ऑटो ड्राइवर का हुआ भूत से सामना | Hindi Horror Story

⚠️ Disclaimer :- आप सभी को सुचित किया जाता है कि इस वेबसाइट पर दी गई सभी कहानियाँ काल्पनिक ( Fiction ) है और इनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना, अंधविश्वास जादू-टोना फैलाना या किसी को डराना नहीं है और हमारी इस वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर केवल और केवल हम मनोरंजन के लिए कहानी बनाकर लिखते है जिसे आपका मनोरंजन हो सके और कमजोर दिल वाले लोग और बच्चे इसे सावधानी से पढ़ें धन्यवाद।
मान लो दोस्तों एक सुनसान सड़क रात तुम ऑटो चला रहे हो हेडलाइट की रोशनी में सड़क के बीचोबीच कोई लेटा है तुम गुस्से में उतरते हो और बोलते हो तुझे मरने के लिए मेरा ही ऑटो मिला था क्या? वह आदमी उठता है और तुम्हें पता चलता है वह इंसान नहीं था ठीक ऐसा ही मेरे पिताजी के साथ हुआ था।
ऑटो ड्राइवर का हुआ भूत से सामना | Hindi Horror Story

ऑटो ड्राइवर का हुआ भूत से सामना | Hindi Horror Story

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम विनोद कुमार है मैं हरियाणा से हूँ यह बात तब की है जब मैं दसवीं में पढ़ता था हम मिडिल क्लास परिवार थे आज भी जब पिताजी उस रात का ज़िक्र करते हैं उनके हाथ काँप जाते हैं और मैं मैं उस ऑटो की खाली सीटों को देखकर अब भी चुप हो जाता हूँ।

किस्तों वाला ऑटो और घर की आस

घर का खर्च चलाना आसान नहीं था पिताजी ने हिम्मत करके एक नया ऑटो किस्तों पर ले लिया सुबह निकलते रात को थके लौटते पर मुँह पर हँसी रहती आज अच्छी कमाई हुई बेटा माँ रसोई में बाट जोहतीं कुछ महीने ऐसे ही बीते लगता था ज़िंदगी पटरी पर आ गई है।

और कहते हैं ना होनी को कौन टाल सकता है जो लिखा है वह रास्ता बदलकर भी सामने आ जाता है।

गुरुग्राम की बुकिंग और टूटा शीशा

एक दिन पिताजी को गुरुग्राम जाने की बुकिंग मिली पैसे अच्छे थे उन्होंने झट से हाँ कर दी ऑटो घर से निकाल ही रहे थे कि अचानक आगे का शीशा किसी चीज़ से टकराकर चटख गया काँच की कनियाँ सीट पर बिखर गईं।

माँ द्वार पर आ गईं चेहरा उतर गया ए जी काँच का टूटना अशुभ होता है यह कोई आने वाली मुसीबत का इशारा है आज मत जाओ।

पिताजी हँसे स्टीयरिंग पकड़े हुए अरे मेरी रानी काँच किसी के लिए अशुभ होता है तो किसी के लिए शुभ भी क्या पता मेरे लिए शुभ हो? बुकिंग छूट जाएगी किस्त भी तो भरनी है माँ कुछ और कहतीं पर पिताजी हाथ हिलाकर निकल गए उस वक्त किसी को नहीं पता था वह शीशा सिर्फ़ काँच नहीं टूटा था रास्ता भी टूट चुका था।

रात के साढ़े ग्यारह बजे शॉर्टकट लिया

साम तक गुरुग्राम पहुँचे सामान उतरवाया बाज़ार से घर के लिए कुछ चीज़ें लीं खाली लौटने के बजाय सोचा सवारी भी ले चलूँ दो पैसे और बन जाएँगे एक स्टैंड पर ऑटो भर गया लोग बैठे बातें कर रहे थे हँसी भी थी पिताजी खुश थे ऑटो स्टारट किया और सड़क पर दौड़ने लगे।

जल्दी के चक्कर में एक जगह ऑटो रोका और शॉर्टकट पकड़ लिया आधा रास्ता पार हुआ तो घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे पेड़ घने होते गए बस्तियाँ छूट गईं सड़क पतली और काली तब जाकर अंदाज़ा हुआ गलत रोड आ गई है जिस रोड पर बाद में पता चला मौत इंतज़ार करती है।

सड़क के बीच में लेटा हुआ आदमी

कुछ दूर और चले तो हेडलाइट में एक शक्ल दिखी सड़क के बीचोबीच कोई उल्टा लेटा था हाथ पैर फैले पिताजी ने हॉर्न दबाया एक बार दो बार तीन वह आदमी टस से मस नहीं हुआ।

गुस्सा चढ़ आया ऑटो रोका दरवाज़ा झटका नीचे उतरे पास जाकर आवाज़ तेज़ की ओये तुझे मरने के लिए मेरा ही ऑटो मिला था क्या? हिल भी सकता है कि नहीं?

लेटी हुई देह में हलचल हुई धीरे धीरे वह उठा पहले कमर फिर गर्दन गर्दन टेढ़ी थी ऐसे जैसे हड्डी अपनी जगह पर न हो चेहरा अजीब रंग मरा मरा सा आँखें पिताजी के गले पर टिकीं पिताजी अभी भी डाँट रहे थे रात के बारह बजने को हैं लेट कर रख दिया है सड़क वह आदमी कुछ नहीं बोला सिर्फ़ टेढ़ी गर्दन घुमाए गले की तरफ़ घूरता रहा।

पीछे से आती डर भरी चीखे

तभी ऑटो के पीछे से चीख फूटी अरे भाईसाहब आ जाओ अभी आ जाओ पिताजी मुड़े सवारियों के चेहरे पसीने से भीगे थे आँखें फटी हुईं कोई सीट से उठकर दरवाज़े तक आ गया था।

पिताजी बोले अरे इस बला से तो निपट लूँ मुड़कर देखा तो वह आदमी वहाँ नहीं था सड़क खाली धूल भी नहीं उड़ी थी जैसे कभी कोई लेटा ही न हो पिताजी के पैर में झटका सा लगा एक सवारी दौड़कर आई आवाज़ फटी हुई भाईसाहब यहाँ से चलो ऑटो में बैठो जल्दी।

सब काँप रहे थे पिताजी बैठे स्टीयरिंग पकड़ा पूछा इतने डरे क्यों हो? जवाब एक साथ आया फुसफुसाहट में पहले स्टार्ट करो यहाँ से निकलो ऑटो चला थोड़ी दूर बाद फिर पूछा।

मौत का रोड

एक सवारी ने हिम्मत करके कहा आप इस रोड पर गलत आ गए शायद पहली बार आए हो यह रोड मौत का रोड माना जाता है देर रात यहाँ जो आता है वापस नहीं जाता और जिससे आप बात कर रहे थे वह कोई आम आदमी नहीं था वह भूत था आप कैसे बच गए हमें समझ नहीं आता।

पिताजी के पैरों तले ज़मीन खिसक गई याद आया वह आदमी बार बार गर्दन की तरफ़ देख रहा था हाथ गले पर गया उंगलियों के नीचे ठंडी धातु हनुमान जी का लॉकेट घर से निकलते वक्त माँ ने गले में पहनाया था ए जी यह पहन लो रात को दूर जा रहे हो।

पिताजी ने लॉकेट बाहर निकाला इसी की वजह से शायद इसी की वजह से वह कुछ नहीं बिगाड़ पाया उन्होंने लॉकेट सवारियों को दिखाया देखो हनुमान जी।

सवारियाँ अचानक गायब हो गई

लॉकेट की चमक पड़ते ही ऑटो के अंदर हवा बदल गई सवारियों के चेहरे खिंच गए आँखें गहरी हो गईं मुँह ऐसे खुले जैसे चीख अंदर दब रही हो और बाहर फटने वाली हो फिर एक साथ भयानक चीख निकली काँच काँपे।

आज तुम बच गए हो वरना इस रोड पर जो भी आता है मारा जाता है।

आवाज़ें गूँजती रहीं फिर धुएँ की तरह शरीर पतले हुए सीटें एक एक कर खाली होती गईं आखिरी चीख हवा में टूट गई ऑटो में अब सिर्फ़ पिताजी थे खाली सीटें खाली रात और गले में लॉकेट जो अभी भी ठंडा था।

तब जाकर समझ आया जिन्हें सवारी समझकर इतनी देर बैठाए घुमा रहे थे वे इंसान नहीं थे आत्माएँ थीं वही जो उस रोड पर इंतज़ार करती हैं लेटा हुआ आदमी अकेला नहीं था पूरी ऑटो पहले से भरी हुई थी।

घर वापसी और बुखार

पिताजी घर पहुँचे तो माँ द्वार पर थीं उन्होंने हाथ पकड़ा हथेली जल रही थी बदन काँप रहा था मैं भी जाग गया हम दोनों ने उन्हें सम्हाला बिस्तर पर लिटाया रात भर बुखार चढ़ा रहा।

दूसरे दिन शाम को जब थोड़े संभले पूरी बात बताई शीशा शॉर्टकट लेटा आदमी टेढ़ी गर्दन खाली सड़क और वे सवारियाँ जो धुएँ हो गईं कमरे में सन्नाटा छा गया माँ हाथ जोड़कर बैठ गईं हनुमान जी तुम्हीं ने बचाया काँच का टूटना मैंने कहा था ना।

पिताजी ने सिर झुकाया उस रात मैं मौत से बात कर रहा था और फिर कुछ दिन में पिताजी ठीक हो गए ऑटो फिर चला पर उस शॉर्टकट पर दोबारा कभी नहीं मुड़े।

तो ये थी दोस्तों आज कि एक डरावनी भूतिया कहानी जिसे पढ़ कर मे भी डर गया और क्या आप लोगों को भी डर लगा है और कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं और इसी तरह की बेहद डरावनी भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर कर दे धन्यवाद।

Post a Comment

0 Comments