भूत बंगला Horror Story In Hindi

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आज की इस भूत बंगले कि कहानी मैं पढ़िए की कैसे हम भूत बंगले में जाते हैं और वहां पर हमें एक तड़पती हुई आत्मा मिलती है जिसे देखकर हम डर जाते हैं और वह इंसाफ की गवार लगती है और हम उसको कैसे इंसाफ दिलाते हैं
भूत बंगला Horror Story In Hindi

भूत बंगला Horror Story In Hindi

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम रुद्र रावत है और मे झारखंड का रहने वाला हूं

और आज जो किस्सा सुनाने जा रहा हूँ वह किसी फिल्म का सीन नहीं है यह उस बंगले की दास्तान है जिसे लोग आज भी नाम लेकर नहीं पुकारते।

शहर से दूर घने जंगलों के बीच खड़ा वह पुराना बंगला दीवारें सीलन से गली हुई खिड़कियाँ बंद और हवा में एक गंध जैसे वहाँ समय रुक गया हो।

और लोग कहते है कि जो आदमी अंदर गया वो कभी वापस नहीं आया।

हम चारों गए और वापस भी आए लेकिन जो देखा वह आज भी नींद के पीछे खड़ा रहता है।

हम चार दोस्त ओर एक चुनौती

अजय रोहन प्रिया और निखिल हम कॉलेज के दिनों से साथ थे रोमांच का शौक ऐसा कि वीडियो देखकर हिम्मत दिखाना आसान लगता था एक रात निखिल ने फोन किया कल भूत बंगला चलोगे? अगर सच्ची आत्मा है तो दिख जाएगी।

और फिर प्रिया पहले मना करती रही रोहन हँसा डरी तो घर बैठ अजय चुप रहा लेकिन आँखों में वही जिद थी आधी रात को हम चारों निकले मोबाइल की टॉर्च एक बोतल पानी और बेकार की हिम्मत।

जंगल का रास्ता कच्चा था पेड़ ऐसे खड़े थे जैसे रास्ता नाप रहे हों जितना अंदर गए आवाज़ें उतनी कम होती गईं झींगुर भी एक जगह चुप हो गए प्रिया ने कहा वापस चलें अजय ने जवाब दिया अब गेट दिख गया है दो मिनट देखकर लौटेंगे वह दो मिनट हमारे जीवन के सबसे लंबे मिनट बने।

रहस्यमयी दस्तक और खुद खुलता गेट

गेट ज़ंग से खाया हुआ था ताला टूटा पड़ा था लेकिन किवाड़ बंद थे।

और फिर अजय ने हाथ लगाया ठंडक ऐसी कि हथेली चिपक गई फिर किसी ने बाहर से नहीं धक्का दिया किवाड़ अंदर की तरफ धीरे-धीरे खुल गए क्रेक की आवाज़ इतनी साफ थी जैसे बंगला बोल रहा हो आओ आओ मेरे पास आऔ।

हवा रुक गई गर्दन के पीछे रोंगटे खड़े हो गए निखिल फुसफुसाया शायद जंग की वजह से ढीला होगा कोई यकीन नहीं कर रहा था फिर भी हम अंदर चल दिए आँगन में घास घुटनों तक थी कुएँ के ऊपर लकड़ी सड़ी पड़ी थी बरामदे में एक पुरानी कुर्सी हिल रही थी बिना हवा के।

सन्नाटे में चीखों की गूंज

मुख्य दरवाजा पहले से अधखुला था अंदर धूल जाले टूटे फ्रेम दीवार पर एक परिवार की तस्वीर बाप‌ माँ एक लड़की लड़की की आँखों पर काला निशान पड़ चुका था जैसे किसी ने जानबूझकर पोत दिया हो अजय बोला शायद हवा से दरवाजा बंद हुआ होगा तभी पीछे एक कमरे का दरवाजा जोर से पिट गया आवाज़ गूँजी चारों चौंके।

ऊपर से रोना आने लगा पहले धीमा फिर ऐसा दर्दनाक कि सीने में दर्द हुआ कोई शब्द नहीं थे सिर्फ सिसकियाँ निखिल के कदम डगमगाए फिर भी बोला चलो देखते हैं अगर कोई फँसा है तो सीढ़ियाँ चर्राईं हर कदम पर लगता था कोई हमारे ठीक पीछे चल रहा है मुड़कर देखते तो कोई नहीं होता।

ऊपर लंबा गलियारा था अंत में एक कमरा रोना वहीं से आ रहा था दरवाजे के नीचे से ठंडी हवा निकल रही थी प्रिया का हाथ काँप रहा था अजय ने कुंडी पकड़ी दरवाजा अंदर से हल्का सा खिंच गया जैसे कोई इंतजार कर रहा हो।

सफेद साड़ी वाली लड़की

कमरे में एक लड़की खड़ी थी सफेद साड़ी बिखरे बाल चेहरा झुका हुआ पैर जमीन पर थे या हवा में पहली ही नज़र में समझ नहीं आया सिसकियाँ कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं प्रिया ने काँपती आवाज़ में पूछा तुम तुम कौन हो? लड़की ने धीरे धीरे सिर उठाया आँखों से खून नहीं लाल-लाल आँसू बह रहे थे त्वचा इतनी सफेद कि नीली नसें दिख रही थीं मुँह खुला लेकिन होंठ नहीं हिले आवाज़ कमरे के हर कोने से आई।

मुझे न्याय चाहिए मुझे इंसाफ चाहिए और फिर तभी बंगला हिल गया खिड़की के काँच में दरार पड़ी रोहन पीछे हटा और दीवार से जा टकराया तस्वीर गिर पड़ी उसी लड़की की तस्वीर वही साड़ी वही बिखरे बाल।

बुजुर्ग की आवाज़ और बंगले का इतिहास

तभी गलियारे से एक बुजुर्ग आवाज़ आई हम मुड़े एक बूढ़ा आदमी खड़ा था धुंधला जैसे धुआँ हो इस बंगले में सालों पहले एक परिवार रहता था उनकी इकलौती बेटी थी एक आदमी ने विश्वासघात किया उसे बहकाया फिर बेरहमी से मार डाला पुलिस आई केस दब गया हत्यारा शहर में आज भी साँस ले रहा है बेटी की आत्मा यहीं रह गई इंसाफ के बिना वह जाती नहीं।

अजय का गला सूख गया आप आप कौन हैं? बूढ़ा बोला मैं उसका बाप था इतना कहते ही वह अंधेरे में घुल गया दीवाल खाली रह गई लड़की अभी भी कमरे में थी आँखें हम पर टिकी हुईं।

प्रिया रोने लगी हम कुछ नहीं कर सकते हमें जाने दो लड़की एक कदम बढ़ी फर्श पर उसके पाँव की आवाज़ नहीं आई निखिल चिल्लाया माफ करना हम नहीं जानते थे!

वादा और छूटने का रास्ता

अजय ने हिम्मत करके हाथ जोड़े आवाज़ फटी हुई थी लेकिन साफ थी सुनो हम तुम्हें इंसाफ दिलाएँगे उस आदमी को ढूँढकर यहीं लाएँगे कसम से हमें जाने दो ताकि हम उसे ला सकें।

कमरे में सन्नाटा पसर गया लड़की ने देर तक देखा फिर उसकी आवाज़ धीमी पड़ी लगभग फुसफुसाहट दो दिन सिर्फ दो दिन अगर झूठ बोला तो चारों यहीं रहोगे मेरे साथ।

दरवाजे एक साथ खुल गए ठंडी हवा पीठ पर पड़ी हम भाग निकले सीढ़ियाँ आँगन गेट और गेट के बाहर पाँव रखते ही सब शांत हो गया जंगल की आवाज़ें लौट आईं पीछे मुड़कर देखा खिड़की पर सफेद साड़ी झिलमिला रही थी और फिर गायब।

दो दिन बाद बंगला बेचने का जाल

शहर लौटे तो किसी ने मजाक नहीं उड़ाया चेहरे खुद बयान कर रहे थे रोहन ने पुराने अखबार खंगाले एक नाम बार बार मिला वही आदमी अब प्रॉपर्टी का दलाल बना फिरता था पुराने मकान सस्ते में हड़पता था अजय ने प्लान बनाया बंगला बेचने का नाटक करेंगे लालच से आएगा।

फोन किया आवाज़ मीठी रखी साहब जंगल के किनारे पुराना बंगला है कागजात कमजोर हैं इसलिए दाम बहुत कम कल रात देख लेना दिन में चोर उचक्के घूमते हैं और आदमी हँसा रात को ही आता हूँ सस्ता पड़ा तो तुरंत पैसे दूँगा।

दूसरी रात हम चारों फिर उसी गेट पर थे हाथ काँप रहे थे दिल कह रहा था भाग जाओ लेकिन वादा टूटता तो वापसी नहीं थी गेट फिर खुद खुल गया अंदर चिराग नहीं जलाया इंतजार किया।

वह आदमी आया और आत्मा जागी

कार की लाइट आँगन में गिरी आदमी उतरा मोटा बटुआ तिरछी मुस्कान यह खंडहर इतने में भी महँगा है दिखाओ जल्दी अजय आगे बढ़ा आवाज़ काँपी अंदर आइए ऊपर एक कमरा है सबसे बड़ा।

आदमी सीढ़ियाँ चढ़ने लगा तीन कदम ऊपर हवा बदल गई लालटेन की लौ मुड़ी दीवारों से सिसकी फूटी आदमी रुका कौन रो रहा है? कोई जवाब नहीं गलियारे के अंत में वही कमरा दरवाजा धीरे से खुला।

लड़की अंदर खड़ी थी इस बार चेहरा झुका नहीं था आँखें सीधी उस आदमी पर आदमी की मुस्कान काँप गई ये ये क्या नाटक है? साड़ी हवा में उठी आवाज़ पूरे बंगले से टकराई।

पहचाना…? तूने मुझे यहीं छोड़ा था ना तूने।

आदमी पीछे हटा पाँव फिसले वह चीखा भागने को मुड़ा—दरवाजा अपने आप बंद हो गया हम चारों गलियारे में थे लेकिन अंदर घुस नहीं सके कुंडी बाहर से नहीं अंदर से जाम थी चीखें आईं दीवारें काँपीं काँच टूटे फिर एक लंबी डरी हुई चीख और सन्नाटा।

जब दरवाजा खुला कमरे में आदमी नहीं था सिर्फ उलझी हुई धूल और फर्श पर एक पुरानी अंगूठी वही जो तस्वीर में लड़की के हाथ में हुआ करती थी हम अंदर नहीं गए हिम्मत नहीं हुई।

आत्मा की शांति और धन्यवाद

आँगन में खड़े थे कि सामने रोशनी फैली लड़की सीढ़ियों पर थी अब आँखों से खून नहीं बह रहा था चेहरा शांत था साड़ी सफेद ही थी लेकिन हवा में हल्की उसने हम चारों की तरफ देखा और सिर झुकाया।

और बोली कि धन्यवाद अब मुझे चैन मिल गया है।

प्रिया के आँसू रुक नहीं रहे थे निखिल हाथ जोड़कर खड़ा रहा अजय कुछ बोल नहीं पाया लड़की ने एक बार बंगले की तरफ देखा फिर ऊपर जैसे कोई बंधन टूटा हो सफेद रोशनी धीरे-धीरे पतली हुई और आसमान की तरफ चली गई पेड़ों पर रात की आवाज़ लौट आई कुर्सी अब नहीं हिल रही थी गेट के बाहर आकर हमने पीछे देखा बंगला वैसा ही खड़ा था लेकिन अब वह जागता नहीं लग रहा था वह सो गया था।

आज भी वो सवाल

और दोस्तों पुलिस ने उस आदमी को लापता लिखा कार आँगन में मिली बंगले के अंदर कुछ नहीं मिला हमने जो देखा अदालत में नहीं चलता इसलिए यह कहानी मैं तुम्हें सुना दी है।

तो ये थी दोस्तों आज कि एक डरावनी भूतिया कहानी जिसे पढ़ कर मे भी डर गया और क्या आप लोगों को भी डर लगा है और कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं और इसी तरह की बेहद डरावनी भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर कर दे धन्यवाद।

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