TABOOT 3 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

TABOOT 3 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

पिछले दूसरे भाग में आपने देखा कि मेघना अपने आप को एक राजकुमारी बने महल में देखती है

और फिर कोई पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखता है। तभी वो चीखती हुई नींद से जाग उठती है। अब आगे आ अरे क्या हुआ मेघना? मेघना की सांसे तेज तेज जल रही थी।

उसके माथे पर पसीना आ गया था। कुछ बोल तो क्या हुआ? बहुत ही अजीब सपना देखा यार। देख मुझे लगता है तू इस गांव की झूठ-मूठ की हिस्ट्री के बारे में ज्यादा ही सोच रही है। हम लोग बस मृत्युंजय अमृत का सैंपल लेते हैं और निकलते हैं यहां से। ठीक है। इस पर मेघना ने हल्के से हां में सर हिलाया।

लेकिन सच कहा जाए तो असल में वो अपने साथ हो रही और इस गांव में घट रही हर एक घटना का रहस्य जानना चाहती थी। सुबह-सुबह चीखना चिल्लाना बंद करो और दोनों हाथ मुंह धोकर नाश्ते के लिए आ जाओ। ये कहकर ठकुराइन वहां से चली गई। ये औरत बहुत ही खड़ूस है। एक बार हमारा काम हो जाए इस गांव को मुड़कर भी नहीं देखना मुझे। ये दोनों फ्रेश होकर नाश्ता करने पहुंचे। तो अनुज ने उठकर मेघना के लिए चेयर पुल अप की। आओ मेघना बैठो। यह देखकर ठुराइयन ने मुंह बना लिया और इन सभी ने मिलकर नाश्ता किया।

अनुज बेटा तुम जल्दी से हमारे साथ चलो।

हमें तांत्रिक महाराज को लेने के लिए जाना है। ठीक है पिताजी। यह कहकर मुखिया ने शिता और मेघना की तरफ देखा। बच्चियों तुम दोनों बाहर नहीं जाना। ठीक है।

हो सके तो ठकुराइन का काम में हाथ बटा देना। जी अंकल आप फिक्र मत कीजिए। हम घर में ही रहेंगे। अनुज और मुखिया गांव के लोगों से विदा लेकर तांत्रिक महाराज को लेने श्रेणी के लिए निकल गए। इस तरफ मेघना गहरी सोच में डूबी थी। यह कहानी सिर्फ मृत्युंजय अमृत से शुरू हुई थी। लेकिन उसके बाद वो महल अपने आप को राजकुमारी के रूप में देखना और ये निशर्मो ऐसा लगता है

इस गांव का हर एक रहस्य मुझसे जुड़ा है।

क्या मुझे राजमहल में जाना चाहिए? करीब 6 घंटे के सफर के बाद मुखिया और अनुज तांत्रिक महाराज के आश्रम पहुंचे। जहां उनका एक शिष्य बैठा हुआ था। प्रणाम। जी प्रणाम। तांत्रिक महाराज कहां है? अभी कुछ देर पहले आते तो उनसे भेंट हो जाती। महाराज अभी कुछ क्षण पहले ही बीरमपुर गांव के लिए निकल गए थे। यह सुनकर मुखिया और अनुज हैरान रह गए। हमारे गांव हम तो महाराज को लेने के लिए आए थे। हमारे आने से पहले ही वो कैसे निकल गए? उन्हें किसने सूचना दी कि हमें उनकी जरूरत है।

बाबा का अपने हर एक हिस्से से गहरा संबंध है।

उनको दूर बैठे ही उनके बारे में सब कुछ पता चल जाता है। धन्य हो तांत्रिक महाराज। इसका मतलब है कि उनको पहले ही आभास हो गया था कि छोटे तांत्रिक की मृत्यु हो गई है।

इसीलिए वह हमारे गांव के लिए निकल गए। पिताजी अब हमें भी चलना चाहिए। तांत्रिक महाराज तो हमसे पहले गांव पहुंच जाएंगे। हां बेटा चलो। धन्यवाद। अनुज और मुखिया उसी समय वापस गांव आने के लिए निकल गए। इसी तरह दोनों का सफर में ही दिन गुजर गया। इस तरफ शाम होने पर गांव में डर का माहौल छा गया। सभी लोग चौक पर जमा हुए गांव के मुख्य द्वार की तरफ ही देख रहे थे।

हे भगवान मुखिया जी कहां रह गए? रात हो गई है।

कहीं निशिलर मोलो ना आ जाए। इसी तरह से 7:00 बजे का घंटा बजा और मौसम फिर से बदल गया। सभी यह देखकर डर गए। मेघना, इशिता और ठकुराइन भी सभी के साथ वहां खड़ी थी। तभी उन्होंने मुख्य द्वार से किसी के कदमों की आहट सुनी और धीरे-धीरे अंक से साफ हुआ तो सामने से तांत्रिक महाराज आते हुए नजर आए। अरे ये तो तांत्रिक महाराज हैं। उन्हें देखकर सभी लोग खुश हो गए।

तांत्रिक महाराज की जय हो। तांत्रिक महाराज की जय हो। सभी ने तांत्रिक महाराज के आगे हाथ जोड़कर नमन किया। तांत्रिक महाराज ये और मेरा बेटा अनुज कहां है?

वही आपको लेने के लिए गए थे ना? ठाकुर हमारे शिष्य की मृत्यु की सूचना हमें रात ही मिल गई थी। इसीलिए हम स्वयं ही यहां आने के लिए निकल गए थे। उनसे हमारी भेंट नहीं हुई। हे भगवान तो ये कहां रह गए? अब हम आ गए हैं। आप लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।

मुखिया और अनुज भी वापस आ ही जाएंगे। महाराज अब जो भी करना है आप ही को करना है। जब तक ये और अनुज नहीं आ जाते। आप हमारे घर चलकर आराम कर लें। ठाकुरन हम तांत्रिक होकर बड़ी हवेली में नहीं रह सकते। आप लोग पुराने किले में हमारे ठहरने का प्रबंध कर दें।

जैसा आप कहे महाराज। यह कहकर ठाकुर ने गांव के लोगों से कहा, आप सभी मिलकर पुराने किले की अच्छी से सफाई कर दें और वहां रोशनी का भी अच्छा इंतजाम कर दें।

यह सुनकर गांव के कुछ आदमी किले की तरफ निकल गए। बाबा वहीं चौक पर बैठे रहे। उन्होंने आंखें बंद की और ध्यान मग्नव हो गए। शायद वह सोच रहे थे

कि आखिर कैसे निशिल मूलों से निपटा जाए और मेघना के दिल में भी कई सवाल उठ रहे थे। तकरीबन 1 घंटे तक किले की सफाई का कार्य चला और तभी अनुज और मुखिया भी वहां पहुंच गए। शुक्र है आप आ गए। जी। प्रणाम तांत्रिक महाराज। मुखिया की आवाज सुनकर तांत्रिक महाराज ने आंखें खोली।

तभी गांव के आदमी भी वहां पहुंच गए। किले की सफाई हो चुकी है

ठकराइन। अब तांत्रिक महाराज वहां ठहर सकते हैं। आप सभी हमारे साथ किले में चलिए। निशिलो इतने सालों बाद कैसे वापस जाग उठे? यह जानने से पहले हम सभी को निशिरलो की पूर्ण कहानी को दोहराने की जरूरत पड़ेगी। अब सभी लोग मिलकर किले में पहुंचे। तांत्रिक महाराज एक ऊंचे टीले पर बैठे थे।

किले में हर तरफ कई दीपक और दीवारों पर मशाले लगी थी जो वहां रोशनी उत्पन्न कर रही थी। मेघना अब तांत्रिक महाराज को बड़े गौर से देख रही थी

क्योंकि निशिर मोलों के बारे में जानने की उसकी उत्सुकता भी बढ़ रही थी। यह बात सन 1626 की है। उस समय हमारे नगर में महाराज विश्वजीत का शासन था। विश्वजीत की रानी का देहांत हो गया था और उनकी एक राजकुमारी थे। राजकुमारी मेघालय। महाराज नगर में फैली महामारी अब और बढ़ चुकी है।

अब इससे नहीं निपटा गया तो राज्य पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। इस महामारी से निपटने का बंदोबस्त हम अवश्य करेंगे। मंत्री जी उसी समय एक आदमी वहां पहुंचा। महाराज की जय हो। जी कौन है आप? महाराज हम आपके पड़ोसी राज्य बल्लभगढ़ के राजा इंद्रसेन के दूत हैं। उन्होंने आपको शीघ्र ही मिलने बुलाया है। उनका कहना है कि आपके राज्य पर जो संकट आया है उससे निपटने में वह आपकी सहायता करना चाहते हैं। पिता श्री हमें नहीं लगता कि वह हमारी इस महामारी से निपटने में कोई सहायता कर सकते हैं।

हमें स्वयं ही कुछ करना पड़ेगा। समस्या गंभीर है

राजकुमारी। हमें एक बार अवश्य ही उनसे मिलना चाहिए। हम आज रात ही उनके राज्य के लिए निकलते हैं। ठीक है पिता श्री इस महामारी का जो भी हल निकले आप शीघ्र ही वापस आने की कोशिश करें क्योंकि अगर आप इस बीमारी का इलाज नहीं ढूंढ पाए तो हमें ही कुछ करना होगा। अवश्य राजकुमारी महाराज अपने रथ में बैठ बल्लभगढ़ के लिए निकल गए। रथ में उनके साथ सेनापति थे

और दो घोर सवार सिपाही पीछे आ रहे थे। उनका रथ इस समय जंगल के रास्ते से गुजर रही थी। तभी अरे ये क्या हुआ? रथ अचानक से रुक कर टेढ़ा हो गया था। सेनापति जी बाहर निकलिए। महाराज और सेनापति बाहर निकले तो देखा रथ का पहिया गड्ढे में फंसा है और चटक भी गया है।

अरे यह क्या हुआ? अब जंगल में इस रथ का पहिया कौन ठीक करने आएगा? क्षमा करें महाराज। हम अभी इसे ठीक कर देंगे। आपको थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। तभी इन लोगों को पानी की आवाज सुनाई दी। यह कैसी आवाज है? ऐसा लगता है जैसे कोई कुएं से पानी खींच रहा हो।

और यह आवाज कुएं के ऊपर लगी चरखी से आ रही हो। आइए देखते हैं। राजा और सेनापति उस दिशा में गए तो वहां उनको कुएं पर एक औरत पानी भरती नजर आई। उसके बाल बहुत लंबे थे। वो दिखने में बहुत ही खूबसूरत थे और वेशभूषा से आदिवासी लग रही थी।

उसने जैसे ही महाराज और सेनापति से नजरें मिलाई तो उसका सौंदर्य देखकर यह दोनों ही सन रह गए। अरे आप तो हमारे महाराज लग रहे हैं। प्रणाम महाराज। प्रणाम। क्या नाम है आपका?

मेरा नाम दमयंती है महाराज। यहां पास ही मेरी कुटिया है।

आप इस समय जंगल में असल में हम पड़ोसी राज्य के लिए निकले थे। हमारा रथ खराब हो गया है। तो इसीलिए हम जंगल में भटक रहे हैं। महाराज तो आप हमारी कुटिया में चलिए।

यहां भटकना ठीक नहीं है। जब तक रथ ठीक नहीं हो जाता, आप वहां रुक सकते हैं। ये दोनों दमयंती के साथ उसकी कुटिया में चले गए। और फिर दमयंती ने दोनों को पीने के लिए पानी दिया। कितनी सुंदर है ये। अगर यह हमारी पत्नी बन जाए तो जीवन धन्य हो जाए। कितनी सुंदर स्त्री है।

अगर यह हमारी पहली महारानी बन जाती है तो कितना अच्छा होता। लेकिन हम एक महाराज होकर इससे इसके सामने अपना प्रस्ताव रखें और इसने ठुकरा दिया तो इससे हमारा बहुत अपमान होगा। दमयंती दोनों को देखकर मुस्कुराने लगी। क्या हुआ दमयंती जी? आप इस तरह से क्यों मुस्कुरा रही हैं? दमयंती ने दोनों की तरफ देखा और बोली अगर हम कहें कि हम आप दोनों के मन की बात सुन सकते हैं

तो आपको कैसा लगेगा? ये आप क्या कह रही हैं?

भला कोई किसी के मन की बात कैसे सुन सकता है? मैं सुन सकती हूं महाराज। अभी सेनापति जी ने हमें अपनी धर्मपत्नी और आपने हमें अपनी महारानी बनाने के बारे में सोचा है।

यह सुनकर सेनापति और महाराज दोनों ही हैरान रह गए। आप लोग घबराएं नहीं। मैं भी आप दोनों में से किसी एक की होना चाहती हूं। यह सुनकर महाराज और सेनापति दोनों के चेहरे पर मुस्कान छलक आई। तो ठीक है दमयंती अपना निर्णय सुनाएं। इससे पहले ही सेनापति बोला महाराज अगर आप दमयंती को चाहते हैं तो हम आपके विरुद्ध नहीं जा सकते। यह सुनकर महाराज को बहुत अच्छा लगा और दमयंती भी मुस्कुराई।

किंतु हम एक महारानी का जीवन नहीं जीना चाहते। हम आपकी धर्मपत्नी बनकर सिर्फ अपना पत्नी धर्म निभाना चाहते हैं। अगर आपको हमारा प्रस्ताव स्वीकार है

तो आपको अभी इसी क्षण हमसे विवाह करना होगा।

महाराज ने उसी समय अग्नि के साथ फेरे लेकर दमयंती से विवाह कर लिया। सुबह होने तक रथ भी ठीक हो गया था। महाराज ने दमयंती को भी अपने साथ लिया और फिर उस राज्य पहुंचे। राजा इंद्रसेन को हमारा नमन है। आइए महाराज बैठिए। महाराज और इंद्रसेन में बातें हो रही थी।

लेकिन इंद्रसेन भी दामंती पर मोहित हो गया था।

आज रात इस विश्वजीत को रास्ते से हटाकर हम दमयंती को अपना लेंगे। और फिर कल ही इसके राज्य पर हमला बोलकर उसे भी अपने अधीन कर लेंगे।

दमयंती उसको बड़ी गौर से देख रही थी

और उसके चेहरे पर गुस्सा दिखने लगा था। क्या हुआ दमयंती? महाराज राजा इंद्र सेन आपकी कोई मदद नहीं करना चाहते। रात होने पर आपको रास्ते से हटाने की योजना बना रहे हैं और हमें हमेशा के लिए अपना बना लेंगे और आपके राज्य को भी हड़प लेंगे। यह सुनकर इंद्रसेन भी हैरान रह गया।

महाराज को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने उसी समय अपनी तलवार निकाली। इंद्रसेन को परास्त करने के बाद महाराज तुरंत अपने राज्य की ओर लौट गए। राजकुमारी बहुत चिंता में थी। प्रणाम पिता श्री क्या बताया इंद्रसेन ने? क्या उस महामारी का कोई हाल निकला? इंद्रसेन ने हमें बहाने से वहां बुलाया था।

वो हमें मारना चाहते थे। वो तो धन्य हो दमयंती का जो उन्होंने हमें बचा लिया। राजकुमारी को महाराज की बात जरा भी समझ में नहीं आई। उसने दमयंती को घूर कर देखा।

पिता श्री अब हम ही इस महामारी का कोई इलाज ढूंढने जाते हैं।

आप राज्य कार्य संभालें। दमयंती राजकुमारी को बहुत ही रहस्यमय मुस्कान के साथ देख रही थी। राजकुमारी महल से निकली और इस तरह राजा दमयंती के साथ महल में समय बिताने लगे और धीरे-धीरे राज्य के कामों से दूर होते गए। करीब एक वर्ष और माह के बाद राजकुमारी वापस लौटी। पिता श्री हमने इस बीमारी से लड़ने का इलाज ढूंढ निकाला है। बहुत अच्छे राजकुमारी बताइए यह कैसे संभव है?

पिताश्री हमने एक महासिद्धि करके यह बीज हासिल किया है।

इसी के जरिए हमें उस महामारी के साथ हर बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा। क्या? इस बीज के जरिए। जी पिताश्री वो कैसे होगा यह आपको अगले सात दिनों के भीतर पता चल जाएगा।

राजकुमारी ने उस बीज को अपने हाथों से जंगल में जाकर बो दिया और रोजाना अपने हाथों से उसे पानी देने जाती। महाराज को राज्य की कोई चिंता नहीं थी। वो हर समय बस दमयंती के पास ही बैठे रहते थे। सात दिनों के बाद राजकुमारी महाराज, मंत्री और सेनापति को लेकर जंगल पहुंची। उन्होंने पाया कि पेड़ बहुत ही हराभरा हो गया है और उससे हरे रंग का पदार्थ टपक रहा है।

यह क्या चमत्कार है राजकुमारी? पिताश्री यह मृत्युंजय अमृत है। इसके तीन बूंद पीने से बड़े से बड़ा रोग दूर हो जाता है। हम इसके जरिए राज्य में फैली महामारी का खात्मा कर सकते हैं।

वाह राजकुमारी बहुत अच्छे। उसके बाद राजकुमारी ने अपने राज्य के सभी बीमार लोगों को वो मृत्युंजय मृत्यु देना शुरू किया। और अगले दो माह में वो महामारी राज्य से पूरी तरह से खत्म हो गई। राजकुमारी इससे खुश भी थी लेकिन महाराज के दमयंती के करीब जाने और हरदम चिपके रहने से चिंता में भी थी।

तभी एक दिन आ महाराज दमयंती क्या हुआ आपको? क्या हुआ दमयंती आपको? कुछ तो बताइए। देखते ही देखते उसके चेहरे की रंगत बदल गई और वो एक बूढ़ी नजर आने लगी। यह देखकर महाराज के पैरों तले जमीन निकल गई। दमयंती ये क्या हो गया आपको? महाराज असल में मैं कोई आम स्त्री नहीं हूं। मैं एक डायनी हूं। क्या? एक डायनी। हां महाराज एक डायन जवान मर्दों को मारकर अपनी उम्र बढ़ाती है।

लेकिन मैंने वो करना उचित नहीं समझा। इसलिए आज जब मेरी आयु 100 वर्ष हो गई है तो मैं बूढ़ी हो गई हूं। अब अगली एकादशी की रात मेरी मृत्यु हो जाएगी।

नहीं दमयंती हम आपको ऐसे मरने नहीं दे सकते।

हमें आपके डायनी होने से कोई ऐतराज नहीं। आपको बचाने का कोई तो तरीका होगा। एक तरीका है महाराज लेकिन बहुत ही मुश्किल कार्य है।

हमें बताइए हम आपको बचाने के लिए कुछ भी करेंगे। अगली एकादशी की रात तक 11 मुर्दों के खून से अगर हम स्नान कर लेते हैं तो हमारी जान बच जाएगी और हमारा सौंदर्य भी वापस लौट आएगा। महाराज ने अब दमयंती को बचाने का प्रयास शुरू किया। राज्य में जब भी किसी की मौत होती तो उनके घरों से उनकी लाश को उठवा लिया जाता था और इसी तरह 10 लाशों के खून से दमयंती को नहला दिया गया था।

इससे परेशान होकर मंत्री ने राजकुमारी को सब बताया।

राजकुमारी राज्य में हाहाकार मचा हुआ है। महाराज दमयंती को जवान बनाने के लिए मृत लोगों के शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे हैं।

उनके शव को बुरी तरह से काटा जाता है और उनके खून से दमयंती स्नान करती है। इससे प्रजा बहुत क्रोध में है। क्रोध की बात तो है ही मंत्री जी। मृत्यु के बाद जल्द ही अंतिम संस्कार ना किया जाए तो यह मृतक और उसके परिजनों के साथ नाइंसाफी होती है।

वो कभी भी मोक्ष के द्वार से होकर नहीं गुजर सकते। हम पिताश्री से इस विषय में बात करेंगे। राजकुमारी ने महाराज से बात की। लेकिन उनके सर पर दमयंती को बचाने का भूत सवार था। जो लोग पहले ही मर चुके हैं उनके शव को किसी के जीवन के लिए इस्तेमाल करना गलत नहीं है।

राजकुमारी गलत तब होता जब हम जिंदा लोगों की बलि देते। आप हमें रोकने की कोशिश ना करें। राजकुमारी महाराज के व्यवहार से बहुत चिंता में थे।

वहीं गांव के लोग भी अब इससे छुटकारा चाहते थे। अरे बहुत हो गया। अब हम गांव के लोग महाराज का यह अत्याचार नहीं सहेंगे। हां। हमारे मृतकों को हक है कि उनका अंतिम संस्कार किया जाए। लेकिन हम लोग महाराज से कैसे लड़ेंगे? कैसे रोकेंगे उनके सिपाहियों को? एक उपाय है।

जब भी गांव में किसी की मृत्यु होगी तो हम कोई भी शोक समारोह नहीं करेंगे। इससे महाराज के सिपाहियों को किसी भी मौत की खबर नहीं होगी।

आधी रात के समय हम में से चार लोग उस शव को ले जाकर चुपचाप श्मशान में उनका अंतिम संस्कार कर दिया करेंगे। सिर्फ चार लोग बाकी सभी अपनेपने घरों में शांतिपूर्ण होंगे। गांव के लोगों को यह सुझाव अच्छा लगा। उन्होंने गांव के चार आदमियों को नियुक्त किया। उस समय अर्थी को कंधा देने वाले लोगों को मोला कहा जाता था। ये चार लोग रात के समय निकला करते थे।

इसीलिए इनका नाम निशिलो रखा गया।

अब जब भी कोई मृत्यु होती तो चार कतई लिबास वाले आदमी निशिलो बनके उस शव को कंधा देते और उसका चुपचाप अंतिम संस्कार करके वापस गांव को लौट आते। समझ नहीं आ रहा पूरे 15 दिन हो गए। अभी तक किसी के घर कोई मृत्यु नहीं हुई है। ऐसा कैसे हो सकता है?

अगले दिन महाराज के गुप्तचरों के द्वारा महाराज को यह बात आखिर पता चल ही गई और उनका क्रोध सातवें आसमान पर आ गया। वो जो भी चार लोग हैं हम उनको मार कर ही दम लेंगे। उन्होंने हमसे चालाकी की। इसका हर्जाना उन्हें भुगतना ही पड़ेगा। महाराज ने अब अपने गुप्त सिपाहियों को तैनात कर दिया था जो छिपकर रातों को जागकर गांव पर नजर रख रहे थे। एक रात निशिलो एक अर्थी लेकर निकले।

यह शनिवार की रात थी।

तो उन गुप्त सिपाहियों ने निशिलो को रोक लिया। आज तुम लोगों को कोई नहीं बचा सकता। कोई नहीं। बहुत दे दिया हमारे महाराज को धोखा। उन सिपाहियों ने इन चारों आदमियों को मार गिराया और फिर शव लेकर महाराज के पास पहुंचे। उस शव को दमयंती के कक्ष में पहुंचा दिया गया और सुबह होने पर दमयंती कक्ष बाहर निकली। अपने उसी खूबसूरत जवान अवतार में उसे देखकर महाराज ने उसे भरी सभा में गले लगा लिया। दमयंती की आंखों में एक रहस्यमई चमक थी। जैसे कि वह कुछ छिपा रही है।

लेकिन अब निशिलर मोलों की आत्मा गांव में भटकने लगी थी। वो चारों आत्माएं अपने कंधे पर ताबूत उठाए हर शनिवार की रात गांव में भटकती थी।

उस समय उन आत्माओं को जो भी दिखाई देता वो समझती कि यह राजा के सिपाही है जो उनको रोकना चाहते हैं इसीलिए वो उसको अपने साथ ले जाती।

इतना कहकर तांत्रिक महाराज चुप हो गए। सभी गांव के लोग यह कहानी सुनकर हैरान थे। और मेघना को तो जैसे अब अपने सपनों से जुड़ी कुछ बातें समझ में आने लगी थी। हे भगवान मतलब जो निशिर मोलो आज हमारी जान के दुश्मन है। वो कभी हमारी रक्षा किया करते थे?

हां, उनकी इसमें कोई गलती नहीं है।

उनकी अकाल मृत्यु की वजह से वह ऐसा करते हैं। उनको नहीं पता कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। वो तो अभी भी अपने काम को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।

बाबा आगे की कथा में क्या हुआ? वो राजकुमारी महाराज और दमयंती आगे क्या हुआ? और निशिल मोलों को कैसे रोका गया? और अब वो अचानक क्यों 400 साल बाद वापस आ गया है? यह कहानी जानने के लिए हमें बीरमपुर पुराण को पढ़ने की आवश्यकता है।

जो कि 400 साल पहले की राजमहल के किसी गुप्त कक्ष में रखवाया गया था। बैरमपुर पुराण अब इसका पता हमें कैसे चलेगा बाबा? वो बरमपुर पुराण राजमहल में कहां है

यह जानने के लिए मुझे एक अनुष्ठान करना पड़ेगा। जो कि मैं इसी किले में बैठकर करूंगा। ध्यान रहे। उस समय सभी अपने-अपने घरों में होंगे। कहीं ऐसा ना हो कि इस बार भी निशिलो यह अनुष्ठान रोकने के इरादे से गांव में आए। निशिलू कौन है? यह तो हमने जान लिया है।

लेकिन इन सबका मेघना से क्या संबंध है? निशिमुलू उसके आने से कैसे जाग उठे? राजा के साथ क्या हुआ? और दमयंती असल में क्या है?

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए निशोलों के अगले पार्ट में।


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