राजेश मामा का भूत Hindi Horror Story

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विनय कुमार है मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ आज जो एहसास बताने जा रहा हूँ वह कोई फिल्म वाली कहानी नहीं है यह वह रात है जब मैं दसवीं में था और पहली बार समझा कि वादा मौत के बाद भी जीवित रह सकता है आज भी जब याद आता है आँखों में पानी आ जाता है डर भी लगता है दोनों एक साथ।
राजेश मामा का भूत | Hindi Horror Story

राजेश मामा का भूत Hindi Horror Story

राजेश मामा मुझे सबसे ज्यादा प्यारे थे छुट्टियों में मैं उनके घर चला जाता वे हँसते हुए दरवाजे पर खड़े होते आ गया मेरा पायलट? चल ठंडा पानी पी ले शाम को छत पर बैठकर कहानियाँ सुनाते कभी साइकिल ठीक करते कभी मेरे स्कूल बैग की ज़िप सिल देते एक दिन मैंने कहा मामा मुझे पेन ड्राइव चाहिए प्रोजेक्ट का डेटा रखना है वादा करो दोगे उन्होंने माथा ठोका वादा अगली बार हाथ में पकड़ा दूँगा मर जाऊँ तब भी वादा नहीं तोड़ूँगा हम दोनों हँसे थे उस हँसी का मतलब तब समझ में नहीं आया।

छुट्टियाँ खत्म हुईं तो माँ ने कहा अब पढ़ाई पर ध्यान दो दसवीं है मैं घर लौट आया किताबें खोलीं मामा का फोन कभी आता कभी मैं करता आखिरी बार उन्होंने कहा था पढ़ ले ठीक से पेन ड्राइव का इंतजाम हो रहा है उसके तीन दिन बाद वह रात आई।

नींद में खंभा और नंगे तार

रात गहरी थी पंखा धीरे घूम रहा था मैं करवट बदल रहा था कि अचानक कमरा ठंडा हो गया आँखें खुलीं या खुलीं जैसी लगीं छत पर वह पंखा नहीं था मैं अपने बिस्तर पर था लेकिन खिड़की के बाहर एक खंभा खड़ा था उस खंभे के नंगे तार पर कोई बैठा था।

राजेश मामा कुरता वही था जो आखिरी बार पहने थे बाल हवा में नहीं हिल रहे थे वे तारों पर ऐसे बैठे थे जैसे कुर्सी हो मैं बोलना चाहता था मामा आप यहाँ कैसे? गला नहीं खुला उन्होंने सिर उठाया आँखें नहीं थीं।

पुतली नहीं सफेद नहीं सिर्फ दो काले गड्ढे जैसे किसी ने आँखें निकाल दी हों और अंधेरा भर दिया हो वे कुछ नहीं बोले मुँह बंद था फिर उन्होंने हाथ बढ़ाया उंगलियों के बीच एक छोटी पेन ड्राइव थी वही काली वही छोटी उन्होंने उसे मेरी ओर फेंका।

पेन ड्राइव हवा में तैरती हुई मेरे सीने पर आ गिरी।

और ठंडक ऐसी लगी जैसे बर्फ का टुकड़ा हो मैं चीखना चाहता था तभी खंभे पर करंट की सी नीली चमक दौड़ी मामा का चेहरा एक पल को तारों में खोया और मेरी नींद टूट गई।

जागने पर पेन ड्राइव पडी मिली

मैं बिस्तर पर उठकर बैठ गया साँस फूल रही थी कमरा अपना ही था पंखा चल रहा था खिड़की बंद थी कोई खंभा नहीं मैंने छाती पर हाथ फेरा और उंगलियों के नीचे प्लास्टिक टकराई पेन ड्राइव सच में मेरे कंबल पर पड़ी थी गिरी हुई मैंने छुआ तो हाथ काँपे यह सपना कैसे चीज़ छोड़ गया?

तभी बाहर से माँ की सिसकी आई पहले धीमी फिर फटती हुई मैं पेन ड्राइव मुट्ठी में दबाये दौड़कर बाहर गया आँगन में माँ चारपाई पर बैठकर रो रही थीं बाबा दीवार पकड़े खड़े थे चेहरा सफेद मम्मी क्या हुआ? मेरी आवाज़ खुद मेरे कानों को अजीब लगी।

माँ ने मुझे देखा और और जोर से रोने लगीं बेटा अब तुम्हारे राजेश मामा इस दुनिया में नहीं रहे अभी फोन आया घर की लाइट चली गई थी तार ठीक करने खंभे के पास गए अचानक करंट लगा और वहीं वाक्य पूरा नहीं हो पाया।

वादा जो मौत के बाद भी पूरा हुआ

मैं वहीं बैठ गया पेन ड्राइव हथेली में चुभ रही थी दिमाग एक बात पर अटक गया था मैंने उन्हें अभी अभी देखा था नंगे तार पर आँखों के बिना और उन्होंने यही पेन ड्राइव फेंकी थी।

वही जो मैंने माँगी थी वही वादा जो हँसते हुए किया था मर जाऊँ तब भी वादा नहीं तोड़ूँगा।

रात भर आँख नहीं लगी हर बार पलक झपकती खंभा वापस आ जाता काले गड्ढे मुझे घूरते कोई शब्द नहीं सिर्फ वह फेंकना सुबह पेन ड्राइव कंप्यूटर में लगाई।

और अंदर खाली नहीं थी एक फोल्डर था नाम विनय अंदर स्कूल के नोट्स थे और एक छोटा सा टेक्स्ट फाइल लिखा था वादा निभा दिया पढ़ाई लगन से करना।

फाइल का टाइम उसी रात का था।

और उस घंटे का जब मामा के घर वाले कह रहे थे कि करंट लगा हाथ का कंप्यूटर ठंडा लगने लगा मैंने लैपटॉप बंद कर दिया कई दिन तक उस कमरे में अकेले सो नहीं पाया।

घर वालों को सच बताना

दस पंद्रह दिन बाद हिम्मत हुई तो सबको बताया सपना काली आँखें पेन ड्राइव का गिरना फाइल का समय कमरे में सन्नाटा छा गया मामा जी की आँखें भर आईं किसी ने कहा शायद संयोग हो किसी ने कहा मन का भ्रम लेकिन पेन ड्राइव तो हाथ में थी और फाइल का समय झूठ नहीं बोलता था।

उस दिन समझ आया भूत प्रेत सिर्फ डराते नहीं कभी कभी कोई रिश्ता इतना गहरा होता है कि शरीर गिर जाए वादा खड़ा रह जाए राजेश मामा मुझे बहुत अच्छे लगते थे उनकी हँसी याद आती है तो अच्छा लगता है उनके खाली गड्ढे याद आते हैं तो रजाई सिर तक खिंच जाती है।

दोस्तों अगर रात को कोई अपना दिखे और वह बोलता न हो सिर्फ कोई चीज़ तुम्हारे पास फेंक दे तो हँसकर मत काटना कभी कभी वह आखिरी भेंट होती है और कभी कभी वह याद दिलाती है कि कुछ रिश्ते बिजली से भी तेज चलते हैं।

तो ये थी दोस्तों आज कि एक डरावनी भूतिया कहानी जिसे पढ़ कर मे भी डर गया और क्या आप लोगों को भी डर लगा है और कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं और इसी तरह की बेहद डरावनी भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर कर दे धन्यवाद।

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