Kala Tantra | Hindi Horror Story
धर्मपाल का परिवार गांव में सम्मानित माना जाता था और उनके दो बेटे थे अजय और विजय अजय बचपन से तेज था और वो पढ़ाई करके शहर चला गया और धीरे-धीरे उसने अपना व्यापार खड़ा कर लिया और कुछ ही सालों में उसके पास बड़ा घर, गाड़ी, नौकर और पैसा सब कुछ आ गया।
पर लेकिन अजय कभी अपने परिवार को नहीं भूला हर महीने गांव पैसे भेजता मां-बाप की दवाई, घर की मरम्मत, खेती का खर्च और यहां तक कि विजय के बच्चों की फीस भी वही भरता जब भी गांव आता पूरा घर खुश हो जाता।
और उसकी मंमी भी कहती कि देखो अजय फिर से बच्चों के लिए कितने खिलौने लाया है और मीरा भी बहुत अच्छे स्वभाव की थी वो कभी विजय और कविता को छोटा महसूस नहीं होने देती थी।
गुड़िया के लिए कपड़े, विजय के लिए घड़ी, कविता के लिए साड़ी, हर बार कुछ ना कुछ लेकर आती है।
कविता का गुस्सा
इतना बड़ा घर है कि सब आराम से रहेंगे।
और फिर धर्मपाल और सरोज खुशी से तैयार हो गए और विजय भी खुश था लेकिन कविता चुप थी उस रात उसने विजय को रोका शहर जाकर क्या करेंगे यहां खेती है, बच्चों का स्कूल है और शहर के खर्चे भी तो महंगे होते हैं।
फिर विजय बोला कि पर भैया कह रहे हैं सब संभाल लेंगे।
फिर कविता बोली कि आज संभाल लेंगे, कल एहसान भी जताएंगे।
फिर विजय चुप हो गया और फिर धीरे-धीरे उसे भी लगा कि कविता शायद सही कह रही है और कुछ दिनों बाद धर्मपाल और सरोज शहर चले गए अब रोज गांव में फोन आता और धर्मपाल खुशी-खुशी बताते है कि अरे विजय यहां तो हर कमरे में एसी है आज अजय हमें बड़ी होटल में खाना खिलाने ले गया मीरा तो रोज नई चीज बनाती है और कल हम मुंबई घूमने जा रहे हैं।
विजय यह बातें आकर कविता को बताया और हर बार उसके चेहरे पर जलन और बढ़ जाती है अब उसे मीरा की अच्छाई भी दिखावा लगने लगी थी वो रात में जाग कर सोचती अगर मेरे हिस्से में यह सुख नहीं तो उनके हिस्से में भी नहीं रहेगा।
और गांव में एक बूढ़ी औरत रहती थी और लोग कहते थे वो तंत्र मंत्र जानती है और फिर कविता कई रात चुपके से उसके पास जाने लगी।
और उसने विजय से कहा भैया भाभी को गांव बुलवा लो मां बाबा गए तब से वो यहां आए ही नहीं विजय खुश हो गया उसे लगा आखिरकार कविता का मन बदल गया।
लेकिन उसे क्या पता था? उसकी पत्नी के मन में क्या चल रहा है? अजय और मीरा गांव आए पूरा घर खुश था कविता भी नकली मुस्कान के साथ उनकी सेवा कर रही थी लेकिन रात होते ही वो बदल जाती।
अजय पर काला जादू
और एक रात जब सब सो गए वो धीरे से अजय के कमरे में गई उसने सोते हुए अजय के सिर से कुछ बाल काटे फिर उसके बटुए में एक छोटी पुड़िया रख दी।
और अगले दिन उसने अजय के खाने में राख मिलाई और मुस्कुराते हुए खाना परोसा भैया आपके लिए खास खीर बनाई है? अजय मुस्कुरा कर खाने लगा और कविता चुपचाप उसे देखती रही उसकी आंखों में अब इंसानी भाव नहीं बचे थे इस बात की घर में किसी को कोई खबर नहीं थी।
और कुछ दिन गांव में बिताने के बाद अजय वापस शहर लौट गया।
शुरुआत के दो-तीन दिन सब सामान्य रहा और फिर धीरे-धीरे सब बदलने लगा पहले छोटे-छोटे झगड़े शुरू हुए कभी मीरा से बहस तो कभी माता-पिता से अनबन अजय खुद समझ नहीं पा रहा था कि उसे इतनी जल्दी गुस्सा क्यों आने लगा है।
फिर एक रात मीरा ने उससे कहा, आप बहुत तनाव में रहने लगे हो थोड़ा आराम कर लो।
अचानक अजय भड़क गया तुम्हें लगता है मैं मेहनत नहीं कर रहा? सबको बस मेरी गलती दिखती है मीरा चुप रह गई धर्मपाल और सरोज ने पहली बार अजय को इस तरह टूटते देखा था।
लेकिन अब असली डर अभी शुरू हुआ था।
कुछ ही हफ्तों में अजय का व्यापार डगमगाने लगा जो कस्टमर सालों से उसके साथ थे अचानक काम रद्द करने लगे किसी का पेमेंट अटक गया किसी का माल वापस आ गया एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट जो लगभग पक्का हो चुका था आखिरी समय पर टूट गया बिजनेस पार्टनर भी अब उस पर शक करने लगे।
और बिजनेस पार्टनर कहने लगे कि अब अजय तुम्हारे फैसले अब पहले जैसे नहीं रहे तुम हर काम बिगड़ रहे हो।
लोन की किश्तें रुकने लगी नौकर भी चले गए बैंक से फोन आने लगे एक दिन मीरा ने डरते हुए पूछा अगर अगले महीने भी पेमेंट नहीं हुआ तो क्या हमें घर छोड़ना पड़ेगा? अजय ने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि उसे खुद भी यही डर सताने लगा था।
और फिर धर्मपाल और सरोज रोज गांव फोन करके विजय को सारी बातें बताने लगे पता नहीं क्या हो गया है अजय को काम कम होता जा रहा है घर में हर वक्त तनाव रहता है अगर ऐसे ही चलता रहा तो शायद घर भी बेचना पड़े।
और विजय यह सब सुनकर परेशान हो जाता।
लेकिन जब उसने यह बातें कविता को बताई तो उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति आ गई उसने मन ही मन सोचा तो आखिर असर शुरू हो गया और उस रात कविता ने विजय से कहा मुझे लगता है भैया पर कोई बुरी नजर है उन्हें गांव बुलाओ यहां तांत्रिक इलाज करवाना पड़ेगा।
और फिर विजय को उसकी बात सही लगी उसने अजय को फोन किया भैया कुछ दिन गांव आ जाओ यहां मन भी शांत हो जाएगा।
और गांव से शहर लौटते ही वो बुरी तरह बीमार पड़ गया उसे तेज बुखार रहने लगा।
और तो और डॉक्टरों को कुछ समझ नहीं आ रहा था रिपोर्ट देखे तो नॉर्मल थी लेकिन अजय की हालत बिगड़ती जा रही थी और वो रात में अचानक उठकर बैठ जाता और खाली दीवार को घूरने लगता एक रात मीरा ने उसे नींद में बोलते हुए सुना मुझे मत बुलाओ मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा? मुझे मत बुलाओ मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा।
अब सरोज को कुछ अजीब लगने लगा था।
उन्होंने गौर किया कि अजय की हालत हर बार गांव से लौटने के बाद ही बिगड़ती है पहले व्यापार अब तबीयत एक दिन उन्होंने विजय को फोन किया सच-सच बता गांव में तुम लोग क्या कर रहे हो? फिर विजय बोलता है कि क्या मतलब मां?
फिर सरोज पिछली बार गांव आया तो उसका काम बिगड़ा इस बार आया तो उसकी तबीयत खराब हो गई।
और फिर विजय खुद डर गया उसे समझ नहीं आ रहा था आखिर क्या हो रहा है? उसने सारी बातें आकर कविता को बताई तो कविता का चेहरा एक पल के लिए उतर गया पहली बार उसे डर महसूस हुआ क्योंकि अब शक शुरू हो चुका था।
कविता गुस्से में फोन करती है
सरोज की बातें सुनकर कविता अंदर से हिल गई थी उसे समझ आ गया था कि अब बात सिर्फ बीमारी और नुकसान तक नहीं रही अब शक उस तक पहुंचने लगा है उसने उसी वक्त सरोज को फोन लगाया फोन उठते ही उसकी आवाज गुस्से से कांप रही थी अगर आपको गांव नहीं आना तो मत आइए लेकिन मेरे और मेरे पति पर ऐसे इल्जाम मत लगाइए।
फिर सरोज बोलती है कि मैंने किसी का नाम नहीं लिया कविता।
फिर कविता बोली कि पर इशारा तो हमारी तरफ ही था ना हम क्या अपने ही परिवार को बर्बाद करेंगे?
और फिर सरोज कुछ पल चुप रही और फिर उस रात सरोज ने फैसला कर लिया वो अजय को फिर गांव लेकर जाएगी लेकिन इस बार सीधे मंदिर।
फिर सरोज अगले ही दिन वह अजय को लेकर गांव निकल गए।
फिर सरोज बोली कि महाराज अगर मेरे बेटे पर किसी ने कुछ किया है तो उसे देखिए और उसे बचा लीजिए।
स्वामी जी कुछ देर शांत बैठे रहे फिर धीरे से बोले कल सुबह इसे लेकर तुम्हारे गांव के मंदिर आना उस रात सरोज पड़ोस के गांव में अपनी एक पुरानी सहेली के घर रुक गई अजय को अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि उसे बस इतना लग रहा था कि उसकी मां बहुत डरी हुई है वो अपनी मां के खातिर सब मान रहा था लेकिन रात में उसे फिर वही सपने आने लगे एक काली परछाई जो उसके कान में फुसफुसा रही थी तू बच नहीं पाएगा और अजय अचानक पसीने से भीगा उठ बैठा।
और अगली सुबह दोनों मंदिर पहुंचे अजय मंदिर की सीढ़ियों तक गया लेकिन जैसे ही अंदर भगवान की मूर्ति देखी उसके कदम रुक गए उसका चेहरा अचानक बदलने लगा मां मुझे अंदर नहीं जाना चलो यहां से और फिर सरोज का दिल धड़क उठा यह वही अजय था जो रोज पूजा किए बिना घर से नहीं निकलता था।
आज वो भगवान से मुंह फेर रहा था सरोज ने तुरंत स्वामी जी को आवाज लगाई महाराज यह मंदिर के अंदर आने से मना कर रहा है स्वामी जी समझ गए उन्होंने पास रखी राख उठाई और अजय के माथे पर लगा दी अगले ही पल अजय का शरीर जोर से कांप उठा जैसे उसे बिजली का झटका लगा हो वो पीछे गिर पड़ा और जोर-जोर से सांस लेने लगा मंदिर के अंदर बैठे लोग डर गए स्वामी जी की आंखें गंभीर हो गई इस पर कुछ किया गया है सरोज की आंखों से आंसू निकल पड़े और जिसने किया है वो कोई अपना ही है उसे इसकी तरक्की, इसकी खुशी और इसके परिवार से जलन है।
और उसकी आंखें लाल हो चुकी थी और वह भारी आवाज में गुर्राने लगा था मंदिर में मंत्रों की आवाज लगातार गूंज रही थी और हवन की आग अब तेज हो चुकी थी और अजय जमीन पर बैठा बुरी तरह कांप रहा था कभी वह चीखता, कभी हंसने लगता और कभी अचानक रोने लगता और फिर मंदिर में बैठे लोग डर चुके थे।
और स्वामी महाराज लगातार मंत्र पढ़ रहे थे उनकी आवाज भारी होती जा रही थी फिर उन्होंने हवन से राख उठाई और सीधे अजय के सिर पर डाल दी अगले ही पल अजय जोर से चीखा ऐसा लगा जैसे उसके अंदर से कोई चीज बाहर निकल रही हो उसका शरीर एकदम अकड़ गया आंखें पलट गई और अगले ही पल वह जमीन पर गिर पड़ा पूरा मंदिर कुछ सेकंड के लिए शांत हो गया।
और फिर अजय धीरे-धीरे सामान्य सांस लेने लगा उसकी आंखों से पानी बहने लगा था और आंखें सामान्य होने लगी थी वो कमजोर आवाज में बोला मां और फिर सरोज रोते हुए उसके पास बैठ गई।
कविता की सच्चाई
और फिर स्वामी महाराज ने गहरी सांस ली और बोले कि बंधन टूट चुका है अब यह सुरक्षित है लेकिन उन्होंने जाते-जाते एक और बात कही जिसने यह किया है, उसका अंत अच्छा नहीं होगा अगले दिन सरोज अजय को लेकर गांव के घर पहुंचे घर में कदम रखते ही उसने सीधे कविता को आवाज दी कविता बाहर आई।
लेकिन सरोज की आंखें देखकर ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया।
और मुझे जलन होती थी सब अजय भैया की तारीफ करते थे मां बाबा पूरा गांव भी मैं नहीं सह पाई आप सब लोग जैसे विजय को भूल ही गए क्या सिर्फ अजय ही आपका बेटा है और विजय जैसे कोई नहीं फिर उसने सब बता दिया कैसे उसने तंत्र सीखा कैसे उसने बाल लिए? कैसे खाने में राख मिलाई और कैसे रात भर क्रियाएं की और कैसे वो अजय को बर्बाद होते देख खुश होती रही और घर में सन्नाटा फैल गया।
और विजय की आंखों में आंसू आ गए उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जिस औरत के साथ उसने पूरी जिंदगी बिताई वो इतनी गिर सकती है अचानक विजय पागलों की तरह रसोई की तरफ भागा और उसने दराज से चाकू निकाला और सीधे कविता की तरफ बढ़ा तूने मेरे भाई की जिंदगी बर्बाद कर दी मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा और कविता डर कर पीछे हटने लगी तभी अजय ने दौड़कर विजय को पकड़ लिया और बोला नहीं विजय बस कर और पाप मत कर और फिर विजय फूट-फूट कर रोने लगा।
और फिर उस दिन उसका परिवार पूरी तरह टूट चुका था उसके बाद विजय ने फैसला कर लिया वह कविता के साथ नहीं रहेगा वो गुड़िया को लेकर अजय और सरोज के साथ शहर चला गया।
और कविता उस पुराने गांव वाले घर में अकेली रह गई अब ना कोई उससे बात करता था, ना कोई उसके घर आता था और रात होते ही उसे वही आवाजें सुनाई देती जो वह क्रियाओं के वक्त सुना करती थी कभी उसे लगता कोई आंगन में चल रहा है कभी उसके कमरे में काले साए घड़े दिखाई देते और कई रात उसे ऐसा लगता जैसे कोई उसके कान में फुसफुसा आ रहा हो और अब तेरी बारी है। और कुछ ही दिनों में गांव वालों ने उसके घर से बदबू आने की शिकायत की जब दरवाजा तोड़ा गया तो कविता अंदर मृत्यु मिली उसके सामने वही काला कपड़ा पड़ा था और उसके ऊपर जला हुआ नींबू था।
इस कहानी की सीख
कहते हैं कि काला जादू किसी का भी सगा नहीं होता जहां जाता है वहा बर्बादी कर देता है और जिस घर में लालच और काला जादू साथ आ जाए वहां इंसान नहीं बचते सिर्फ बर्बादी बचती है।
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