर बात करनी चाहिए। अब वो ही हमारी सहायता कर सकते हैं।
महाराज और राजकुमारी दोनों ब्रा जी के पास पहुंचे और उन्हें अपनी दुविधा बताई। महाराज दमयंती को मारना नामुमकिन है। उसे सिर्फ कैद किया जा सकता है। तो कैसे कैद कर सकते हैं हम उस डायनी को? पूर्णमासी की रात मध्य रात्रि के पहर अगर उसके ऊपर तांबे के चाकू से हमला किया जाए तो उसकी शक्तियां खत्म हो जाएंगी। और अगर सुबह होने से पहले उसे अगर जमीन में गाड़ दिया जाए तो वो अगले कई सालों के लिए कैद होकर रह जाएगी। ठीक है
ब्राह्मण जी हम उसे खत्म करने का एक प्रयास अवश्य करेंगे।
नहीं महाराज यह कार्य केवल एक महान कोमल हृदय और वीर स्त्री कर सकती है। एक ऐसी स्त्री जिसकी वजह से 100 से ज्यादा लोगों की जान जाने से बची हो।
मतलब वो इतना पुण्य करने वाली हो कि उसकी वजह से 100 से ज्यादा लोग मौत के मुंह से लौट कर वापस आए हो और अब अच्छे से अपनी जिंदगी जी रही हो।
हे भगवान अब ऐसी स्त्री हम कहां ढूंढेंगे? इस पर ब्रा जी ने मेघालय की तरफ देखा और बोले वो स्त्री कोई और नहीं है। वो तो आप ही है पुत्री राजकुमारी मेघालय। यह सुनकर मेघालय ने महाराज की तरफ देखा और बोली हम लेकिन हम कैसे याद कीजिए महाराज जब आपके राज्य में महामारी फैली थी तो राजकुमारी मेघालय ही यहां उस बीज को सिद्ध कर लाई थी
जिससे मृत्युंजय अमृत का पेड़ उगा और उसकी वजह से सैकड़ों नहीं बल्कि राज्य के हजारों लोगों की जान जाने से बची। यह सुनकर महाराज ने राजकुमारी मेघालय की तरफ देखा। राजकुमारी अगर आप ना होती तो अभी तक हम सिर्फ उस स्त्री को ढूंढ रहे होते जिसने इतने पुण्य का कार्य किया हो। ब्राह्मीर जी अब बताइए कि अगली पूर्णमासी कब है और उस गायन को हमें कैसे काबू करना है? दमयंती हर पूर्णमासी की रात श्मशान भूमि पर बैठकर सुबह होने तक एक महामंत्र का जाप करती है।
आधी रात के समय जब वो जाप में लीन होगी तो उस पर हमला करने का वही उचित समय होगा। उस पर हमला करने से पहले तुमको एक मंत्र पढ़ना होगा और बिना देर किए उस पर वार कर देना। ठीक है ब्राह्मीर जी इस पूर्णमासी की रात दमयंती के जुल्म की आखिरी रात होगी।
दमयंती बहुत खुश थी और पूरे राज्य की प्रजा पर उसका प्रकोप बरस रहा था। कोई भी उसके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं कर सकता था। वो अपनी शक्तियां बढ़ाने के लिए हर माह कितने लोगों को अपना शिकार बनाती थी। कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए। आज पूर्णमासी की रात है।
आज आपको अपने कार्य को अंजाम देना है राजकुमारी। यह कहते हुए ब्राह्मीर जी ने राजकुमारी को एक चमड़ी की लपटी दी। और फिर ब्राह्मीर जी का आशीर्वाद लेकर महाराज और राजकुमारी श्मशान की तरफ रवाना हुए। अभी दमयंती नहीं आई है।
हमें सावधानी से छिप कर सब कार्य करना होगा। राजकुमारी तुम उसे खत्म तो कर पाओगी ना। पिताजी आप फिक्र मत कीजिए। हम कर लेंगे। अपनी प्रजा को बचाने के लिए हमारे प्राण भी चले गए तो हमें कोई संकोच नहीं होगा। आधी रात के पहर।
इनको घोड़ों की टोपों की आवाजें आने लगी। लगता है वो आ रही है। तभी एक रथ श्मशान भूमि पर आकर रुका और दमयंती उससे बाहर उतरी। जाइए और सुबह होने से पहले वापस आ जाइएगा। यह सुनकर रथ वाला वहां से चला गया।
पिताजी आप यहीं रुक कर इंतजार कीजिएगा। दमयंती एक घर में बैठकर आंखें बंद करके मंत्र जाप करने लगी। इस तरफ ब्राह्मवीर जी भी आंखें बंद किए मेघालय की सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे थे। आधी रात के समय धीमे कदमों से राजकुमारी दमयंती की तरफ रवाना हो गई।
दमयंती बहुत ही शांत भाव से जाप कर रही थी। राजकुमारी ने उसके पास जाकर मन में वो मंत्र पढ़ा। जो ब्राह्मणी जी ने उसे बताया था। लेकिन दमयंती की शक्तियों की वजह से उसने राजकुमारी के मन की आवाज सुन ली और उसने आंखें खोली। तू यहां क्या कर रही है?
ये देखकर राजकुमारी हैरान रह गई। लेकिन इससे पहले दमयंती कुछ करती। राजकुमारी ने दमयंती के ऊपर वार कर दिया।
आ दमयंती की चीख ऐसी थी कि वो पूरे राज्य में गूंज गई। लोगों के घरों में रखे बर्तन भी जमीन पर आ गिरे। राजकुमारी और महाराज उसे जमीन पर पड़े तड़पता देख रहे थे।
तभी दमयंती एकदम शांत हो गई। उधर महल में बंद दमयंती का पुजारी बुरी तरह चीखपकार करने लगा। हां महारानी दमयंग थी वो बहुत गुस्से में था
लेकिन वो महल के अंदर बंधित था इसीलिए वो बाहर नहीं आ सकता था अगली सुबह राज्य के किले में जश्न मनाया गया राजकुमारी की जय हो राजकुमारी की जय हो राजकुमारी हम सभी आपके बहुत-बहुत आभारी हैं हमारा जीवन धन्य है
कि हमें आपके जैसी वीर और बुद्ध बुद्धिमती राजकुमारी मिली जिसने अपनी जान पर खेलकर हम सभी को दमयंती के श्राप से मुक्ति दिलाई। आप सभी से हमारी सिर्फ एक प्रार्थना है। हमारे पिता से जो गलती हुई उसके लिए उन्हें माफ कर दें। प्रजा राजकुमारी से बहुत खुश थी। उन्होंने उसकी बात को फौरन स्वीकार कर लिया। ब्राह्मीर जी दमयंती को किस जगह कैद किया गया है?
राजकुमारी दमयंती को राज्य की एक गुफा के अंदर कैद किया गया है। वो वहां से वापस तो नहीं आने वाली ना? नहीं राजकुमारी लेकिन अगर आप उस गुफा के अंदर पहुंची तो वो जरूर जा सकती है। क्योंकि उस पर रोक आपकी वजह से लगी है।
अब आपको उससे दूर ही रहना होगा।
भला हम वहां क्यों जाएंगे? हम तो खुद उसको एक बुरे सपने की तरह भूल जाना चाहते हैं। हमारी प्रार्थना है कि अब राज्य में सब कुशल मंगल होगा। अब सभी राज्यवासी बहुत खुश थे। लेकिन वो भूल गए थे कि अभी निशुर मोलों से वो आजाद नहीं है।
जब शनिवार की रात आई और गांव में अजीब सा शोर गूंजा। गांव गांव बुश पुश गांव तो उसे सुनकर सभी की रंग कांप उठी अरे ये तो निशिलो की आवाज है।
निशिलो आए और अपने साथ दो आदमियों को उठाकर ले गए। अगली सुबह फिर से सभा बैठाई गई। ब्राह्मणीर जी हम निशिर मूलों से कैसे छुटकारा पा सकते हैं? इनके विषय में तो हमने सोचा ही नहीं। महाराज हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है।
लेकिन निशिरलो को रोकना दमयंती से भी ज्यादा मुश्किल कार्य है। हमें बताइए हम अवश्य करेंगे। निशिरलो महाराज को एक दुष्ट राजा मानते हैं।
यह सुनकर राजकुमारी के चेहरे पर परेशानी के भाव भर आए। हम उनसे बात करेंगे। निशिर मूलों के गुनहगार हम हैं तो उनसे प्रजा को मुक्त कराना भी हमारा कर्तव्य है। नहीं पिताश्री वो आपको देखते ही मार देंगे। यह कार्य हमें करने दीजिए आप। ठीक है पुत्री लेकिन आप करेंगे क्या?
यह सुनकर राजकुमारी के माथे पर सलवटें उभर आई। अगली शनिवार सभी लोग अपने-अपने घरों में बंद थे। और रात के समय वही आवाज गांव में गूंजने लगी।
निशोलों के खौफ से सभी के दिल दहल उठे थे।
वो कंधे पर ताबूत उठाए राज्य में घूम रहे थे। अपने नए शिकार की तलाश में उन्होंने देखा कि सामने राजकुमारी खड़ी है और वो तेजी से उसकी तरफ बढ़ने लगे। वो उसके करीब पहुंचने ही वाले थे। हम है राजकुमारी मेघालय और हम अपने पिता की क्रूरता से बहुत शर्मिंदा हैं। यह सुनते ही निशि मोलू रुक गए और उनकी निगाहें राजकुमारी पर जम गई।
हम नहीं चाहते कि हमारे पिता श्री की गलती की सजा पूरी प्रजा भुगते। हम आपसे वादा करते हैं कि महाराज का मृत शरीर हम खुद आपको लाकर देंगे। यह सुनकर निशिलर मोलों की आंखें तेज लाल होकर चमकने लगी। राजकुमारी ने हाथ जोड़े और रोते हुए बोली हमारे पिता राज्य छोड़कर भाग चुके हैं लेकिन हम आपके सामने अपने पिता की लाश लेकर जल्द ही प्रस्तुत होंगे।
तब तक आपसे विनती है
कि राज्य में कभी भी आकर किसी निर्दोष को उठाकर ना ले जाएं। अगर हम अपने पिता की लाश लिए बिना वापस आए तो आप लोग फिर वापस आकर इसी तरह से गश्त करना शुरू कर सकते हैं। तब हम भी आपको नहीं रोकेंगे। लेकिन हमें एक मौका अवश्य दें।
हमारे पिता को ढूंढकर आपके सामने लेकर आने का। यह सुनकर निशोलो उसी समय बिना किसी को लिए कब्रिस्तान की तरफ चले गए। और राजकुमारी के सामने प्रस्तुत थे। राजकुमारी आपने उनसे यह क्यों कहा कि हम राज्य छोड़कर जा चुके हैं?
क्योंकि अगर सच बोलते तो वो उसी समय यही चाहते कि हम आपको ले जाकर उन्हें सौंप दें। आपने एकदम सही फैसला किया है
राजकुमारी। हमारी वजह से हमारी प्रजा मुसीबत में है। आप हमें मारकर हमारी लाश निसिर मोलों के सामने प्रस्तुत करें। यह सुनकर प्रजा हैरान थी।
सभी राजकुमारी की तरफ देख रहे थे जिसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। हमने जो भी किया अपनी प्रजा के लिए किया लेकिन हम अपने पिता को अपने हाथों से मारे और उनकी लाश को निश मूलों को समर्पित करें। यह हम नहीं कर पाएंगे। अगर ऐसा नहीं किया तो वो फिर से आएंगे। नहीं पिताजी हम और आप आज ही राज्य छोड़ देंगे और अलग-अलग दिशाओं में निकल जाएंगे। इससे निशिल मोलोक कभी भी यहां वापस नहीं आएंगे क्योंकि हमने उनसे वादा किया है
कि जब हम यहां कदम रखें तभी आप राज्य में फिर से आना और अगर उस समय हम अपने पिता की लाश आपको समर्पित ना करें तो आप फिर से उसी तरह भ्रमण शुरू कर देना। राजकुमारी की बात सुनकर सभी की आंखों से आंसू बह निकले।
उसके बाद राजकुमारी और महाराज ने उसी दिन राज्य छोड़ दिया। और फिर निशुल्लोक कभी नजर नहीं आए। इतना पढ़ने के बाद यह तांत्रिक महाराज ने पुराण बंद कर दिया। इस पुराण के हिसाब से तो जब राजकुमारी राज्य में वापस आएंगी तभी निर मोलो वापस आएंगे। लेकिन अब 400 साल बाद वो क्यों लौटे हैं? क्या राजकुमारी गांव में वापस आ गई है?
अगर वो आई है तो है कहां? ये तुम कैसी बातें कर रहे हो? भला 400 साल बाद राजकुमारी वापस कैसे आ सकती है? यही तो समझ नहीं आ रहा है कि निशिलो आए हैं
तो कैसे? क्या वजह है उनके वापस आने की? इसमें आगे की कहानी नहीं लिखी। महाराज और राजकुमारी का बाद में क्या हुआ? नहीं पुत्री। पुराण समाप्त हो गया। मेघना की उत्सुकता देखकर इशिता को बहुत हैरानी हो रही थी। इतना सब कुछ जानने के बाद भी वही सवाल सबके सामने था कि निशु मोलो वापस क्यों आए? रात के समय इशिता और मेघना जब कमरे में थे तो मेघना अभी भी सोच में डूबी थी। मेघना तेरा क्या चल रहा है यार? तू क्यों इतना गहराई में जा रही है? तभी अनुज भी कमरे में आ गया। सच में अब तो मुझे भी सब कुछ बहुत अजीब लगने लगा है।
मेघना तुमको कैसे पता कि वो चाबी वहां रखी थी और वो तहखाना कहां पर है? मुझे यकीन है कि तुमने झूठ बोला है। तुम राजमहल में मेरे बिना तो दोबारा नहीं गई होगी। इशिता और अनुज दोनों मेघना की तरफ गौर से देख रहे थे। मुझे बचपन से ही सपने आते थे।
जिनमें मृत्युंजय अमृत का पेड़ मुझे दिखाई देता था। जब मैंने यहां गांव की जमीन पर कदम रखा तो मौसम बदल गया था और आंधी आ गई थी।
उसी रात मुझे महल के बारे में सपने आए और राजमहल से जब हम वापस आए तो उस रात मैंने खुद को सपने में राजकुमारी बने देखा। उसी सपने में मैंने खुद को तहखाने में जाते देखा और जब मैं महल पहुंची तो वो चाबी और तहखाना वहीं थे।
सबसे जरूरी बात यह है
कि जब मैं गांव में आई थी उसके अगले रात से ही निशिलो ने गांव में आना शुरू किया। इतना सुनकर इशिता और अनुज दोनों हैरान रह गए।
मेघना ने भी इन दोनों की तरफ देखा और सवाल किया। ये सब सुनकर अब तुम दोनों को क्या लगता है? इसका मतलब है कि पिछले जन्म में तुम ही राजकुमारी मेघना थी। और निशिर मोलो इसलिए गांव में वापस आए क्योंकि तुम यहां वापस आ चुके हो। हां ये सब मेरी वजह से हो रहा है। हे भगवान तो अब हम क्या करेंगे? क्या हमें यहां से चले जाना चाहिए?
नहीं मुझे नहीं लगता कि उससे कोई फायदा होगा। या तो वो मुझे लेकर जाएंगे या फिर महाराज की लाश। ये तीनों अब गहरी सोच में डूब गए।
और उस तरफ तांत्रिक महाराज और गांव के लोग भी परेशान थे। इस कहानी में आगे क्या होगा। मेघना किस तरह से निशिर मोलों से गांव को आजाद कराएगी। यह जानने के लिए इस कहानी का अगला और आखिरी भाग जरूर देखें।
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