TABOOT 2 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

TABOOT 2 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

पुजारी अभी भी मुखिया के घर पर ही मौजूद था।

जब निशिर मूलों की आवाज आना बंद हो गई तो सभी लोग एक-एक करके घर से बाहर निकले। मुखिया और ठुराइन भी पुजारी के साथ घर से बाहर निकल आए।

और मुखिया जी अब हमें तांत्रिक बाबा को खबर कर देनी चाहिए। हां पुजारी जी। लेकिन पहले पता तो चले कि निशिर मोलो ने किसी को अपना शिकार बनाया है या फिर वह ऐसे ही चले गए। इस तरह राजमहल में इशिता, मेघना और अनुज तीनों उस दरवाजे की तरफ हैरानी से देख रहे थे

जो अभी खुला था। उसके अंदर से काला लबादा पहने कोई बाहर निकला जिसके हाथ में एक अजीब सा दिखने वाला गुड्डा था। कौन? वो कुछ और बोला नहीं और लंबी-लंबी भयानक सांसे लेने लगा। उसकी भयानक सांसों को सुनकर ये तीनों डर गए। और तभी वो तेज़ रफ्तार से इनकी तरफ भागा। भागो जल्दी महल से बाहर निकलो। इन तीनों का दिल दहल उठा। और यह खिड़की की तरफ भागे। जल्दी करो। वो अभी भी इनके पीछे ही था। अनुज ने पहले इशिता और फिर मेघना को बाहर निकाला। वो अनुज तक पहुंचने ही वाला था कि तभी अनुज भी खिड़की से कूद गया। क्या था वो? चलो अब घर चलते हैं। 2:00 बज रहे हैं। कहीं पिताजी या मां जाग ना जाए। ये तीनों अब गांव की तरफ रवाना हो गए। मां और पिताजी को इस बारे में बिल्कुल नहीं बताना। ठीक है।

अरे हम क्यों बताएंगे भला? जैसे ही ये तीनों गांव पहुंचे तो बाहर ही पुजारी और बहुत से लोग खड़े थे। अनुज तुम यहां हमें तो लगा कि तुम तीनों अपने-अपने कमरे में सो रहे हो।

इतनी रात में तुम तीनों कहां से आ रहे हो?

वो वो पिताजी मुखिया ने मेघना और इशिता की तरफ देखा। तुम दोनों कहां गई थी अनुज के साथ? जी माफ कर दीजिए अंकल। हम दोनों का घूमने का मन हो रहा था। तो दिन में घूमने चले जाते। रात में बिना बताए जाने की क्या जरूरत थी? माफ कीजिए पिताजी। मैं ही इन दोनों को ले गया था। लेकिन आप सब लोग यहां बाहर इकट्ठा होकर क्या कर रहे हैं? अनुज ने बात को बदलते हुए कहा। आज गांव में निशिरमोलो आए थे।

सभी उनकी आवाज सुनकर ही खौफ में थे। क्या निशिरमोलो? ये निशिरमोलो कौन है? चार कथाई लबाजे वाले शख्स जो अपने कंधों पर एक ताबूत उठाए रात के समय गांव में घूमते हैं। उनकी आंखें लाल चमक रही होती हैं। रात के समय गांव में घूमते हैं। उस समय अगर वह किसी को देख लेते हैं या कोई उन्हें एक बार देख लेता है तो वह उसे अपने साथ ले जाते हैं। सभी गांव के लोग तो अपने-अपने घरों में थे लेकिन वह लोग संपत और कप्ता को ले गए। वो बाहर ही जुआ खेल रहे थे। अनुज, इशिता और मेघनाथ तीनों ही यह सुनकर चौंक पड़े। पिताजी लेकिन इससे पहले तो ऐसा गांव में कुछ भी नहीं हुआ। ना ही आपने मुझे कभी इसके बारे में बताया। यह 400 साल पहले की बात है बेटा। हमारे महाराज के समय की बात लेकिन उस समय किसी तरह उनको रोक दिया गया था।

लेकिन अब अचानक वह कैसे जाग उठे यह तो बात समझ के बाहर है। मुखिया जी अब कल सुबह ही तांत्रिक महाराज से मिलने के लिए निकलेंगे। फिलहाल सभी लोग अपने-अपने घरों को जाएं और निशिर मोलों से सावधान रहें। यह सुनकर सभी गांव के लोग अपने-अपने घरों को चले गए। लेकिन अब सभी के दिल में अजीब सा डर बैठ गया था। इशिता और मेघना भी अपने कमरे में पहुंची। यह तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई। हम लोग तो यहां पर मृत्युंजय अमृत के लिए आए थे। और यहां तो राजमहल, निशोलक पता नहीं क्या-क्या सुनने में आ रहा है।

ये लोग अब हमें मृत्युंजय अमृत तक लेकर भी जाएंगे या नहीं। अरे तुझे दिख नहीं रहा। यहां कितनी प्रॉब्लम है। हम दोनों सुबह यहां से जा रहे हैं बस। नहीं मैं नहीं जा सकती। लेकिन क्यों? वो मृत्युंजय अमृत। इतना कहकर मेघना ने आगे कुछ नहीं कहा। आपने बिना सोचे समझे उन दोनों लड़कियों को घर में जगह क्यों दे दी?

देखा ना अब क्या हुआ। ठुरायन वो लड़कियां तो अनजान है

लेकिन अनुज को तो सब कुछ पता है ना। वो उनको लेकर रात में निकल गया। इसमें हम उनको दोषी नहीं ठहरा सकते। उनको लेकर जाने वाला तो हमारा ही बेटा है ना। कुछ ही देर में सभी एक-एक करके सो गए। सुबह ठाकुरन ने दरवाजे पर दस्तक दी। दोनों उठ जाओ। सुबह हो गई है।

ठाकुरन ने बहुत ही रुडली बोला। आंटी जी वी आर सॉरी। यह सुनकर वो बिना जवाब दिए वहां से चली गई। कुछ देर बाद फ्रेश होकर इशिता और मेघना दोनों ब्रेकफास्ट टेबल पर पहुंची। गुड मॉर्निंग अंकल। गुड मॉर्निंग आंटी। आओ बैठो बच्चों। नाश्ता करो। मेघना के बाल इस समय खुले हुए थे। ना जाने अनुज को उसमें क्या खास दिखा। उसने उसे स्माइल की और एक टर्क उसे देखने लगी। इस पर मेघना ने उसे हैरानी से देखा। फिर उधर-उधर देख कर नाश्ता करने लगी। अनुज आज तुम खेतों पर जाओगे। समझ गए? मां मैं खेतों पर जाकर क्या करूंगा?

पिताजी क्या हो गया है मां को? मुझे कुछ नहीं हुआ है। तुम आज खेतों पर जा रहे हो बस जा रहे हो। तभी इशिता बोली अनुज तुम हमको भी खेत घुमा लाओगे? ये सुनकर ठकुराय इशिता और मेघना की तरफ गुस्से से देखने लगी। तभी अनुज भी खुश होते हुए बोला हां ठीक है। मेघना को भी हमारे खेत काफी पसंद आएंगे। हां बेटा क्यों नहीं लेकिन एक बात ध्यान रखना तीनों साथ रहना और शाम होने से पहले घर लौट आना तब तक तांत्रिक महाराज भी आ ही जाएंगे। नाश्ते के बाद इशिता और मेघना अनुज के साथ घर से निकली। तुम अंकल आंटी के सामने मुझे ऐसे क्यों घूर रहे थे? तुम सच में शहर से ही हो ना? क्यों कोई शक है? शहर की लड़की होती तो अब तक समझ जाती कि मैं उस पर लाइन मार रहा हूं। वो मतलब स्लिप हो रहा हूं। अनुज उसे ऐसे मजाक बिल्कुल पसंद नहीं। ओ अच्छा अच्छा ठीक है। सॉरी। लेकिन वो मजाक नहीं था। ये सुनकर मेघना भी हल्के से मुस्कुरा दी। ये लोग अब घने जंगल में पहुंच चुके थे।

वैसे अनुज यहां आने से पहले हमने कुछ सुना था? क्या सुना था? यही ना कि हमारे गांव के लोग एक नंबर के बेवकूफ हैं। अरे नहीं किसी मृत्युंजय अमृत के बारे में कहा जाता है कि उसको पीने से बड़े से बड़ा रोग दूर हो जाता है। यह सुनकर अनुज ने इशिता और मेघनाथ दोनों को घोर कर देखा। तो तुम लोग यहां मृत्युंजय अमृत की तलाश में आई हो। नहीं वैसे ही वो झूठ नहीं। तो सीधा बोलना था ना। बेकार में राजमहल जाकर मुझे भी मां से डांट पड़वा दी। वो हमें लगा था कि सीधे उसके बारे में पूछने से तुम कुछ गलत समझोगे। वैसे ये इशिता पूछती तो लगता लेकिन तुम पूछती तो नहीं लगता। ये कहकर अनुज मुस्कुराने लगा। और इस बार मेघना के चेहरे पर भी मुस्कान छलक आई। तो क्या तुम हमें उसके बारे में बता सकते हो? उसकी कहानी बहुत ही अजीब है।

मुझे पूरी नहीं पता। तो बताओ ना। मुझे सुनना है। जितनी पता है उतनी बता दो। यह बात मुझे दादाजी ने बताई थी। सन 1600 में एक बहुत बड़ी महामारी फैली थी। जवान बूढ़े सभी की तबीयत बिगड़ती और फिर कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो जाती। उस समय जो राजा था उसे इसकी बहुत चिंता सता रही थी

और राजा की चिंता देखकर उनकी बेटी राजकुमारी बहुत चिंता में थी। जब ठीक 4 साल उस महामारी को गुजर गए तो राजकुमारी रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। गायब वो कैसे? वो कहीं चली गई थी। राजा ने उन्हें बहुत ढूंढा लेकिन वो कहीं नहीं मिली। उसके बाद ठीक 1 साल एक महीने बाद राजकुमारी लौटी और अपने साथ वो एक बीज लेकर आई थी। महाराज ने उनसे सवाल किया कि कहां थी? तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। उसके बाद उस बीज को बोया गया और उससे यह बरगद का पेड़ उगा और इस बरगद के पेड़ से यह मृत्युंजय अमृत इसको पीने से राज्य में आई महामारी खत्म हो गई। लेकिन कुछ समय बाद ही राज्य पर बहुत बड़ा संकट आया। कैसा संकट? और ये निशर्मो लोग जिसके बारे में गांव के लोग बातें कर रहे हैं उनकी क्या कहानी है?

उसका तो मुझे भी नहीं पता। फिलहाल तुम वो देखो।

उसने सामने की तरफ उंगली पॉइंट की। कुछ ही दूर पर सामने था एक हराभरा बरगद का पेड़। उसे देखते ही मेघना हैरान रह गई। यह वही पेड़ था जो उसे सपने में दिखाई देता था।

और अब उसका वो सवाल और भी गहरा हो गया था। कि यह पेड़ उसको सपने में क्यों दिखाई देता है? ओह माय गॉड। यह पेड़ तो बहुत बड़ा है। यही मृत्युंजय अमृत का पेड़ है। हां, और क्या? लेकिन इससे तो अमृत टपक ही नहीं रहा। वो अमृत तो सिर्फ पूर्णमासी और एकादशी की रात ही कुछ देर के लिए टपकता है।

हर समय थोड़ी ना वो गिरता रहेगा। ओह, तो यह बात है। हां, अगर तुमको उसे देखना है, तो तुम लोग पूर्णमासी तक यहां रुक जाओ। यह कहकर अनुज मुस्कुराया। मुझे मेघना के साथ थोड़ा और समय बिताने का भी बहाना मिल जाएगा। हम रुक तो सकते हैं। फिलहाल आप अपनी मम्मी जी को समझाओ। तुमने देखा नहीं सुबह कितना गुस्सा थी वो हमसे। उनका बस चलता तो वो हमें तभी घर से निकाल देती।

अरे मां है ना तो फिक्र तो होगी ही। लेकिन बेफिक्र रहो।

मेरे आगे कोई नहीं बोलता। तुम लोग बेझिझक यहां रुक सकते हो। हां ठीक है। वैसे भी हम लोग मृत्युंजय अमृत देखने से पहले तो नहीं जा सकते। लेकिन वो आदमी जो हमें राजमहल में नजर आया था वो कौन था? इस पर अनुज ने मेघना से नजरें मिलाई। पागल पागल व्हाट डू यू मीन? देखो उस वक्त उसे देखकर तो मैं भी डर गया था। लेकिन अब सोचता हूं कि कोई पागल ही होगा जो बेचारा उस राजमहल में सो रहा होगा। हमने उसकी नींद खराब कर दी। तो उसी वजह से हमारे पीछे भागा होगा। मेघना को इस बात में सहमति नहीं नजर आई। वो कोई पागल तो हो नहीं सकता। उसका पहनावा भी आज के टाइम का नहीं लग रहा था। इशिता ने पेड़ की कुछ फोटो खींची और ये लोग खेतों पर पहुंचे। ये काफी देर तक साथ घूमे। और इनके बीच बातें भी खूब हुई। अनुज की बातें अब मेघना को भी अच्छी लगने लगी थी। लेकिन वह अपने सपने और इस गांव के रहस्यों के बारे में ज्यादा सोच रही थी।

शाम होने से पहले यह तीनों गांव वापस पहुंच गए। रात होने वाली है। पुजारी जी अभी तक तांत्रिक महाराज को लेकर नहीं आए। बहुत चिंताजनक बात है। मुखिया ठाकुरन और गांव के बहुत से लोग चौक पर इकट्ठे थे। तभी पुजारी अपने साथ एक तांत्रिक को लेकर वहां पहुंचा। प्रणाम बाबा। प्रणाम। तांत्रिक महाराज नहीं आए। तांत्रिक महाराज शाम से ध्यान मग्न बैठे हैं। वह सुबह सूरज निकलने से पहले नहीं उठ सकते।

इसलिए मैं उनकी जगह यहां आया हूं। आप निशीर मोलों के बारे में सब जानते हैं ना? चिंता ना करें। तांत्रिक महाराज का आशीर्वाद हमारे साथ है। हम आपकी समस्या का निवारण करने की पूरी कोशिश करेंगे। तो बताइए तांत्रिक जी क्या करना होगा? हम पूरी रात जागकर एक अनुष्ठान करेंगे। जो कि गांव के चौक पर होगा। यह पता लगाएंगे कि निशिर मोलो अचानक कैसे जाग उठे। आप सामग्री तैयार करें।

एक बार अगर हम अनुष्ठान शुरू कर देंगे तो उसके बाद पूर्ण होने से पहले उठने का हमारे पास कोई कारण नहीं होगा। बहुत-बहुत धन्यवाद बाबा। भगवान आपको सफल करें। इशिता ने चुपके से मेघना से कहा ये लोग सच में बेवकूफ है या मुझे ऐसा लग रहा है ये तू क्या कह रही है

और क्या वो आदमी गायब हुए हैं उसके पीछे कोई और वजह भी तो हो सकती है जरूरी है कि उन्हें किसी भूत ने ही उठाया हो निशोल हो चुप कर कुछ ही देर में अनुष्ठान की पूरी तैयारी हो गई एक अग्निकुंड एक कपाल और एक नरहद हड्डी उसके आसपास चार धूपबत्तियों से धुआं निकल कर वातावरण को शुद्ध कर रहा था। आप सभी अपने अपने घरों में जाएं और अनुष्ठान के सफल होने की प्रार्थना करें। हवा फिर से तेज हो गई थी। चौक पर सिर्फ तांत्रिक और पुजारी नजर आ रहे थे। मेघना और इशिता खिड़की से तांत्रिक को देख रहे थे।

मुखिया अनुज और ठुरायन सोफे पर बैठे थे। अरे मेघना क्या कर रही हो वहां? आकर बैठो ना। कुछ नहीं होने वाला इन लोगों से।

अनुज तुम खुद किसी को नहीं मानते तो मानने वाले का मजाक भी मत बनाओ। अभी ये लोग बातें कर ही रहे होते हैं कि तभी भारी कदमों के साथ चार निशिमोलों की आवाज जैसे ही गूंजना शुरू हुई।

गांव के सभी लोगों का दिल बुरी तरह से दहल गया। अरे ये आवाज ये सुनकर मुखिया भी बुरी तरह से डर गया। जल्दी से सभी खिड़की दरवाजे बंद कर दो। कोई बाहर नहीं झांकेगा। उसे इस तरह से डरा हुआ देखकर इशिता और मेघना भी हैरान रह गए। हे भगवान निशिलो फिर से आ गए। 400 साल पहले तो यह सिर्फ शनिवार की रात्रि में ही आया करते थे। उनकी आवाज सुनकर पुजारी और तांत्रिक भी डर गए थे। लेकिन तांत्रिक ने मंत्र पढ़ना जारी रखा।बाबा ये निश मूलों की आवाज कैसे आ रही है? तांत्रिक ने उसका कोई जवाब नहीं दिया।

पुजारी भी डर गया था। इसलिए वह भी चुपचाप मंदिर की तरफ रवाना हो गया। वो आवाजें अब तेज होती जा रही थी। मेघना ने जल्दी से खिड़की को बंद कर दिया। इधर पुजारी मंदिर की तरफ बढ़ ही रहा था कि तभी उसको सामने से निशील मोलो आते हुए नजर आए। पुजारी उन्हें देखकर बेहद डर गया और खौफ भरी आंखों से उन्हें देखता रहा। ताबूत खुलते ही और उसके बाद सब कुछ सन्नाटे में बदल गया। हे भगवान ये तो पुजारी जी की आवाज है। इसका मतलब है निशिर मोलू ने पुजारी जी को ही पिताजी उनकी आवाजें तो अभी भी आ रही हैं।

हे भगवान पता नहीं क्या होगा। तांत्रिक बाबा की रक्षा करना। तांत्रिक अभी भी बैठा हुआ अनुष्ठान कर रहा था। उसको सामने से निशिलो आते हुए नजर आए। उन्हें देखकर तांत्रिक की आंखों में भी ख्वाब उतर आया। निशिलो उसके सामने आकर रुक गए और एकदम शांत हो गए। तांत्रिक ने उन्हें देखने के बाद भी अनुष्ठान जारी रखा। आवाज आनी बंद हो गई। लगता है वो चले गए पिताजी। नहीं अभी कुछ देर अंदर ही रहो। जब तक तांत्रिक महाराज खुद नहीं कह देते कोई बाहर नहीं जाएगा। तभी तांत्रिक बाबा की एक दर्दनाक चीख फिजा में गूंजी। आ हे भगवान ये तो तांत्रिक बाबा की आवाज है। धीरे-धीरे आवाजें हल्की होती चली गई और फिर पूरी तरह से शांति छा गई।

चलो सब जल्दी से बाहर चलो। अब मुखिया और सभी गांव के लोग अपने घरों से निकलकर चौक पर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि तांत्रिक बाबा किसी मिट्टी के पुतले के जैसे जमे बैठे हैं। उनकी आंखें और मुंह पूरी तरह से फटा हुआ है। तांत्रिक बाबा अगले ही पल उनका शरीर धीरे-धीरे गायब हो गया। यह भयानक मंजर देखकर सभी के डर के मारे चीख निकल गई। आ निशिर मोलो पुजारी जी को ले गए और तांत्रिक बाबा का अंत कर दिया। इसका मतलब वो सिर्फ यह अनुष्ठान रोकने आए थे। पिताजी अब निशिलो से हमें कौन बचाएगा? अब तो तांत्रिक महाराज को ही आना होगा। वही कुछ कर सकते हैं। इशिता और मेघना तांत्रिक की मौत देखकर बहुत डर गई थी।

दूसरी तरफ गुफा में बैठे बड़े तांत्रिक ने अचानक से अपनी आंखें खोली। उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आ रही थी। निशिलो का यह रूप उसने हमारे शिष्य का भी अंत कर दिया। अब हमें खुद वहां जाना होगा। वरना प्रलय आ जाएगा। उस रात जब मेघना सो रही थी तो उसे एक सपना आया। वो एक राजकुमारी वाली वेशभूषा में एक सुनसान जंगली इलाके में घूम रही है। दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा है।

तभी कोई पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखता है। मेघना चौंकते हुए पीछे मुड़कर देखती है और उसके मुंह से चीख निकल जाती है। उसे देखकर वो चीखती हुई नींद से जाग उठती है।

अरे मेघना क्या हुआ? मृत्युंजय अमृत क्या है? यह तो हमने जान लिया। लेकिन निशिलो कौन है? और मेघना का इन सब से क्या संबंध है? वो कौन सा खौफनाक रहस्य है?

जिसकी वजह से गांव के लोग पहले भी खौफ में थे और आज भी है। इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमारे साथ बने रहिए निशीम मोलों के तीसरे भाग में,


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