TABOOT 4 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal
तांत्रिक महाराज की बात सुनने के बाद ये सभी अपनेपने घरों को वापस पहुंच गए थे।
और मेघना बेड पर लेटी सोच में डूबी थी। क्या हुआ यार? तू इतना क्यों सोच रही है? ये दमयंती आखिर थी कौन? हमें तो लगता है कि उसका महाराज से मिलना कोई संयोग नहीं था बल्कि इसके पीछे उसकी कोई साजिश थी। इस पर इशिता ने मेघना को हैरानी से देखा। अरे तेरी तबीयत तो ठीक है।
ये किस टोन में बोल रही है तू?
देख मेघना मैं तो पहले ही यहां से जाना चाहती थी। तेरे कहने पे ही मैं रुकी हुई हूं। मुझे इस गांव की कहानियों से कुछ लेना देना नहीं है। कल एकादशी है। हमें बस उस मृत्युंजय अमृत का सैंपल लेना है और परसों सुबह होने से पहले इस गांव को छोड़ देना है। दैट्स इट। यह कहकर इशिता ने चादर तानी और सो गई।
इसे कैसे बताऊं कि मैंने खुद को सपने में राजकुमारी ही बने देखा है। मुझे अपने सपनों का पूरा रहस्य जानना है। मैं यहां से नहीं जा सकती।
अगले दिन इशिता और मेघना आपस में बातें कर रही थी। आज रात को ठीक 9:00 बजे हम इस घर से निकल जाएंगे। ठीक है? यार, मुझे इस तरह बिना कुछ बताए जाना ठीक नहीं लग रहा। हमें सबको बता देना चाहिए कि हम यहां पर मृत्युंजय अमृत के लिए आए हैं।
तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
अरे अनुज तुम हां मैं क्या बातें चल रही हैं? तुम लोग आज रात मृत्युंजय अमृत को लाने की बात तो नहीं कर रहे ना? नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है।
गांव में इतनी प्रॉब्लम चल रही है। ऐसे में हम कैसे मृत्युंजय अमृत के बारे में सोच सकते हैं? हां वही कह रहा हूं। आज रात तांत्रिक महाराज अनुष्ठान शुरू करेंगे।
सभी को घरों में ही रहना है। तुम बेफिक्र रहो। हम कहीं नहीं जाने वाले। रात होने पर तांत्रिक महाराज ने अनुष्ठान की तैयारी शुरू की। उनके साथ किले में मुखिया और गांव के दो आदमी मौजूद थे। वहीं अनुज और उसकी मां हवेली पर अपने कमरे में बैठे थे। मां मेघना और इशिता को भी यहां बुला लूं। कहीं उन दोनों को डर लग रहा हो। इस पर ठुराइन ने अनुज को घोर कर देखा। मैं सब समझ रही हूं।
तुम उस शहरी लड़की पर लट्टू हो रहे हो। मां बस वो जहां है उसे वहीं रहने दो। अचानक कब यहां से जाएगी। मेरा बस चले तो मैं अभी उसे इस घर से निकाल दूं।
उस समय इशिता और मेघना घर के पिछले दरवाजे से निकल रही थी। मुझे अब भी कुछ ठीक नहीं लग रहा। ये लोग क्या सोचेंगे? हम दोनों बस यहां मृत्युंजय मृत चुराने के लिए आए थे। मेघना क्या हो गया यार तुझे? हमारी जॉब हमारा फ्यूचर खतरे में है।
हम इस राजा रानी वाली कहानी में उलझने नहीं आए थे। ये इन गांव वालों की प्रॉब्लम है हमारी नहीं। सो चल ना जल्दी। ये दोनों घर से निकल कर गली की तरफ आ गई थी। गांव में सभी लोग अपनेपने घरों में बैठे थे। सभी तांत्रिक महाराज के अनुष्ठान के सफल होने की प्रार्थना कर रहे थे। पूरा सामने जंगल का रास्ता। उस समय गांव का एक आदमी राजू सिगरेट पीता हुआ जंगल की तरफ से आ रहा था।
अरे यार आज तो होश बहुत ही ज्यादा है। सिगरेट भी नहीं सुलग रही। कुछ ही दूरी पर उसको इशिता और मेघना सामने से आती नजर आ रही थी। अरे वाह। यह तो वही शहरी हसीनाएं हैं जो मुखिया के घर ठहरी हैं। इनसे जान पहचान बनाने का यह अच्छा मौका है।
वो भी कुछ दूरी के फासले से इनके पीछे हो लिया। इशिता और मेघना ने अभी जंगल की सरहद पर कदम रखा ही था कि तभी बम बम बम बम इसे सुनकर ये दोनों चौंक पड़ी। अरे ये तो वही आवाें हैं। निशोला और राजू भी इस आवाज को सुनकर डर गया।
हे भगवान निशिलो राजू का दिल दहल उठा। उसने पाया कि वो आवाज ठीक उसके पीछे से आ रही है। उसने जैसे ही पलट कर देखा तो निशिलो ठीक उसके सामने थे। एक पल को राजू की सांसे मानो रुक सी गई। तभी ताबूत अपने आप खुल गया। उसने दो भयानक हाथ जिन्होंने राजू को साबुन के अंदर खींच लिया। राजू की चीख सुनकर इशिता और मेघनाथ दोनों ही बेहद डर गई।
मैंने पहले ही कहा था ना आज जंगल जाना ठीक नहीं होगा। यार बहस मत कर। जल्दी चल। हम वापस घर चलते हैं। इस तरफ तांत्रिक महाराज अनुष्ठान को शुरू कर चुके थे। वो आंखों को बंद किए लगातार मंत्रों का जाप कर रहे थे। मुखिया और वो दोनों आदमी उनसे कुछ ही दूरी पर थे। भागो कहीं निशुल्ला हमें देख ले। इशिता और मेघना दोनों अब डरी हुई हालत में आगे बढ़ रही थी।
लेकिन वो आवाज कम होने की बजाय और बढ़ती जा रही थी। मां मैं यहां क्या करूंगा? मैं भी किले पर जा रहा हूं। हो सकता है पिताजी को मेरी जरूरत हो।
अरे भूल गए क्या? किसी को भी बाहर नहीं निकलना है। अरे मुझे कुछ नहीं होगा। वैसे भी निशिर मोलू की आवाज अभी तक नहीं सुनाई दी। मुझे नहीं लगता कि वो आज आएंगे। यह कहकर अनुज अपनी मां की बात काटते हुए घर से निकल गया। इस तरफ तांत्रिक महाराज भी अपनी आंखें बंद किए ध्यान मग्न थे। तांत्रिक महाराज ने खुद को एक अंधेरी जगह पर पाया। क्या यहां कोई है?
सामने से कोई जवाब नहीं आया और तांत्रिक महाराज के पास एक तितली आकर रुकी। वो तितली अंधेरे में चमक रही थी। वो कुछ देर उनके पास रुकी रही और फिर एक तरफ चली गई। तांत्रिक महाराज भी अब उसके पीछे हो लिए। काफी देर तक चलने के बाद वह तितली जमीन पर बैठ गई। तांत्रिक महाराज ने पाया कि जमीन पर एक दरवाजा लगा हुआ है। वो तितली उस पर बैठते ही गायब हो गई।
मेघना और इशिता को भागते हुए काफी समय हो गया था। किला इनके सामने ही था। सामने से अनुज भी आ रहा था। उसने इन दोनों को सामने से आता हुआ देखा।
अरे मेघना और इशिता ये तीनों एक दूसरे को देखकर हैरान रह गए। तुम दोनों यहां क्या कर रही हो? तुमको तो अपने कमरे में होना चाहिए था। मेघना कुछ कहती। लेकिन इससे पहले ही गांव ये क्या निशिलो आ गए निशिलो की आवाज सुनते ही ये तीनों बुरी तरह डर गए और अब किले के अंदर भी उनकी आवाज पहुंच रही थी। डरो नहीं। तांत्रिक महाराज ने पहले ही कहा था कि निश मोलो यहां जरूर आएंगे लेकिन हमें डरने की जरूरत नहीं है। जब तक हम अपने घरों में हैं वो हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते।
चलो हम भी किले के अंदर चलते हैं।
और ये तीनों किले के अंदर पहुंचे। अरे तुम तीनों यहां क्या कर रहे हो? वो वो वो कुछ नहीं पिताजी। क्या मतलब कुछ नहीं। हमने कहा था ना कि आज की रात बाहर नहीं निकलना। तभी तांत्रिक महाराज ने एक लंबी सांस भरी और अपनी आंखें खोली।
ये सभी उन्हें गौर से देखने लगे। क्या हुआ तांत्रिक महाराज? कुछ पता चला? मैंने अपनी पूरी शक्ति लगा दी। लेकिन मुझे सिर्फ एक दरवाजे के अलावा कुछ नहीं नजर आया। इस पर सबसे पहले मेघना ने सवाल किया। कैसा दरवाजा? वो दरवाजा किसी चौखट पर नहीं बल्कि जमीन पर लगा हुआ है। शायद कोई तहखाना है। इसका मतलब है कि वो किताब किसी तहखाने के अंदर ही है।
ठीक है महाराज। हम लोग सुबह होने पर गांव के कुछ आदमियों को लेकर राजमहल जाएंगे और उस तहखाने को ढूंढेंगे। हां, यही विचार ठीक होगा।
अब आप लोग अपने घरों को जा सकते हो। ध्यान से जाना। निशिल मोलो अभी भी तुमको रास्ते में मिल सकते हैं। जो आज्ञा महाराज मुखिया अनुज और इन तीनों के साथ घर की तरफ रवाना हो गया और बाकी सभी गांव वाले भी अपने घरों को चले गए। अनुज तुमने बताया नहीं कि तुम तीनों यहां क्यों आए थे। वो पिताजी मुझे आपकी चिंता हो रही थी और इन दोनों को भी ना जाने क्यों घर पर डर लग रहा था।
आहा इसीलिए यह भी मेरे साथ चली आई। मुखिया को अनुज की बात में सच्चाई नहीं नजर आ रही थी। लेकिन उसने आगे कुछ नहीं कहा। कुछ देर बाद ये चारों घर पर पहुंचे। अब तुम लोग जाकर अपने-अपने कमरों में चुपचाप सो जाओ। कोई मस्तीमज़ाक नहीं। जी पिताजी। ये कहकर मुखिया अपने कमरे में चला गया। फिर मेघना ने अनुज की तरफ देखा। थैंक यू अनुज। तुमने हमारे लिए अपने पिताजी से फिर झूठ बोला। अरे कोई बात नहीं मेघना। तुम्हारे लिए तो मैं हजार झूठ भी बोल सकता हूं।
यह कहकर अनुज मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चला गया। फिर इशिता और मेघना भी अपने कमरे में पहुंची। उस रात मेघना के मन में कई सवाल चल रहे थे।
करीब 4:00 बजे जब वह सो रही थी तो उसने अपने आप को राजमहल में खड़ा हुआ पाया। अपने उसी राजकुमारी वाले अवतार में वो एक गलियारे से होती हुई आगे बढ़ रही थी। सामने ही एक बड़ा सा दरवाजा नजर आ रहा था। वो उस दरवाजे से होती हुई अंदर पहुंची।
सामने एक अलमारी थी।
उसने उस अलमारी को खोला तो उसके अंदर एक बक्सा रखा था। उस बक्से को खोलने पर उसे एक अंदर बड़ी सी चाबी रखी हुई नजर आई।
मेघना सपने में बिल्कुल सही सलामत थी। लेकिन बाहर उसका पूरा शरीर पसीने से जरा बोर हो गया था। तभी इशिता ने करवट ली। तो उसने एक पल को आंखें खोलकर मेघना को देखा। मेघना क्या हुआ तुझे? उठ। उसने मेघना को झंझोड़ा तो मेघना की नींद टूटी।
क्या हुआ तुझे मेघना? देख तुझे कितना पसीना आ रहा है। मेघना नींद से जागी। और लंबी-लंबी सांसे लेने लगी। अरे कुछ तो बोल।
कोई बुरा सपना दिखा क्या? मेघना ने इशिता के जवाब में हल्का सा हां में सर हिलाया। यशिता ने उसे पीने के लिए पानी दिया और फिर उससे लिपट कर लेट गई। सुबह होने पर तांत्रिक महाराज कुछ गांव के लोगों को लेकर राजमहल पहुंचे। कोई भी कमरा कोई भी गलियारा छूटना नहीं चाहिए। जी महाराज। गांव के सभी लोग अब अलग-अलग गलियारों में चले गए। एक आदमी जिसका नाम मनीष था।
वह एक कक्ष के सामने खड़ा था। उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो कई चमगादड़ तेज शोर करते हुए वहां से निकल गए। उसने खुद को संभाला और कमरे के अंदर दाखिल हुआ। हे भगवान कितना बड़ा कमरा है। तभी उसे भारी कदमों की आहट सुनाई देने लगी।
उसने सामने देखा कि वही लबादे वाला आदमी उसके सामने खड़ा है। उसको देखकर दरवाजे की तरफ भागा। लेकिन दरवाजा अपने आप ही बंद हो गया। तभी वो लबादे वाला आदमी तेजी से उसके करीब पहुंचा और उसने कसकर मनीष का पकड़ लिया।
मनीष की चीख महल की दीवारों में ही सिमट कर रह गई। गांव के लोगों ने राजमहल की अच्छे से तलाशी ली। लेकिन राजमहल इतना बड़ा था
कि अपना पूरा दिन लगाने के बाद भी वो आधे राजमहल की छानबीन भी नहीं कर पाए थे। तांत्रिक महाराज अब तो रात होने वाली है।
अभी तक उस तहखाने का कुछ पता नहीं चला। उसको ढूंढना इतना भी आसान नहीं है। जितना हमने सोचा है। मुखिया जी हम राज में यहां नहीं रुक सकते। अवश्य हम सभी यहां से निकलते हैं। सुबह होने पर फिर से आएंगे। ये सभी राजमहल से निकल ही रहे थे। तभी सामने से इनको मेघना आती हुई नजर आई। अरे बेटी मेघना तुम यहां जी अंकल। तुम यहां क्यों आई हो पुत्री? मुझे लगता है
कि मैं उस तहखाने तक आपको लेकर जा सकती हूं। ये कैसे हो सकता है? इस पर तांत्रिक महाराज ने मुखिया को हाथ के इशारे से चुप कर दिया।
तुमको ऐसा लगता है तो ठीक है। बताओ कहां है वो दखाना? अब मेघना आगे-आगे चल रही थी और सभी उसके पीछे थे। वो एक गलियारे से होती हुई आगे बढ़ रही थी। सामने ही एक बड़ा सा दरवाजा नजर आ रहा था। वो उस दरवाजे से होती हुई अंदर पहुंची और यह सब भी उसके पीछे अंदर पहुंचे। सामने एक अलमारी थी। उसने उस अलमारी को खोला तो उसके अंदर एक बक्सा रखा था।
उस बक्से को खोलने पर उसे अंदर एक बड़ी सी चाबी रखी हुई नजर आई। जिसे देखकर ये सभी हैरान रह गए। हे भगवान मेघना ने बिना कुछ बोले चाबी को उठाया और फिर से आगे बढ़ी। सामने एक और दरवाजा था। मेघना उससे होते हुए सभी को अपने साथ अंदर ले गई। उस अंधेरे कमरे में सभी को जमीन पर एक दरवाजा नजर आया। जिसे देखकर सभी की हैरानी का ठिकाना नहीं था।
यही है। यही है वो दरवाजा जो हमने हमारी दिव्य दृष्टि से देखा था। उस दरवाजे पर एक छेद था। मेघना ने उस छेद के अंदर चाबी लगाकर तीन बार घुमाया।
अब इसे उठाकर देखो।
तांत्रिक महाराज के कहने पर दो आदमियों ने दरवाजे को उठाकर देखा तो वह आसानी से उठ गया। दूसरी तरफ अनुज और इ��िता घर पर मौजूद थे।
अनुज मेघना कमरे में नहीं है। क्या मतलब? कहां गई अब वो? मुझसे तो टॉयलेट की बोल के गई थी। अब देखा तो वहां भी नहीं है। यह सुनकर अनुज हैरान रह गया। इस तरफ राजमहल में यह सभी तहखाने के अंदर पहुंचे। वहां एक शीशे के बक्से में एक किताब रखी हुई नजर आई। हां हां यही है।
यही है बीरमपुर पुराण। सभी किताब को देखकर खुश भी थे
और हैरान भी। पुत्री इसे उठाओ और फिर हम किले पर चलते हैं। मेघना ने जैसे ही किताब को बक्से से उठाया तो अजीब सा शोर उत्पन्न हुआ। ये कैसी आवाज है?
तभी तयखाने के हर एक कोने से बिच्छू निकल कर इनकी तरफ आने लगे। सभी निकलो यहां से। जल्दी। अब ये सभी तेजी से ऊपर की तरफ भागे। लेकिन, एक आदमी को बिच्छुओं ने सीढ़ियों पर ही अपनी चपेट में ले लिया। आ उस आदमी को एक ही पल में बिच्छुओं ने कंकाल में बदल दिया।
बाकी सभी लोग डरी हुई हालत में महल के मुख्य द्वार की तरफ भागे। मेघना सबसे आगे भाग रही थी। दरवाजे से होते हुए यह महल से बाहर निकलने में कामयाब हो गए।
लेकिन फिर भी दरवाजे पर जो आदमी सबसे पीछे था उसको भी बिच्छुओं ने अपनी चपेट में ले लिया। और उस आदमी की चीख पूरे राजमहल में गूंज गई। इन लोगों ने अब अपने कदमों को रोका नहीं और किले में पहुंचकर अपनी सांस तोड़ी। तांत्रिक महाराज ने मेघना को गौर से देखा।
पुत्री इस किताब के बारे में तुमको कैसे पता चली? उस समय अनुज और इशिता भी वहां आ पहुंचे। अब ये सभी मेघना की तरफ ही देख रहे थे। लेकिन मेघना की नजर उस किताब पर थी जिससे कई रहस्यों का खुलासा होने वाला था।
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