आत्माओं का पेड़ Hindi Horror Story

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आत्माओं का पेड़ Hindi Horror Story मे पढ़ें कि एक खतरनाक तांत्रिक ने सिद्धि पाने के चक्कर में 100 आदमियों की बलि देकर वह अमर होना चाहता था पर वक्त ने ऐसा खेल खेल कि वह सो आत्माएं उसको ले डूबी और उसी पेड़ के अंदर तांत्रिक की आत्मा भी कैद होगी और इस तरह से वह पेड़ 101 आत्माओं का घर बन चुका था और जो भी उस पेड़ के पास जाता और उस पेड़ का कोई भी फूल अगर किसी आदमी के पास चला जाता तो उस आदमी की मौत होनी तय थी और फिर कुछ सालों बाद भैरवनाथ की मौत को कई साल बीत गए पर गांव का सन्नाटा नहीं बदला और वो विशाल गुलमोहर का पेड़ पूरी तरह सूख चुका था और दिन में किसी डरावने कंकाल जैसा दिखता था लेकिन रात होते ही उसमें अजीब बदलाव आता सूखी टहनियों पर चमकदार लाल फूल खिल जाते और पूरे रास्ते पर होश उड़ाने वाली नशीली खुशबू फैल जाती।
आत्माओं का पेड़ Hindi Horror Story

आत्माओं का पेड़ Hindi Horror Story

और यह कहानी आज से तकरीबन 20 साल पुरानी है

जब एक दिन रात के करीब 12:00 बजे चारों तरफ घना अंधेरा था गांव का रमेश शहर से लौट रहा था और साइकिल खराब होने की वजह से उसे उसी रास्ते से पैदल जाना पड़ा। जैसे ही वो सूखे पेड़ के पास पहुंचा हवा में वही मीठी खुशबू तैरने लगी और रमेश अचानक ठिटक गया।

और बोला ये ये कैसी खुशबू है? इतनी रात गए इस सूखे पेड़ से चमेली और गुलाब जैसी महक कहां से आ रही है? नहीं बुजुर्गों ने कहा था कि यहां कुछ अजीब है मुझे रुकना नहीं चाहिए।

और फिर रमेश हनुमान चालीसा पढ़ते हुए आगे बढ़ने लगा भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे।

बस भगवान आज आज घर पहुंचा दो फिर कभी इस रास्ते से रात को नहीं आऊंगा।

और अभी वो पेड़ से कुछ ही दूरी पर था कि सूखी टहनियों की बीच से एक बहुत ही मधुर और सुरीली स्त्री की आवाज गूंजी रमेश ओ रमेश रुक जाओ ना इतनी जल्दी में कहां भागे जा रहे हो? रमेश के रोंगटे खड़े हो गए कौन? कौन है वहां? सामने आओ।

फिर रमेश डरता हुआ कहता है कि मुझे डराने की कोशिश मत करो मैं डरने वाला नहीं हूं।

और फिर वह स्त्री बोलती है कि डर क्यों रहे हो रमेश? जरा पीछे मुड़कर तो देखो मैं कितनी अकेली हूं यहां। क्या तुम मुझसे बात नहीं करोगे?

फिर रमेश डर के मारे बड़बड़ता है कि नहीं ये कोई इंसान नहीं है और यह मेरा वहम है मुझे भागना होगा बस भागना होगा|

और वह बहुत तेज भागने लगा और वह बहुत डरा हुआ था और उसकी सास ऊपर नीचे हो रही थी और दिल की धड़कन भी तेज हो रही थी लेकिन तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि किसी ने पीछे से उसका कुर्ता पकड़ कर कस के खींच लिया है रमेश का दम हलक में अटक गया उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर आगे की तरफ झटका दिया।

और बोला कि छोड़ो मुझे कौन है? मेरा कुर्ता छोड़ो हनुमान जी रक्षा करो बचाओ कोई है

फिर वह स्त्री बोलती है कि कहां जाओगे रमेश कोई तुम्हें नहीं बचा सकता तुम हमारे हरे हो सिर्फ हमारे रमेश

फिर रमेश अपनी जान बचाकर भागने ही वाला था कि अचानक हवा का एक तेज और ठंडा बवंडर उठा पेड़ की सूखी बेजान टहनियों से एक बेहद खूबसूरत सुर्खलाल गुलमोहर का फूल हवा में तैरता हुआ आया और सीधा रमेश के सीने पर आकर गिर गया जैसे ही वह फूल रमेश के शरीर से छुआ उसका रोना और चिल्लाना पल भर में बंद हो गया। उसकी आंखों की पुतलियां फैल गई और उनमें से डर का नामोनिशान गायब हो गया।

फिर वो पूरी तरह सम्मोहित हो चुका था और बोल रहा था कि कितना सुंदर फूल है कितनी प्यारी खुशबू है औल मुझे कहां जाना था? नहीं मुझे यहीं रहना है।

और फिर उसके बाद उस डरावने पेड के तने से अब कई डरावनी आकृतियां धुएं की तरह बाहर झांकने लगी थी और वे सब एक साथ मुस्कुरा रही थी और हंसते हुए कह रही थी कि हां रमेश सही कहा आ जाओ हमारे पास आ जाओ और इस पेड़ की दुनिया में तुम्हारा बहुत बहुत स्वागत है।

हां मैं आ रहा हूं मुझे इस खुशबू के पास आना है मैं आ रहा हूं।

और फिर रमेश की आंखें खुली थी लेकिन उनमें कोई जीवन नहीं था और वो पेड़ के तने के बिल्कुल पास पहुंच गया और उसने अपना हाथ उसी सूखी छाल पर रख दिया फिर एक डरावनी सी आवाज आई एक और साथी मिल गया और फिर एक बेहद डरा देने वाली हंसी से पुरा जंगल गुंज उठा और फिर वो सभी आतमाये कहने लगी समा जाओ इस अभिशाप में।

जैसे ही रमेश ने पेड़ को छुआ तने के बीच से एक गहरा काला छेद हुआ रमेश बिना किसी दर्द या चीख के धीरे-धीरे उस पेड़ के तने के भीतर समाने लगा।

अगली सुबह

और फिर अगली सूबह बिरजू गांव के मुखिया के पास जाकर कहता है कि मुखिया जी रमेश भी अब उन्हीं में से एक बन गया है कल रात जब मैं खेत से लौट रहा था तब मैंने भी उस तरफ से वो अजीब सी नशीली खुशबू आते हुए सूंघी थी।

मैं तो भाग निकला पर रमेश फंस गया आखिर कब तक? कब तक हम इस खौफ की साए में जिएंगे मुखिया जी?

यह पेड़ एक एक करके पूरे गांव को निकल जाएगा हमें इस पेड़ को काट देना चाहिए फिर मुखिया बोले चुप रहो इस पेड़ को काटने की गलती मत करना जिसने भी इसे छूने की कोशिश की वो जिंदा नहीं बचेगा यह गुलमोहर का अभिशाप है।

मुखिया की बेटी की शादी

और फिर इस घटना के दो दिन बाद मुखिया की बेटी की शादी में शामिल होने उनका भांजा माधव आया शहर में वकालत पढ़ रहा माधव बेहद निडर था गांव आते ही उसे हर चेहरे पर छाई दहशत का एहसास हो गया और शाम को दालान में बैठकर माधव ने अपने मामा से सन्नाटे की वजह पूछ ही ली ओ मामा जी शादी का घर है लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे पूरा गांव किसी गहरे मातम या डर में जी रहा है बात क्या है?

और फिर मुखिया ने चारों तरफ देखा मानो कोई उनकी बात सुन रहा हो उन्होंने भारी आवाज में कहा बेटा माधव तुम शहर के पढ़े-लिखे लड़के हो शायद इन बातों पर यकीन ना करो लेकिन इस गांव पर गुलमोहर का अभिशाप है दो दिन पहले ही उसने दिनेश के भाई रमेश को निगल लिया उस पेड़ में भैरवनाथ तांत्रिक और 102 दुष्ट आत्माएं कैद है

और बताया जाता है कि उस गुलमोहर के विशाल और प्राचीन पेड़ के नीचे एक अघोरी तांत्रिक मुद्रा लगाए बैठा था।

वह गहरी तपस्या में विलीन था और लगातार एक भयानक मंत्र का जाप कर रहा था लेकिन यह मंत्र किसी ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए नहीं थे बल्कि भटकती हुई अतृप्त आत्माओं को अपनी ओर खींचने के काले मंत्र थे और तांत्रिक के होठों से फुसफुसाहट निकल रही थी।

ओम ह कम कालिकाय कल गच्छामि तांत्रिक लगातार मंत्र दोहरा रहा था।

उसकी आवाज में अजीब कंपन था अचानक उसने अपनी आंखें खोली और ठीक सामने जमीन पर एक नुकीली लोहे की कील गड़ी थी तभी अंधेरे को चीरती हुई धुएं जैसी एक खौफनाक आकृति आई और कील के अंदर समा गई कील थरथरा उठी।

यह देख तांत्रिक की आंखों में चमक आ गई और वो हिंसक तरीके से हंसते हुए चिल्लाया अब इस कील को मैं इस गुलमोहर के पेड़ के सीने में गाड़ दूंगा और यह शक्तिशाली आत्मा हमेशा के लिए मेरे गुलाम बन जाएगी अब तक मैं 100 आत्माओं को तड़पा कर अपने वश में कर चुका हूं

और जैसे ही 101वीं आत्मा को वश में करूंगा, मैं तांत्रिकों की दुनिया का महातांत्रिक बन जाऊंगा।

फिर पूरी कायनात की रूहें मेरे पैरों पर होंगी तांत्रिक जोर जोर से अट्टास करने लगा उसने एक भारी पत्थर उठाया और उस कील को गुलमोहर के तने पर ठोक दिया जैसे ही कील पेड़ की छाल को चीर कर अंदर घुसी उस बेजुबान पेड़ से किसी इंसान के कराने जैसी मध्यम आवाज आई।

और उसने अमावस्या की उस खौफनाक रात में फिर से अजीबोगरीब मंत्र पढ़ने शुरू कर दिए इस बार वह हर मंत्र को उल्टा पढ़ रहा था ताकि ब्रह्मांड की सबसे घिनौनी और असुरी शक्तियां उसकी तरफ खींची चली आए पलक झपकते ही हवा का रुख बदल गया आसमान का रंग स्याह काला हो गया। जैसे खून जम गया हो।

और हवा ठंडी और भारी हो गई।

और चारों तरफ किसी सड़ते हुए शव जैसी भयानक बदबू फैल गई सांस लेना भी दुभ हो रहा था तांत्रिक ने अपनी लाल आंखें घुमाई और मुस्कुराया काली शक्तियां आ रही है।

मुझे बस उनमें से सबसे क्रूर शक्ति को पकड़ कर इस कील के जरिए पेड़ से बांधना है और फिर मेरा काम पूरा वो पूरी ताकत से मंत्रों का उच्चारण करने लगा। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने तांत्रिक के भी होश उड़ा दिए अचानक उसके सामने धुएं की एक नहीं बल्कि पांच खौफनाक आकृतियां आकर खड़ी हो गई उनकी आंखों की जगह सुलगते हुए अंगारे थे।

तांत्रिक के माथे पर पसीना आ गया और उसने डर को छुपाते हुए चिल्लाकर कहा तुम तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते जानते नहीं हो मेरे पास कितनी तंत्र शक्ति है।

उनमें से एक डरावनी आवाज गूंजती हुई आई।

भैरवनाथ आज तक तूने हम जैसी ना जाने कितनी बेबस आत्माओं को तड़पाया है हम में से अपनी हवस और लालच के लिए निर्दोषों का कत्ल करवाया है आज तेरी विद्या जरूर सफल होगी आज उस गुलमोहर के पेड़ पर 101 आत्माओं की ही शक्ति का वास होगा लेकिन वो आखरी 101वीं आत्मा हमारी नहीं बल्कि तेरी खुद की होगी और पूरे जंगल में भयानक हंसी की आवाज गूंज गई।

और इतना कहते ही वो पांचों आत्माएं शैतानी हंसी हंसने लगी और उनकी हंसी से पूरा जंगल कांप उठा।

और अचानक हवा का एक ऐसा भयानक बवंडर उठा जिसने तांत्रिक को तिनके की तरह हवा में उड़ा दिया तांत्रिक दूर जाकर एक कटीली झाड़ी पर गिरा जैसे ही तांत्रिक की सांसे रुकी उसके मुंह से काले रंग का गाढ़ा धुआं निकला औल वो धुआं चीखता हुआ हवा में लहर आया और सीधा उस कील के अंदर समा गया। आ वकील खुद ब खुद हवा में उड़ी और गुलमोहर के तने में गहराई तक धस गई।

ओर उसी पल एक भयंकर कड़कड़ाहट के साथ वो गुलमोहर के पेड़ पूरी तरह से सूख कर वीरान और बंजर कंकाल जैसा हो गया जिसमें अब 101 प्रेत आत्माएं कैद थी।

और फिर माधव बोला कि मामा जी इस 21वीं सदी में आप भूत प्रेत और शापित पेड़ों की बातों में विश्वास करते हैं वैज्ञानिक रूप से यह मुमकिन ही नहीं है और रमेश कहीं रास्ता भटक गया होगा या किसी जंगली जानवर का शिकार हो गया होगा।

फिर मुखिया थोड़ा डरते हुए बोले कि बेटा अपनी इस समझदारी को अपने पास ही रखना और गलती से भी रात के वक्त गांव की पूर्वी छोर वाले रास्ते पर मत जाना और माधव ने हां तो कह दिया लेकिन उसके मन में उस पेड़ को देखने की उत्सुकता जाग गई थी।

और शादी की रात करीब 1:30 बजे जब रस्में चल रही थी।

और फिर अचानक मंडप के दिए फड़फड़ाने लगे और हवा बर्फ जैसी ठंडी हो गई और चारों तरफ लाश जैसी भयानक बदबू फैल गई और फिर तभी हवा के झोंके के साथ एक सुर्ख लाल गुलमोहर का फूल उड़कर आया और सीधे दुल्हन के कदमों में गिर गया फूल छूते ही दुल्हन की आंखें पथरा गई और वह सम्मोहित होकर चुपचाप मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी।

और यह देख माधव ने तुरंत आगे बढ़कर अपनी बहन को रोकने की कोशिश की और कहा कि नेहा कहां जा रही हो? रुको लेकिन नेहा ने कोई जवाब नहीं दिया उसकी चाल में एक अजीब सा खिंचाव था और मुखिया और अन्य ग्रामीण चिल्लाने लगे अरे अनर्थ हो गया काली शक्तियां उसे खींच रही है कोई उसे रोको माधव ने तुरंत आगे बढ़कर नेहा का हाथ पकड़ लिया जैसे ही उसने नेहा को छुआ उसे एक भयानक बिजली के झटके का एहसास हुआ और उसे हवा में कई आत्माओं के हंसने की आवाजें सुनाई दी आज रूह हमारी होगी।

और फिर माधव ने हिम्मत नहीं हारी।

उसने पूरी ताकत लगाकर नेहा को पीछे खींचा और घर के भीतर ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया नेहा कुछ देर बाद होश में आई लेकिन वह पूरी तरह कांप रही थी माधव समझ गया कि यह कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि कोई बहुत बड़ी नकारात्मक और पैरानॉर्मल ऊर्जा है जो पूरे गांव को तबाह करने पर तुली है।

फिर माधव काली शक्तियों का अंत करने चला

और फिर माधव ने तय कर लिया कि जब तक वो इस बला का अंत नहीं कर देता और फिर उसका परिवार और यह गांव कभी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे उसने मुखिया से उस पेड़ का पूरा इतिहास और भैरवनाथ तांत्रिक के बारे में पूछा मामा जी अगर तांत्रिक ने उन आत्माओं को एक लोहे की कील के जरिए उस पेड़ में बांधा था तो इसका मतलब है कि उस कील में ही उसकी पूरी शक्ति का केंद्र है।

और अगर हम उस कील को निकाल दें या उस पेड़ को ही नष्ट कर दें तो शायद यह अभिशाप खत्म हो जाए।

लेकिन बेटा उस पेड़ के पास जाना मौत को दावत देना है मौत के डर से हम अपनी जान की भीख कब तक मांगेंगे? आज मैं जाऊंगा माधव ने गांव के युवकों को इकट्ठा करना चाहा पर डर के मारे कोई तैयार नहीं हुआ।

आखिरकार रमेश का भाई दिनेश कुल्हाड़ी और गंगाजल लेकर माधव के साथ जाने को राजी हो गया माधव ने हथौड़ा लोहे की छड़ और केरोसिन लिया और ठीक रात 12:00 बजे दोनों उस कंकाल जैसे सूखे गुलमोहर के पेड़ के सामने जा खड़े हुए जैसे ही उन्होंने कदम आगे बढ़ाए हवा में वही सम्मोहक मीठी खुशबू फैलते ही दिनेश सम्मोहित होने लगा उसकी आंखें बंद होने लगी और हाथ से हथौड़ी छूटने लगी। दिनेश अपनी आंखें खुली रखो यह उनका भ्रम है।

अपने कान बंद कर लो और फिर माधव ने तुरंत अपनी जेब से कपूर निकाला और उसे पेड़ की जड़ के पास जला दिया। जैसे ही पवित्र अग्नि जली पेड़ से एक भयानक चीख गूंजी कौन है हमारी नींद खराब करने वाला माधव तुम भी यहीं समा जाओ।

और अचानक पेड़ के तने से धुएं की आकृतियां बाहर निकली और माधव की तरफ बढ़ी।

माधव ने पेड़ के तने को खंगालना शुरू किया उसे वह पुरानी जंग लगी लोहे की कील दिखाई दे गई जो तने के बिल्कुल बीचोंबीच धंसी हुई थी उस कील के चारों तरफ से काला गाढ़ा धुआं निकल रहा था दिनेश कुल्हाड़ी उठाओ और मुझे कवर करो मैं इस कील को निकाल रहा हूं।

माधव जैसे ही पेड़ के करीब पहुंचा तो एक अदृश्य ताकत ने उसे पीछे की तरफ हवा में उछाल दिया और माधव दूर जाकर गिरा।

लेकिन उसका हौसला कम नहीं हुआ और वह फिर खड़ा हुआ।

उसने लोहे की छड़ उठाई और दोबारा पेड़ की तरफ भागा इस बार आत्माओं ने भैरवनाथ की भयानक आवाज में बात की। मूर्ख मानव तू इन तुच्छ औजारों से मेरा अंत नहीं कर सकता मैं महातांत्रिक हूं।

फिर माधव गुस्से से बोला कि तू तांत्रिक नहीं एक राक्षस था और हर राक्षस का अंत निश्चित है।

और फिर माधव ने कील के पीछे फसाया और पूरे शरीर की ताकत लगाकर उसे बाहर खींचने लगा और आसमान में तड़पते हुए इंसानों की चीखें गूंज रही थी बचाओ हमें मुक्त करो बहुत दर्द हो रहा है और माधव ने पूरी ताकत से वो खौफनाक कील बाहर खींच ली और कील निकलते ही उस आग में तड़पती 101 आत्माओं को आखिरकार मुक्ति मिल गई।

कहानी का अंत

सुबह वहां सिर्फ राख का ढेर बचा था और फिर गांव वालों ने राहत की सांस ली और माधव सबका मसीहा बन गया और वह उसकी बहन की शादी निपटाकर माधव जैसे ही मुस्कुराते हुए गाड़ी से गांव की सीमा पार कर हाईवे पार कर अपने शहर चला गया

तो ये थी दोस्तों आज कि आत्माओं का पेड़ की एक डरावनी भूतिया कहानी जिसे पढ़ कर मे भी डर गया और क्या आप लोगों को भी डर लगा है और कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं और इसी तरह की बेहद डरावनी भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर कर दे धन्यवाद।

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