दानव | Hindi Horror Story
एक बार कि बात है राजगढ़ गांव में अप्रेल के महिने में एक दिन गांव में एक टांगा आया।
और उसके अंदर से मनोज नाम का एक आदमी उतरा टांगे वाले ने उसके दो बड़े-बड़े बैग भी टांगे से उतारे।
फिर मनोज बोला शुक्रिया भाई।
और तभी मुखिया भी अपने एक आदमी के साथ वहां आया और बोले अरे अरे मास्टर साहब आप क्यों यह संदूक उठा रहे हैं? यह काम करने के लिए तो हमारे आदमी है ना।
तो मनोज मास्टर मुखिया जी से नमस्ते करने लगता है और कहता है कि लगता है कि आपने मुझे पहचान लिया है मुखिया जी।
क्यूं नही मास्टर जी आपको यहा साफ सूथरा कमरा दे दिया जायेगा और फिर मनोज बोला की क्या आप मुझे वहां तक छुड़वा देंगे?
फिर मुखिया जी हंसते हुए बोले कि हां हां मैं ही आपको छोड़ने चलता हूं।
और मनोज मुखिया की गाड़ी में बैठा और गाड़ी आगे बढ़ने लगी वैसे वो घर बसावट से काफी दूर है कुछ देर की यात्रा के बाद ये उस एक घर पर पहुंचे एक पुराना सा घर उसके ठीक पीछे ही नदी बह रही थी और आसपास जंगल था।
फिर मनोज मास्टर कहता है कि अरे वाह! यह तो काफी अच्छा है मुझे ऐसा ही घर चाहिए था।
और फिर मुखिया के आदमी ने उसके दोनों बैग घर के अंदर रख दिए और बोला मास्टर साहब आपकी पाठशाला की सफाई का काम आज पूरा हो जाएगा आप कल से पाठशाला शुरू कर सकते हैं।
फिर मनोज मास्टर बोला बहुत बहुत शुक्रिया मुखिया जी और मुखिया उसे छोड़कर वहां से चला गया मनोज ने अपने बैग्स को कमरों में रख दिया रात हो चली थी
रात की ठंड...
और मनोज को काफी ठंड लग रही थी और ठंड के मारे मनोज बोला की हे भगवान यहां इतनी ठंड क्यों लग रही है?
और फिर उसने दूसरे कमरे में जाकर देखा तो वहां अंगीठी और कुछ लकड़ियां रखी थी अरे यह लकड़ियां तो बहुत बड़ी हैं इनको बिना काटे तो अंगीठी में डाला ही नहीं जा सकता उसने सभी कमरों में देखा लेकिन उसे वहां कुल्हाड़ी नहीं मिली।
फिर मनोज मास्टर बोला कि चलो बाहर जाकर देखता हूं हो सकता है जंगल में छोटी लकड़ियां मिल जाए बिना काटे यह तो अंगीठी में नहीं आने वाली।
रात में नदी का भाव...
और वह घर से बाहर निकला मौसम काफी ठंड था और उसने देखा कि नदी की तरफ कुछ छोटे पेड़ भी हैं तो मे उन पेड़ों से छोटी लकड़ियों का इंतजाम हो सकता है और वो नदी के ही तरफ रवाना हुआ।
और सामने से आती लहरों का नजारा उसे बहुत मनमोहक लग रहा था और वो लकड़ियो को भूल गया और नदी के किनारे की तरफ उसके कदम चल पड़े तो एक लहर आई और उसने आंखें बंद कर उसको महसूस किया उसके घुटनों तक पानी आया और लहर वापस जाते हुए पानी वो वापस ले गई वाह कितना खूबसूरत मंजर है।
और तभी उसे उसके पैर के पास कुछ महसूस हुआ उसने देखा कि मिट्टी में कुछ है उसने मिट्टी हटाकर देखी तो वो हैरान रह गया। उसके पैरों में एक कुल्हाड़ी पड़ी थी।
और फिर मनोज मास्टर बोला अरे भाई ये क्या?
और उसने कुल्हाड़ी उठाई और वापस घर में पहुंचा कुल्हाड़ी की मदद से उसने लकड़ियां काटी और फिर अंगीठी में डालकर आग लगाई और वाह गहरी सांस लेने लगा और बोला अब थोड़ी राहत मिली और उसने अंगीठी पलंग के पास रखी और फिर सुकून की नींद सो गया।
पाठशाला का पहला दिन
और अगली सुबह मनोज अपने पाठशाला में पहुंचा पहले दिन से ही वहां गांव के कई लोग शिक्षा लेने पहुंचे और छात्र बोले कि मास्टर जी ये नटोरे का क्या मतलब होता है?
यह सुनकर मनोज मुस्कुराया और बोला अरे चाचा जी वो नटूरे नहीं नेचर है नेचर नेचर।
और फिर सभी यह सुनकर हंस पड़े।
और गांव के लोगों को पढ़ाना काफी मुश्किल का काम था लेकिन मनोज को यह करने में बहुत गर्व महसूस हो रहा था दोपहर होने पर मनोज पाठशाला को ताला लगाया और फिर मुखिया उसे गांव घुमाने जगह-जगह ले गया शाम होने पर सभी आग के सामने बैठकर बातें करने लगे हैं।
और मनोज मास्टर मुखिया जी जब से यहां आया हूं गांव की गुफा के बारे में कुछ ना कुछ अलग बात सुनी है उस गुफा की असली कहानी क्या है?
फिर मुखिया जी बोले अरे वो गुफा बहुत ही विचित्र है गुफा के अंदर जाना तो साधारण बात है लेकिन उसके अंदर दीवारों पर संस्कृत भाषा में बहुत लंबी-लंबी बातें लिखी हैं अब वो कोई कहानी है या कुछ और है यह नहीं पता लेकिन जिसने भी उन दीवारों पर लिखी पंक्तियों को पढ़ा है।
उसकी रहस्यमई तरह से 3 दिन के अंदर मौत हो जाती है।
फिर मनोज मास्टर बोलते हैं हे भगवान यह तो बहुत अजीब बात है मुखिया जी शुक्र है मुझे संस्कृत पढ़ना नहीं आता है।
और मनोज को इस बात पर भरोसा नहीं था।
क्योंकि वो एक पढ़ा लिखा व्यक्ति था अब चलिए मुखिया जी अब आपसे कल मिलता हूं वो फिर अपने घर पहुंच गया। लेकिन बिरजू अभी भी गुफा के बारे में ही सोच रहा था उसके कदम उसे ऊसफा के पास खींच ले गए।
फिर मनोज मास्टर बोले कि मैंने झूठ बोला था कि मुझे संस्कृत नहीं आती अब तो मेरी उन पंक्तियों को पढ़ने की जिज्ञासा और बढ़ गई है भला दीवारों पर लिखी बातों को पढ़ने से कोई मर सकता है?
गुफा के अन्दर का नजारा
और वह हंसते हुए उस गुफा के अंदर चला गया और बोला कमाल है जितनी अंदर जा रहा हूं रोशनी उतनी ही बढ़ती जा रही है।
लेकिन समझ नहीं आ रहा रोशनी आ कहां से रही है।
तभी उसे एक भयानक हंसी सुनाई दी ओ हो हो हो उसकी हालत खराब हो गई और वो जल्दी से गुफा से बाहर भागा वो गांव की तरफ निकल गया और कुएं पर जाकर रुका और गहरी सांस लेने लगा और साथ हि हांफने लगा और श वो लंबी-लंबी सांसे लेने लगा उसे बहुत प्यास भी लगी थी पानी उसने कुएं में बाल्टी डाली और ऊपर खींची।
और उसके बाद उसने पीने के लिए जैसे ही चुल्लू में पानी लिया वो पानी एकदम लाल हो गया और उसमें से बदबू आने लगी उसने चुल्लू का पानी फेंक दिया
और बाल्टी पर नजर मारी तो उसके अंदर साफ पानी ही था वह जल्दी से वहां से अपने घर की तरफ भागा।
फिर मुखिया बोले अरे क्या हुआ आपको? इतना हाफ क्यों रहे हैं? कुछ नहीं खाना लगाओ। उसने अपने डर को छिपाना चाहा लेकिन इसमें वो नाकाम हो रहा था खाइए ना थाली आपके सामने है
और उसने एक रोटी तोड़ी और जैसे ही मुंह में रखी तो उसे बहुत ही अजीब सा स्वाद आया। चुप। और उसने रोटी वापस उगल दी उसने देखा कि थाली में सब्जी की जगह कीड़े रेंग रहे हैं अरे क्या हुआ आपको? जब बििया ने देखा तो प्लेट में खाना ही था वो कीड़े सिर्फ बिरजू को ही नजर आए थे कुछ नहीं वो मैं मुझे भूख नहीं है वो बिस्तर में गया और बुरी तरह से कांपने लगा उसकी बीवी बिया को उसकी बहुत चिंता होने लगी अगले दिन सुबह 7:00 बजे मनोज की आंख खुली। उसने उठते ही खिड़की से नदी का नजारा देखा वाह कितना खूबसूरत नजारा है।
ठीक 8:00 बजे वो पाठशाला पहुंचा और पढ़ाने का काम शुरू किया और शाम होने तक वो मुखिया के साथ ही रहा उस समय बिरजू भी काम से अपने घर को लौट रहा था तभी उसे अपने पीछे से अचानक भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।
उसने डरते हुए पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था उसने फिर से चलना शुरू किया वो फिर से कदमों की आवाजें उसे सुनाई देने लगी।
लेकिन अब उसने रुकना ठीक नहीं समझा और अपने घर पहुंचा बिंदिया घर के अंदर नहीं थी बिरजू ने मटके से लेकर पानी पिया तभी उसे वही भारी कदमों और हंसने की आवाज सुनाई देने लगी हंसी की आवाज और उसने देखा कि यह आवाज उसे स्नान गृह से आ रही थी वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा बंधिया क्या तुम हो? तभी दरवाजा हल्के से खुला और एक भयानक हाथ दरवाजे पर आया उसे देखकर वो डर गया और उसने अपने कदमों को पीछे लिया तभी घर की सारी लाइट बंद हो गई और उसे अंधेरे में दो लाल चमकती आंखें दिखाई दी।
उसकी चीख सुनकर आसपास मौजूद सभी लोग उसके घर की तरफ भागे बिंदिया भी पड़ोस के ही घर में थी वो भी वहां से निकल कर भागी वहां जाने पर बिरजू की लाश पड़ी मिली उसकी गर्दन पूरी पीछे तक घूमी हुई थी मनोज भी बिरजू की लाश देखते हुए बहुत हैरान था जरूर यह गुफा के अंदर ही गया होगा लेकिन इसने तो कहा था कि इसे संस्कृत पढ़ना नहीं आता मनोज को यही लग रहा था कि उसका किसी ने खून किया है।
और गुफा वाली बात के सिर्फ आड़ ली जा रही है कुछ देर बाद मनोज वापस अपने घर पहुंचा आज तो चाय पहले ही पी लेता हूं बहुत थकान हो रही है और चाय बनाने के लिए किचन में गया तो पतीला खाली था अरे यार दूध वाला तो सुबह आएगा अब चाय कहां से पऊंगा? तभी उसने किचन के खिड़की से देखा कि नदी के किनारे एक गाय खड़ी है।
मनोज मास्टर :- ओह माय गॉड वो घर से बाहर नदी किनारे पहुंचा तो गाय अभी भी वहां खड़ी थी कल रात जब मुझे कुल्हाड़ी की जरूरत थी तो कुल्हाड़ी नदी के किनारे आ गई और जब अब मुझे दूध की जरूरत थी तो गाय आ गई यह क्या हो रहा है?
उसके मन में असमंजस ने जन्म ले लिया था कि नदी किनारे उसे कौन मदद भेज रहा है और दूसरी बात यह थी कि गुफा के बारे में गांव के लोग जो फैला रहे हैं क्या वो सच है ना जाने क्यों वो उसी समय गुफा की तरफ निकल गया गुफा के अंदर पहुंचकर उसने दीवार पर लिखी बातों को पढ़ना शुरू किया क्योंकि उसको संस्कृत आती थी।
भारत के 1026वीं ईसवी में रतनगढ़ में राजा अमर सिंह का राज था उनके राज्य में प्रजा बहुत खुश थी और उनका तेज दूर-दूर तक फैला था लेकिन एक दिन अचानक महाराज बहुत बुरी खबर है राज्य में हाहाकार मचा हुआ है आम जन की मृत्यु हो रही है लोगों का कहना है कि रात के समय कोई दानव आता है उनकी जान लेकर चला जाता है उसे देखने वाले कुछ ही लोग जिंदा है और अब तक उसने कई लोगों की जाने ली है।
अगर वह कोई दानव है तो शीघ्र ही तांत्रिक तारानाथ को बुलाया जाए अब वही है जो हमें उस दानव से युद्ध करने का तरीका बता सकते हैं।
तांत्रिक तारानाथ को बुलाया गया।
और तांत्रिक तारानाथ बताते हैं कि महाराजा कोई भी दानव भला क्यों हमारे ही राज्य में आकर हाहाकार मचाएगा हमें नहीं लगता कि यह कोई आम दानव है।
और फिर मंत्री बोले महाराज उस दानव ने जहां आखिरी हमला किया था वहां से हमें कुछ मिला है और फिर महाराजा बोले क्या मिला है? उसे सामने लाइए मंत्री जी और फिर मंत्री ने ताली बजाई और एक दरबार एक थाली लेकर आया मंत्री ने उस थाली से कपड़ा हटाया तो उसके अंदर कोई नुकीली चीज थी उसे देखते ही तारानाथ के माथे पर लकीरें उभर आई।
फिर महाराजा बोले क्या हुआ बाबा फिर तारानाथ ने अपने झोले से कुछ चावल निकाले और उन पर कोई मंत्र पढ़कर उस नुकीली चीज पर डाले उसके संपर्क में आते ही चावल जलकर राख हो गए है।
तांत्रिक तारानाथ भगवान महाराज वो कोई दानव नहीं बल्कि असुर है यह उसी असुर का नाखून है।
और असुर आपके पड़ोसी दुश्मन राज्य ने हमारे राज्य को खत्म करने के लिए इस असुर को आवाहन करके यहां भेजा है और महाराजा बोला तांत्रिक तारानाथ अब हम इस असुर को कैसे वध कर सकते हैं?
फिर तांत्रिक तारानाथ बोले कि यह कोई आम दानव नहीं असुर है महाराज हमारी मृत्यु ही इस असुर का अंत है।
और यह सुनकर सभी हैरान रह गए हमें एक महायज्ञ करना होगा और अपने शरीर को त्याग करना होगा हमारी हड्डियों के बने वज्र से ही उसकी मृत्यु संभव है और महाराजा कुछ देर सोच कर बोले कि बाबा क्या और रास्ता नहीं है?
और फिर तांत्रिक तारानाथ बोले नहीं महाराज हमें हमारी मृत्यु का कोई दुख नहीं है आपकी रक्षा करते हुए हमारी मृत्यु हो जाए तो इससे अच्छी मृत्यु और क्या होगी?
और फिर तारानाथ एक गुफा में जाकर यज्ञ में बैठे और दो दिनों के बाद जब महाराज अमर वहां पहुंचे तो वहां तारानाथ नहीं थे उनकी हड्डियों का एक वज्र रखा हुआ था और महाराजा कहते हैं कि आपका ये बलिदान सदैव अमर रहेगा बाबा
और अगले दिन राज्य पर दुश्मन राज्य के राजा रुद्र सिंह ने हमला किया अमर सिंह अपनी सेना के साथ पूरे जोश और होश से उनका मुकाबला कर रहे थे अमर सिंह अब तेरी मौत तय है अब मैं तुझे मारने के लिए असुर का आवाहन करता हूं उसने आंखें बंद की और असुर का आवाहन किया तभी वहां एक भयानक असुर आ पहुंचा।
उसे देखकर सभी खौफ में आ गए थे लेकिन राजा अमर सिंह ने ताराना की हड्डियों का बना वज्र निकाला जिसे देखकर असुर के चेहरे की हंसी उड़ गई।
और दानव बोल पड़ा अरे ये क्या? उस तारानाथ ने अपने शरीर का त्याग दे दिया।
और दूसमन राजा दानव से बोले क्या हुआ तुझे? तू ऐसे क्यों डर रहा है? फिर दानव बोला की ये तारानाथ की हड्डियों का वज्र इससे तो मेरा अंत हो जाएगा और अब मैं इस युद्ध में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता हूं।
और दूसमन राजा बोला कि अरे मैंने तुझे असुर लोक से बुलाया है तू मेरी मर्जी के बगैर वापस नहीं जा सकता।
फिर दानव बोला हां नहीं जा सकता लेकिन मैं अगले 1000 साल के लिए खुद को एक गुफा में बंधित कर सकता हूं जहां ये वज्र नहीं जा सकता और ये कहकर असुर वहां से भाग गया और फिर अमर सिंह ने उसी समय रुद्र को खत्म करके अपने राज्य को बचा लिया इतना पढ़कर मनोज रुक गया अरे आगे की कथा कहां लिखी है?
वो थोड़ा और आगे गया तो उसको अगली दीवार पर आगे की कथा लिखी मिली असुर ने इस गुफा के अंदर खुद को बंधित कर दिया राजा अमर सिंह अब अगले 1000 साल तक उस गुफा के अंदर नहीं जा सकते थे मतलब पूरे जीवन काल में कभी भी नहीं तो इसीलिए उन्होंने आज्ञा देकर यह सारी कथा इस गुफा के अंदर लिखवा दी लेकिन गुफा से बाहर आते ही लिखने वाले मर गए।
इतना पढ़कर मनोज हैरान रह गया अब उसे भी डर लगने लगा था तभी उसे एक भयानक आवाज सुनाई दी कराहने की आवाज़ और यह आवाज सुनकर मनोज बुरी तरह से डर गया और वहां से भाग निकला और उसे अपने पीछे किसी के आने का अंदेशा हो रहा था और वो बिना पीछे देखे भागता रहा और सीधा अपने घर आकर उसने सांस ली और हांफते हुवे बोला हे भगवान मेरी रक्षा करना और मनोज कि गहरी सांस लेने की आवाज़ आती है और मनोज बहुत डरा हुआ था।
अब वो उस नदी के बारे में सोचना भी भूल गया था उसी रात गांव का एक लड़का रौनक छत पर सो रहा था तभी उसे भयानक सांसों की आवाज आने लगी और हांफते हुए उसने उठकर जैसे ही देखा तो उसके सामने एक बहुत ही भयानक असुर खड़ा हुआ था और मनोज की चीखने की आवाज़ असुर की पकड़ से वो खुद को छुड़ा ना सका अगले पल चारों ओर सन्नाटा छा गया सुबह होते ही गांव में उसके ना रहने की खबर फैल गई।
और गांव में माहौल शोकमय हो गया
फिर वहा एक आदमी बोला कि यह रौनक कैसे मारा गया? यह तो गुफा के अंदर गया भी नहीं था मुखिया जी यह तो बहुत बुरा हुआ गुफा में तो मैं गया था फिर यह क्यों मारा गया? धीरे-धीरे तीन दिन गुजर गए असुर ने इन दिनों में कई नौजवान लड़कों को गायब कर दिया अब मुझे कोई नहीं मार सकता मैं आजाद हो चुका हूं हो गांव में एक सभा बैठाई गई।
पहले तो सिर्फ गुफा में जाने वाला इंसान ही मारा जाता था लेकिन अब तो बिना गुफा में जाए जो भी लड़का 18 वर्ष हो रहा है उसी का अंत हो रहा है फिर एक आदमी बोला कि इसे कैसे रोके मुखिया जी? मनोज मन ही मन अपने बारे में सोच रहा था मैं गुफा में गया था।
मुझे तो कुछ भी नजर नहीं आया ना ही मेरे साथ कुछ हो रहा है तीन दिन के बाद भी मैं जिंदा कैसे हूं? मनोज घर पर आया और इसी सोच में डूब गया कि उसकी जगह गांव के लोग क्यों मारे जा रहे हैं तभी उसकी नजर नदी पर पड़ी।
वो बिना कुछ सोचे नदी किनारे गया तुमने मेरी दो बार मदद की है अगर यह कोई इत्तेफाक नहीं है तो मेरी मदद करो मुझे बताओ कि तुम कौन हो और क्या ताल्लुक है मेरा इस नदी से और गांव में हो रहे खूनों से तभी उसने देखा कि लहरों के साथ कुछ उसके करीब आ रहा है वो उसे देखता रहा और पास आने पर पता चला कि वो एक बोट थी जिसमें कोई नहीं था ये क्या? इसमें तो कोई है ही नहीं फिर ये यहां कैसे पहुंची?
मनोज ने उस बोट में बैठ गया उसके बाद वो अपने आप रवाना हो गई मनोज को डर भी लग रहा था और हैरानी भी हो रही थी।
कहीं उसकी मौत को अलग तरह से तय तो नहीं किया गया वो बोट एक किनारे पर जा लगी जहां सामने ही एक पुराना किला नजर आ रहा था एक किला इस टापू पर मनोज बोट से उतर किले के अंदर गया वहां दीवारों पर मशाले जली हुई थी।
आ जाइए महाराज यह सुनकर मनोज ने सामने देखा तो उसे वही तांत्रिक तारानाथ नजर आया कौन हो तुम? मुझे महाराज क्यों कह रहे हो? मैं तांत्रिक तारानाथ इस जन्म में आप भले ही मनोज है लेकिन पिछले जन्म में आप हमारे महाराज अमर सिंह थे यह सुनकर मनोज हैरान रह गया तुम अगर तारानाथ हो तो तुम तो मर गए थे आपके सामने मेरी आत्मा है महाराज इसका मतलब है कि मैं ही राजा अमर सिंह हूं।
इसीलिए मेरी मौत नहीं हुई जी महाराज जैसा कि आपने पढ़ लिया होगा कि आपके कदम गुफा में पड़ने के बाद असुर गुफा से आजाद हो जाएगा तो वो आजाद हो चुका है हे भगवान मतलब जितने भी गांव के लोग मारे जा रहे हैं।
उनका जिम्मेदार मैं हूं ऐसा ना सोचे महाराज आप बस उस असुर का अंत कर दें वो खासकर 18 वर्ष के नौजवानों को इसलिए मार रहा है कि अगर उसने 21 नौजवानों को मार दिया तो फिर वो मेरी हड्डियों के बने वज्र से भी नहीं मारा जाएगा उसकी शक्ति बढ़ जाएगी मेरी हड्डियों के बने वज्र को इस्तेमाल करने का समय आ गया है।
जहां रखा हुआ वज्र चमक रहा था अगली रात गांव के लोगों में डर का माहौल था रविशंकर के बेटे मोहित का जन्मदिन था पपर लेकिन खुशी मनाने की जगह सभी खौफ में थे रविशंकर और उसकी पत्नी मोहित के पास ही बैठे थे मां बाबूजी आप इस तरह क्यों मेरे सर पर बैठे हैं? मुझे मेरा जन्मदिन मनाना है।
अरे बेटा तुम्हारी जान खतरे में है हम तुमको अकेला नहीं छोड़ सकते हां वहीं कुछ लोग घर के बाहर भी टहल रहे थे मोहित रविशंकर का इकलौता बेटा है उसकी मौत नहीं होनी चाहिए हमें उसे हर हाल में बचाना है हां मुखिया जी तभी इन सभी को भारी कदमों की आवाज सुनाई देने लगी इन सभी ने पहली बार असुर को आते देखा इनकी आंखें खौफ से फट पड़ी और दिल बुरी तरह दहल गया तुम लोग मुझे नहीं रोक सकते वो रविशंकर के घर की तरफ बढ़ा तभी कुछ गांव वाले उसकी तरफ भागे उसने अपने एक ही हाथ से उनको ऐसा धकेला कि वो दूर जा गिरे और फिर उसने रविशंकर के घर का दरवाजा तोड़ दिया।
और उसे देखकर रविशंकर और उसकी पत्नी डर गए और मोहित का दिल दहल उठा और उसकी हांफने की आवाज़ आ रही थी और फिर असुर ने आगे बढ़कर मोहित को अपने कंधे पर उठा लिया तुझे तो मैं गुफा में ले जाकर आराम से खाऊंगा वो मोहित को लेकर घर से निकला तभी उसके सामने मनोज आ गया छोड़ दे इसको असुर छोड़ ओ तो तू मुझे रोकेगा और फिर दानव बहयानकि हसी हस रहा था और उसने मनोज को धक्का देना चाहा लेकिन उसे छूते ही असुर को एक झटका सा लगा और कराहने की आवाज़ आई और मोहित उसके हाथ से छूट गया और उसके माता और पिता ने उसे खुद से चिमटा लिया। यह कैसे हो सकता है? मैं तो तुझे मच्छर की तरह मसलने की शक्ति रखता हूं।
तभी मनोज ने अपने पीछे छिपाया हुआ वज्र निकाला जिसे देखकर असुर है रह गया मैं कोई आम इंसान नहीं राजा अमर सिंह तेरी मौत।
यह सुनकर दानव के चेहरे पर ख्वाब उतर आया वो वहां से भागने लगा तभी मनोज ने आगे बढ़कर उसकी सीने में मुझे घंट दिया और असुर की कराहने की आवाज़ आने लगी और असुर बुरी तरह से अहंकार बनने लगा सभी गांव के लोग वहां इकट्ठे हो गए।
कहानी का अंत
और अशूर एक तेज चीख के साथ वो खत्म हो गया और राख बनकर ढेर हो गया फिर मुखिया जी बोले कि मास्टर साहब आप ही हमारे पूर्व काल महाराज थे फिर मनोज बोला कि जी वो तो पिछले जन्म की बात है मैं अब सिर्फ आपका मास्टर साहब ही हूं।
मोहित के माता-पिता ने मनोज का धन्यवाद किया और सभी ने उसकी हिम्मत की सराहना की और मनोज को अब बहुत अच्छा लग रहा था
क्योंकि उसने गुफा के खौफ को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था और असुर के साथ बुराई का वध कर दिया था।
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