नाव वाली चुड़ैल Hindi Horror Story

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नाव वाली चुड़ैल Hindi Horror Story मे पढ़ें कि केसे एक नाव वाली चुड़ैल से सामना होता है रमेश का और वह एक चुडेल के साथ नाव में गुम रहा था
नाव वाली चुड़ैल Hindi Horror Story

नाव वाली चुड़ैल Hindi Horror Story

एक महीने बाद दोपहर का समय था और गांव के लोग अपने-अपने कामों में लगे हुए थे और उसी समय एक जोड़ा टांगे में बैठा गांव में आया।

और गांव के मुखिया वहा पहुंचे और बोले कि अरे बाबूजी मधुपुर आ गया रमेश ने सहारा देकर अपनी बीवी निराजनी को उतारा और वो वहां खड़े मुखिया से मिला और रमेश बोला कि जी क्या आप ही मुखिया जी हैं? फिर मुखिया बोलता है कि हां मैं ही यहां का मुखिया हूं फिर रमेश कहता है कि क्या मुखिया जी हमें यहां रहने के लिए घर मिलेगा तो मुखिया जी कहते है कि हां बिल्कुल मिलेगा

और फिर रमेश और निराजनीय एक घर में रहने लगे जो नदी के करीब ही था तो रमेश एक अच्छी सी कहानी लिखना चाहता था क्योंकि रमेश एक लेखक था और अपनी नई कहानी शुरू करने की तैयारी में था रात के 10:00 बजे मोहिनी और मोहित हाथ थामे टहल रहे थे।

और फिर मोहिनी मोहित से कहती है कि मोहित तुम हमारे रिश्ते की बात अपने बाऊजी से कब कर रहे हो?

और फिर मोहित कहता है कि अरे करेंगे भाई अभी पहले बलवीर भैया की शादी तो होने दो वरना बाबूजी कहेंगे बड़े की शादी नहीं हुई और छोटा फुदक रहा है और नदी किनारे अजीब सी शांति छाई हुई थी।

चलती हवाएं माहौल को सुहाना बना रही थी।

ये दोनों भी बातें करते-करते नदी किनारे पहुंच चुके थे कितना सुहाना मौसम है ना हां नदी भी कितनी खूबसूरत लग रही है।

और दोनों नदी किनारे बैठ कर बातें करने लगे कितना अच्छा होता कि कोई मांझी होता तो हम दोनों उसकी नाव में नदी की सैर कर सकते हां बहुत अजीब बात है कि हमारी नदी में मांझी क्यों नहीं आते? वरना मन तो मेरा भी बहुत करता है।

नाव‌ वाली चुड़ैल बुढ़िया आती है

तभी पानी की कल-कल की आवाज आनी शुरू हुई दोनों को सामने से वही नाव आती नजर आई जिसके अंदर घूंघट वाली मांझी बैठी थी और फिर मोहिनी बोल पड़ती है अरे वाह ये तो बहुत अच्छा हुआ वो देखो मांझी आ रही है और मांझी किनारे पर आ गई और उसमें बैठी औरत शांत रही।

और फिर मोहित पूछता है कि काकी क्या आप हमें नदी की सैर करा लाएंगी?

और फिर नाव में बेटी बुढ़िया इस पर उसने हां में सिर हिलाया और फिर मोहिनी रहती है कि अरे वाह चलो दोनों एक-एक करके उसकी नाव में बैठ गए और फिर उस औरत ने नाव चलाना शुरू किया धीरे-धीरे नाव आगे बढ़ रही थी और पानी की आवाज बहुत ही मधुर लग रही थी और ये दोनों बहुत खुश थे मोहिनी ने पानी हाथ में उठाकर मोहित पर फेंका ये फिर मोहित मन करता है और मोहिनी नहीं मानती है और वह लगातार मोहित पर पानी के छठे बरसती है और फिर मोहित भी पानी के छींटे मारने लग जाता है और फिर दोनों हंसने लगे और नाव अब नदी के बीचोंबीच थी।

और वो मांझी बिल्कुल चुपचाप नाव चला रही थी और फिर मोहिनी कहती है कि ये कुछ बोल क्यों नहीं रही है?

और फिर मोहित पूछता है कि जी क्या आप सच में कोई मांझी है

या फिर आप भी हमारी तरह सैर को निकली हैं? ये सुनकर वो औरत तेज-तेज़ चप्पू जलाने लगी नाव की रफ्तार बढ़ गई और ये दोनों शांत भाव से उसको देखने लगे तभी हवा चली और उसके चेहरे से घूंघट हट गया।

उसकी लाल चमकती आंखें और भयानक चेहरा जैसे इन दोनों ने देखा तो इनके डर का ठिकाना नही रहा और मोहिनी उसका चेहरा देख सहम गई और बेहोश हो गई।

कुछ देर बाद मोहिनी की आंख खुली तो वह किनारे पर अकेली पड़ी थी उसने इधर-उधर देखा और खुद को अकेला पाकर घर की तरफ दौड़ पड़ी और फिर मोहिनी कि मंमी कहती हैं कि मोहिनी अरे तुम कहां गई थी और कहां से आ रही हो इतनी रात में? मोहिनी बहुत डर में थी लेकिन अपनी मंमी को मोहित के बारे में बता नहीं सकती थी तो इसीलिए वह चुप ही रही और उसकी मंमी ने उसे घर के अंदर भेज दिया और उसको मोहित की चिंता हो रही थी।

नाव‌ वाली औरत का दिखना

और शाम होने पर उसको अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देने लगी।

जैसे कि कोई मांझी तेज-तेज चप्पू चला रही हो ये चप्पू की आवाज यहां कैसे आ रही है? उसने खिड़की खोल कर देखा तो उसको अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ।

और उसने देखा कि उसके सामने वही औरत नाव के अंदर खड़ी है और वह जोर से चीख पडी और फिर उसकी मां उसकी चीख सुनकर वहां पहुंची और‌ बोली क्या हुआ बेटा? मोहिनी ने खिड़की की तरफ इशारा करते फिर से देखा मां वो लेकिन इस समय खिड़की के बाहर उसका बगीचा नजर आ रहा था।

यह देखकर मोहिनी के मुंह से आगे कुछ नहीं निकला और रात होने पर मोहिनी सोने के लिए बेड पर पहुंची करीब 1:00 बजे जब वो गहरी नींद में थी।

तभी उसको अपने पैरों पर कुछ गीला महसूस हुआ और उसकी आंख खुल गई और बोली कौन है? लेकिन आंख खुलते ही उसने पाया कि उसका बेड़ नदी के बीच तैर रहा है और वही घूंघट वाली औरत अपनी नाव में बैठी उसकी तरफ आ रही है और ये सब देख कर वह मन हि मन बोल‌ रही थी कि अरे ये सब क्या है? मेरे साथ क्या हो रहा है?

और फिर मोहिनी बोली कि क्यों मेरा पीछा कर रही हो? तभी उसे किसी ने हिलाया तो वो अपने सपने से बहार आई।

और उसने पाया कि वो अपने कमरे में ही है और उसके मां-बाप उसके पास ही हैं और ऊसके पिताजी बोले कि क्या हुआ बेटा? तुम इतनी अजीब बर्ताव क्यों कर रही हो?

और फिर मोहिनी कस के अपनी मां के गले लग गई और फिर उसने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया और फिर मोहिनी कि मा बोली कि ये क्या किया तुमने अरे नदी पर गई और उस मांझी के नाव में भी बैठी और यह सब आप बता रही हो और फिर मोहिनी कहती हैं कि मां मैं वहां मोहित के साथ गई थी इसलिए डर की वजह से आपको बताया नहीं आप उसे पसंद कहां करते हैं यह सुनकर मोहिनी के पिता ने उसकी मां की तरफ देखा और मोहिनी को आश्वासन दिया और फिर वो मोहिनी का खास ध्यान रखने लगे।

लेकिन मोहिनी को हर जगह वो मांझी दिखाई देती।

मोहिनी ऐसे में मोहित को बहुत याद कर रही थी और इससे तंग आकर उसने फैसला किया कि वो उस औरत से जाकर मिलेगी और मोहित से उसके बारे में पता करेगी और रात के करीब 12:00 बजे वो नदी पर पहुंची तो सामने उसको नदी किनारे वही औरत खड़ी नजर आई फिर मोहिनी बोली तुम क्यों मेरे पीछे पड़ी हो और मेरा मोहित कहां है? क्या किया तुमने उसके साथ?

फिर वह नाव वाली औरत कहती हैं कि आओ मेरे साथ आओ मैं तुमको उससे मिला दूंगी और फिर मोहिनी उसके कहने पर वापस नाव में बैठ गई‌ और फिर उस औरत ने नाव चलाना शुरू किया जैसे-जैसे औरत आगे बढ़ रही थी मोहिनी के दिल की धड़कन भी बढ़ती जा रही थी और फिर कुछ देर चलने के बाद नाव एक टापू पर आकर कहने लगी कि यही है तुम्हारा मोहित फिर मोहिनी बोली कि क्या तुमने मोहित को इस टापू पर छोड़ा है? ये सुनकर उस औरत ने यहां में से हिलाया फिर मोहिनी उसकी नाव से उतरी और आगे बढ़ गई।

टापू बहुत सुनसान था और वीरान भी और मोहिनी एक डर के साथ आगे कदम बढ़ा रही थी और सोच रही थी कि ये मुझे यहां क्यों छोड़ गई? और फिर जोरो से अवाज लगा कर बोली मोहित मोहित क्या तुम यहां हो? वो बार-बार आवाज लगाती है और लेकिन उसे कोई जवाब सुनाई नहीं दे रहा था और तभी अचानक उसका पैर किसी चीज से टकराया और वो जमीन पर गिर गई और फिर उसने वहा पर पाया कि मोहित जमीन पर मृत हालत में पड़ा है।

और यह सब देखकर मोहिनी अब चीखती चिल्लाती वहां से वापस नदी की तरफ भाग रही।

तभी वही नाव वाली औरत अचानक से उसके सामने आ गई और भयानक अंदाज में बहुत जोर से चिल्ला रही और फिर अगले दिन मोहिनी के गायब होने की खबर गांव में बुरी तरह फैल गई थी

पंचायत की बैठक

और फिर पंचायत मे मुखिया जी, कुछ गांव वाले और रमेश भी वहां मौजूद थे और फिर एक आदमी पुछता है कि इस मांझी का शिकार अभी तक कितने लोग हो चुके हैं? मुखिया जी बोले कि पता नहीं हमें उससे कब छुटकारा मिलेगा फिर रमेश पुछता है कि मुखिया जी ये किस मांझी की बात कर रहे हैं? आप मुझे बताइए फिर मुखिया जी बोले कि अरे रमेश उस नदी के किनारे एक औरत एक मांझी है।

रात के समय पर नजर आती है

और कोई गलती से भी उसकी नाव में बैठ जाता है तो वो गायब हो जाता है या कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती है फिर रमेश बोला कि लेकिन ऐसा क्यों? कौन है वो मांझी? और वो ऐसा क्यों कर रही है? फिर मुखिया जी बताते है कि कई सालों पहले नदी पर बहुत से मांझी रहा करते थे।

सभी मांझी नाव में बैठाकर यात्रियों को दूसरे छोर पर छोड़कर आते थे उन्हीं मांझियों में एक था किशन किशन की बीमारी के चलते मौत हो गई थी और उसकी मौत के बाद उसकी पत्नी मंजरी बेसहारा हो गई थी इसीलिए एक दिन वो किशन की नाव लिए नदी पर पहुंची और फिर एक बिरजू नाम का आदमी मंजरी से कहता है कि अरे ये क्या कर रही है मंजरी? तू इस नदी में मांझी नहीं बन सकती इस पर सिर्फ हम मर्द अपनी नाव चलाते हैं और औरत से नाव का काम करना गांव का और हम मर्दों का अपमान है।

फिर‌ मंजरी कहती हैं कि मुझे इस समय धन की जरूरत है और यह मेरे पति की नाव है।

मैं इसे क्यों नहीं चला सकती? फिर बिरजू कहता है कि बावली हो गई है के तन्ने पता ना कि औरत का काम करना ठीक ना से और उसे गैर मर्द गंदी नजरों से देखे से और फिर मंजरी बोली हां अगर मर्द गंदी नज़रों से देखते हैं तो उनको अपनी नज़र ठीक करनी चाहिए उसमें मेरी कोई गलती नहीं है और रही बात काम करने की तो मैं भीख मांगकर अपना घर नहीं चलाने वाली और मैं इस नदी में भी अपनी नाव चलाने की हकदार हूं और मैं भी एक मांझी बन सकती हूं और ये सुनकर बाकी सभी मांझी अपने दांत भीचने लगे सभी ने मिलकर योजना बनाई और जो भी यात्री नदी किनारे आता वो मंजरी की नाव में उसे बैठने ना देते और मंजरी बोली आइए भाई साहब आपको उस पार जाना है मैं छोड़ दूंगी सिर्फ चार आने में तभी बलबीर आगे आकर बोला अरे हमारा धंधा को खराब करना चाहती है क्या? उस पर जाने के छह आने लगते हैं और तू हमारा ग्राहक छीन के चार आने में ले जाएगी।

और इसी तरह कर के वो सही दाम लगाने पर भी मंजरी के यात्री छीन लिया करते थे।

एक रात मंजरी अपनी नाव में सवार नदी किनारे बैठी थी और उसी समय एक मांझी अपनी नाव के साथ वहां मौजूद था जिसने अपना चेहरा गमछे से छिपाया हुआ था और एक आदमी अपने छोटे भाई के साथ नदी किनारे पहुंचा और उसके छोटे भाई का सर फटा था और उसको गंभीर चोट आई थी और वो बोला कि भाई साहब मेरे भाई को जल्द ही वैद्य जी के पास ले जाना होगा वरना इसकी मौत हो जाएगी फिर मंजरी बोली कि आइए भाई साहब मेरी नाव में आइए फिर दूसरा नाव‌ वाला आदमी बोला अरे चुपकार और फिर वह आदमी बोला कि भाई साहब आप मेरी नाव में आओ मैं जल्दी पहुंचा दूंगा शुक्रिया भाई लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है मैं कल आपको दे दूंगा फिर वह नाव‌ वाला आदमी बोला अरे ये क्या कह रहे हो पैसे नहीं है तो हम लेकर भी नहीं जाने वाले पहले पैसे लेकर आओ औल उस आदमी ने गंभीर हालत में देखते हुए भी उसको ले जाने से इंकार कर दिया।

और‌ फिर मंजरी बोली कि भाई साहब आप मेरी नाव में बैठ जाइए मैं आपको छोड़ देती हूं और आप पैसे मत देना और वो आदी बोला आपका बहुत-बहुत शुक्रिया बहन और वो आदमी अपने भाई को मंजरी की नाव में बैठाने ही वाला था कि तभी दूसरा नाव‌ वाला आदमी जल‌ भून गया और वो गुस्से मे बडबडा रहा था कि बस बहुत हुआ इस मंजरी का अब हम इसकी मनमानी नहीं चलने देंगे यह हमारा धंधा चौपट करके ही मानेगी फिर मंजरी बोली और अगर तुमको बिना पैसों के नहीं जाना तो मुझे इसे ले जाने दो बेचारा कितने दर्द में है।

और अगर इसको जल्दी ही वैद्य जी के पास नहीं ले जाया गया तो इसकी मौत हो जाएगी और फिर एक और नाव वाला आदमी वहा आता है औद गुस्से मे कहता है कि हां दिख रहा है लेकिन हम तुझे फ्री में नहीं ले जाने देंगे फिर मंजरी बोली कि मैं इसे आज वैद्य जी तक पहुंचा कर रहूंगी और ये सब सुनकर उन दोनो नाव वालो को गुस्सा आ गया और वो मंजरी को मारने लगे और साथ मे उस आदमी को भी मार डाला और नदी मे बहा दिया और फिर रमेश मुखिया जी से बोला कि ये तो बहुत बुरा हुआ मुखिया जी और फिर आगे क्या हुआ?

फिर अगली रात से मंजरी अपनी नावों के साथ नदी किनारे नजर आने लगी और उसने चार नाव‌ वाले लोगो को मार दिया और तभी से सभी मांझियों के दिल में डर का माहौल बन गया।

क्यूंकि वह मांझियों को वो अपनी कहानी बताती और उन पर जानलेवा हमला भी करती इसलिए सभी मांझियों ने नदी में नाव चलाना छोड़ दिया और रोजाना रात के समय सिर्फ मंजरी की नाव ही नदी में नजर आती और वो जो भी उसकी नाव में बैठ जाता वो या तो नाव गायब हो जाता या फिर मर जाता और फिर रमेश को मंजरी की दास्तान बहुत दुख भरी लगी।

मंजरी का सामना

क्यूंकि वो एक लेखक था इसीलिए वो मंजरी के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगा और उसी के बारे में उसने लिखना भी शुरू किया और कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए एक रात निराजिनी को लेबर पेन शुरू हुआ और वो‌ बोली कि जल्दी से वैद्य जी को बुला कर लाइए फिर रमेश बोला कि हा मैं अभी किसी को बुला कर लाता हूं फिर रमेश मुखिया के घर पहुंचा तो वहां हवेली के बाहर ही एक आदमी बैठा हुआ था और रमेश बोला कि बिरजू काका वो मुखिया जी कहां है? फिर वो बिरजू बोले कि बेटा मुखिया जी तो किसी काम से पास ही के गांव गए हैं दो दिनों में वापस आएंगे और फिर रमेश बोला कि मुझे मदद की बहुत जरूरत है और मेरी घरवाली निराजिनी को दर्द शुरू हो गया है।

मुझे इस समय किसी वैद के पास जाना होगा जिसके पास दाई मां भी हो और फिर बिरजू काका बोले बेटा गांव में कोई वैद्य जी या दाई मां नहीं है और तुमको महीनपुर गांव में ही वैद्य जी और दाई मां मिल सकती है पर लेकिन वहां जाने के लिए अभी तुमको कोई टांगा नहीं मिलेगा और नदी के जरिए तुम वहां जा नहीं सकते और सुबह से टांगे चलना शुरू होंगे तो तभी कुछ हो सकता है।

फिर रमेश बोला कि नहीं सुबह तक भला मैं कैसे रुक सकता हूं।

मेरी बीवी कभी भी मां बन सकती है फिर बिरजू काका बोले कि बेटा रुकना तो पड़ेगा बताओ कैसे जाओगे? मुझे नहीं लगता कि इस समय कोई टांगे वाला तुमको वहां मिलेगा और फिर रमेश निराजनी को लेकर सरहद पर रवाना हो गया जहां एक तरफ नदी थी और उसके ऊपर पुल जा रहा था और उसने देखा कि पुल काफी ऊंचाई पर है और वहां कोई भी टांगा नहीं है।

फिर रमेश सोचने लगा कि क्या करूं? अब तुमको कैसे लेकर जाऊं मैं? तभी नाव के पतवार और चंपू की आवाज सुनाई दी और उसने देखा कि नदी किनारे नाव लेकर मंजरी आ रही है।

उसे देखकर एक पल को रमेश संट रह गया पर लेकिन तभी निराजनी रमेश को अब कुछ समझ नहीं आया और उसने निराजिनी को उठाया और संभल कर निराजिनी को मांझी की नाव में बिठाया और कहा कि हमें अगले छोर पर जाना है महिमपुर गांव मेरी बीवी को वैद्य जी और दाई मां की सख्त जरूरत है‌ और यह सुनकर मांझी ने नाव चलाना शुरू किया।

और आधी रात के समय किसी के साथ नाव में सफर करना यह जानते हुए भी कि वो एक आत्मा है यह बहुत ही डरावनी बात थी पर लेकिन आज रमेश ने ठान लिया था कि वो अपने होने वाले बच्चे और निराजनी की जान बचाकर रहेगा ना वो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था निराजिनी बहुत दर्द में थी और वो मंजरी के बारे में नहीं जानती थी इसलिए उसका पूरा ध्यान अपने दर्द पर था और बोल‌ रही थी कि पता नहीं आज मैं जिंदा बचूंगा या नहीं और फिर रमेश सोच रहा था कि पता नहीं ये आत्मा हमें सही सलामत वहां महिमपुर छोड़ेगी भी या नहीं और फिर सामने कुछ ही दूरी पर अब इन दोनों को किनारा नजर आ रहा था।

और रमेश को इस बात की खुशी थी कि अभी तक मंजरी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया यह देखकर रमेश को थोड़ी राहत मिली और फिर रमेश कि घर वाली बोली कि आप इतनी देर में क्यों नाव चला रही हैं? मुझे दर्द हो रहा है जल्दी कीजिए ना और ये सब सुनकर मंजरी को गुस्सा आ गया और वो तेज-तेज़ चप्पू चलाने लगी।

फिर रमेश बोला क्या हुआ रमेश? इस तरह क्यों बर्ताव कर रही है? तभी मुंजरी के चेहरे से घूंघट हट गया और इन दोनों ने उसका भयानक चेहरा देखा और फिर अगले दिन गांव में मातम सा माहौल छा गया सभी लोग रमेश और निराजनी के बारे में अफसोस जता रहे थे।

औल बिरजू काका से पूछ रहे थे कि काका तुमने रमेश को रात में नदी पर क्यों जाने दिया?

और फिर बिरजू काका बोलते हैं कि राम राम अरे मैंने कहा था रमेश से कि इस समय वहां जाना ठीक नहीं लेकिन उसने मेरी एक ना सुनी

और फिर मुखिया जी टेंशन में आकर बोलते हैं कि अरे अब तो रमेश भी गायब हो गया मैं भला अपने दोस्त को क्या जवाब दूंगा? अब मंजरी भी नदी किनारे नजर नहीं आती थी और फिर तीन दिन बाद एक टांगा गांव पहुंचा जिसके अंदर से रमेश और निराजिनी को उतरता देख सभी हैरान रह गए अरे रमेश तुम तुम जिंदा कैसे बच गए? रमेश और निराजनी को उसके बच्चे के साथ सही सलामत देखकर सभी खुश थे।

लेकिन ताज्जुब भी थे कि मंजरी की आत्मा ने उनको कैसे छोड़ दिया फिर रमेश कहता है कि मुखिया जी मैं एक लेखक हूं और मैं जानता हूं कि हर आत्मा तब तक ही भटकती है जब तक उसकी आखिरी ख्वाहिश पूरी नहीं हो जाती मंजरी की आखिरी ख्वाहिश थी उस आदमी को वैद्य जी के पास छोड़कर आना और जब मैं निराजनी को लेकर उसकी नाव पर पहुंचा तो उसको निराजनी में वही इंसान दिखाई दिया।

मंजरी की आत्मा को शांति मिली

इसीलिए उसने हमें उस पार पहुंचाया और इस तरफ उसकी आखिरी ख्वाहिश पूरी हो गई अब मंजरी नदी पर कभी नजर नहीं आएगी और यह सुनकर सभी गांव के लोग खुश हुए और गांव का एक आदमी बलबीर भी बहुत खुश था रात के समय बलबीर ने अपनी नाव पानी में उतारी और बालवीर कहता है कि उस मंजरी को मारने के बाद इतने सालों बाद नदी में नाव उतारी है आज तो पूरी रात नदी में घूमता रहूंगा बलबीर तेज-तेज़ चप्पू चलाने लगा और नाव आगे बढ़ने लगी।

और फिर तभी सामने से उसको मंजरी की नाव आती नजर आई।

और उसके चेहरे से हंसी गायब हुई ख्वाब में बदल गई और वो बोला कि तू तू वापस वापस कैसे आ गई? और फिर मंजरी कहती हैं कि मुझे मारने वाला तो तू ही था ना बलबीर तुझे मारे बिना भला मेरी आत्मा को शांति कैसे मिल सकती थी? और ये कहकर मंजरी उस पर दूर पड़ी और बलबीर अपनी नाव समेत पानी के अंदर समा गया।

तो ये थी दोस्तों आज कि एक डरावनी भूतिया कहानी जिसे पढ़ कर मे भी डर गया और क्या आप लोगों को भी डर लगा है और कहानी कैसी लगी कोमेंट मे जरुर बताएं और इसी तरह की बेहद डरावनी भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरुर कर दे धन्यवाद।

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