देर रात रोड पर मिला छलावा | Chhalava Hindi Horror Stories
मान लो दोस्त देर रात आप सूनसान रोड पर अपनी गाडी मे सफर कर रहे हो और अचानक आपके सामने दो रस्ते आये और वहां पर आपको कोई मिल जाता है और आपको वहां रस्ता बताता है और आप उस रस्ते पर गाडी को दोडा देते है और आपको पता भी ना लगे की ये रास्ता आपको आपकी मंजिल तक नही बल्कि मोत के करीब ले जा रहा है।
ठीक कुछ एसा मेरे साथ भी हुआ था जब मे और मेरे दो दोस्त हम रात मे कही बहार दूर घूमने जा रहें थे।
नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विशाल कूमार है और ये बात आज से चार शाल पहले की है जब मे और मेरे दो कमीने दोस्त रोहित शर्मा और दिनेश कुमार हम सभ को कंपनी की तरफ से छुटी मिली थी तीन दिन की और हम गाडी लेकर घूमने निकल गये और रात के टाइम घूमना हमें बहुत पसन्द था और हमने सोचा कि हम बहुत दूर तक घूम कर आते हैं।
तो मेने जोंस जोंस मे गाड़ी को भागा लिया और अलग-अलग रोडो पर घूमने लग गए और फिर हम एक हेसे रोड पर आ कर थम गये जहा पर दो रस्ते हमे दिखाई दिए।
दो रस्ते और अजीब भिखारी
और हमें पता नही चल रहा था कि कोनसा रस्ता सही है और कोनसे रस्ते से जाना चाहिए और तभी हमे साइड मे रस्ते पर हमे एक भिखारी जेसा दिगने वाले आदमी को देखा और हमने उसे बुलाया और वह हमारे पास आ गया और फिर हमने कहा कि यह रास्ते कहांकहां जाते हैं।
तो में सोचने लगा कि ये नखरा तो हेसे दिखा रहा है कि जेसे ये मूजे सो रुपये दे रहा हो।
फिर मेने कहा मेरे पास खूले रुपये नही है तो तूम एक कम करो की यह 100 रुपए रख लो तो भिखारी ने 100 का नोट लेकर पचास रुपये वापिस किये ये सब देख कर हमे अजीब लगा और हमने पुछा तो ऊस भिखारी ने कहा कि जितने में मांगता हूं ऊतने ही मूजे चाहिए ज्यादा लालची नही हूं मे।
ये सब देखकर हम चोक गये की इस कलयूग कि दुनिया मे कोई ऐसा भी इमानदार है और वो भी कोई भिखारी।
अजीब बात और वही भिखारी बार बार दिखा
खेल हमे क्या था उस से रस्ता पूछा तो उसने एक रस्ता बता दिया और उसने कहा कि ये वो रस्ता है जहा आपकी मंजील है और इस रस्ते पर चलने के बाद आपको और कोई रस्ते पर चलने की जरूरत नही पड़ेगी उसकी ये अजीब सी बात सूनकर मूजे थोडा अजीब लगा और फिर मेने घाडी दोडा दी।
और फिर हम कुछ किलो मिटर दूर चले हि थे कि हमेने देखा की वही भिखारी आदमी खडा है और वहा एक निचे किलो मिटर का एक बोर्ड भी लगा है जहा लिखा था मनाली 15 किलो मिटर यह देख कर तो हम चोक गये।
फिर हमने सोचा शायद ये कोई और भिखारी होंगा और फिर कुछ किलोमीटर दूर चलने के बाद हमे फिर से वही भिखारी दिखा और वही बोर्ड दिखा जिसपर लिखा था मनाली 15 किलोमीटर ये सब देखकर हमारी हिलत पतली होने लगी और हम सोचने लगे कि ऐसा केसे हो सकता है।
कि हम बार बार वही जगय और वही आदमी और वही बोर्ड देख रहे हो।
छलावा का शक
तो हम सब मे से दिनेश ने डरते हुए कहा कि हम सायद छलावा मे फस चुके हैं और दिनेश गाव का लडका था और उसने उसके बचपन में अपने दादा जी के मू से छलावा भूत प्रेत डायन और तो और चुड़ैलो की बहुत सी कहानियां सून रखी थी और मे इन सब को नहीं मानता था।
फिर मेने दिनेश से कहा कि तू चुप कर दिनेश वो पुराने जमाने कि बात है।
और फिर दिनेश ने कहा कि मेने पहले ही कहा था ना कि हमे छलावा ने छल लिया है और अब हमारा बचने का कोई चांस नहीं है फिर मेने उसे डरते हुए कापती आवाज में पुछा कि क्या कह रहे हो तूम।
मे इतनी जल्दी नही मरना चहता और रोहित भी डरते हुए बोला कि मे भी अभी नही मरना चहता मेरी तो अभी शादी भी नही हुई है फिर दिनेश ने कहा कि तूम लोग घबराओ नही मेरे दादा जी बताते थे कि छलावा वो आत्मा है जो किसी का भी रुप लेकर आपके सामने आ सकता है।
कभी तूमारे मां बाप का तो कभी तूमारे बहन भाई का और अक्सर देखा जाता है कि रात के समय सूनसान रोडो पर और घने जंगलों के बिच में छलावा पाया जाता है और अगर आपको वो मिल जाए तो वो आपको खूद नही मारता क्यूंकि छलावा और भूत प्रेतो से कमजोर होता है और बस वो आपको उस रस्ते पर भेज देता है जहा सिर्फ और सिर्फ आपका मोत इंतजार कर रही हो।
जेसे कि एक्सीडेंट मे मारे जाना या कोई और हादसा होना और बताया जाता है कि अगर रात के टाइम अनजान रस्तों पर सफ़र करते हैं तो छलावा लग जाता है।
बचने का उपाय
और फिर हमने सोचा कि हमने तो कही एसा कुछ ना किसी से लिया और ना किसी से कुछ दिया फिर अचानक रोहित को याद आता है कि हमने भिखारी से पच्चास का नोट लिया था।
तो ये सोच कर हम और भी डर गये क्यूंकि हम जिसे भिखारी समज रहें थे वो एक छलावा था और उसने ये भी कहा था कि इस रस्ते पर जाने के बाद कोई और रस्ते पर जाने कि जरुरत नही पड़ेगी और फिर हम सभ काफी अंदर तक डरा चुके थे और फिर दिनेश ने कहा कि हमे इस छलावा से बचने का एक हि ऊपाये है।
जो पचास का नोट हमने लिया था वो हम जला दे फिर मेने जल्दी से टाईटर निकाला और उस पचास के नोट को जला दिया।
और गाडी से बहार फेक दिया और देखा कि पीछे से हमें छलावा की चिलाने की आवाज आने लगी तो हमने पीछे मुड़कर देखा तो वहां पर देखा कि वह बुढ़ा भिखारी आदमी जल रहा है और वह चिल्ला रहा है और हम सभ अपने अपने घर पर सही सलामत पहुंच गये और आज अगर हम सभ जिंदा है तो दिनेश के दादा जी कि कहानी की वजय से क्यूंकि अगर दिनेश ने वो कहानी नही सूनी होती तो हम जिंदा घर नही लोटते।
कहानी से सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि रात के समय सुनसान और अनजान रास्तों पर सफर करते समय हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए और अजनबियों से बिना सोचे-समझे कोई भी चीज लेना देना या रास्ता पूछना खतरनाक साबित हो सकता है बड़ों और दादा-दादी की सुनाई गई कहानियों में छिपी सीख को कभी नकारना नहीं चाहिए क्योंकि उनमें जीवन के अनुभव छिपे होते हैं और खतरे का आभास होते ही तुरंत सही कदम उठाना चाहिए सकारात्मक सोच और सतर्कता से ही हम मुश्किलों से बच सकते हैं हमेशा सतर्क रहें और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता मे ध्यान जरुर दें।
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