वो लड़की तीन साल पहले मर चुकी थी Hindi Horror Stories
नमस्कार दोस्तों मेरा नाम डॉक्टर विक्रम राठौर है और मैं राजस्थान के भीलवाड़ा के पास एक छोटे से शहर से आता हूँ वहाँ मेरा छोटा सा क्लिनिक है लोग मुझे अच्छा डॉक्टर कहते हैं लेकिन आज मैं जो किस्सा सुनाने जा रहा हूँ उसे याद करते ही मेरी छाती फट कर चार हो जाती है आज से करीब सात साल पहले मेरी मुलाकात दो भूतों से हुई थी एक लड़की एक बूढ़ा आदमी दोनों को आज भी याद करता हूँ तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं हाथ पर जो दाग है वह उसी खिड़की का है जहाँ से मैं कूदा था। अब कहानी शुरू होती है। ध्यान से सुनना।
क्लिनिक में अनजान लड़की
वह शाम साधारण सी लग रही थी आखिरी मरीज जा चुका था बाहर हवा तेज चल रही थी।
मैं फाइलें समेट रहा था कि दरवाजा धीरे से खुला कोई खटखटाया तक नहीं एक लड़की अंदर आई उम्र करीब बाईस तेईस की होगी गोरा रंग लंबे काले बाल सफेद सलवार सूट चेहरा शांत था लेकिन आँखें थकी और गीली लग रही थीं और वह सीधे मेरे टेबल के सामने खड़ी हो गई।
डॉक्टर साहब उसकी आवाज बहुत धीमी थी जैसे कोई दूर से बोल रहा हो मैंने कहा हाँ बोलिए अपॉइंटमेंट थी क्या आपकी कोई आज? वह बोली नहीं मैं आपको ढूँढते ढूँढते आई हूँ मेरे पिताजी की तबीयत बहुत खराब है वे अक्सर बीमार रहते हैं उन्हें हर वक्त इलाज की जरूरत पड़ती है शहर के डॉक्टर कह रहे थे किसी अनुभवी को घर ले चलो लोगों ने आपका नाम लिया और कहा आप ही बेस्ट डॉक्टर लगते हो।
मैं थोड़ा मुस्कुराया बेस्ट तो कोई नहीं होता लेकिन देखता हूँ उन्हें कल सुबह यहाँ ले आइए।
औल फिर लड़की ने सिर हिलाया नहीं डॉक्टर साहब वे उठ नहीं पाते बहुत कमजोर हैं आप घर चलकर देख लीजिए ना प्लीज उसकी आँखों में एक अजीब बेचैनी थी मैं थका हुआ था फिर भी मान गया कितनी दूर है? कुछ देर की बात है मेरी गाड़ी बाहर खड़ी है।
सुनसान सड़क और अजीब सफर
बाहर एक पुरानी सफेद सेडान खड़ी थी।
हेडलाइट्स धुंधली थीं मैं पीछे की सीट पर बैठ गया लड़की ड्राइविंग सीट पर थी इंजन चालू हुआ लेकिन आवाज बहुत कम थी जैसे गाड़ी खुद चुपचाप चल रही हो शहर से निकलते ही अंधेरा घना हो गया पहले कुछ दुकानें फिर खेत फिर सिर्फ पेड़ और खाली सड़क कोई वाहन नहीं कोई स्ट्रीट लाइट नहीं।
मैंने बात करने की कोशिश की आपका नाम क्या है? फिर वह लड़की अपना नाम अंजली बताती है और फिर मैंने पूछा कि तूमारे पिताजी कितने दिन से बीमार हैं? तो लड़की गाती है कि बहुत दिनों से उन्हें हमेशा किसी न किसी की जरूरत पड़ती है इतना कहकर वह चुप हो गई मैंने मोबाइल निकाला तो देखा कि नेटवर्क नहीं था और घड़ी पर समय सात बजकर बारह ही दिख रहा था और आगे बढ़ता ही नहीं था और ऊपर से सड़क इतनी सुनसान थी कि लग रहा था दुनिया खत्म हो गई हो और हवा के साथ पेड़ों की पत्तियाँ अजीब सी आवाज निकाल रही थीं मानो कुछ बहुत बुरा होने का संकेत दे रही हो।
हवेली का द्वार
पता नहीं कितनी देर चली फिर एक पुराना लोहे का बड़ा गेट दिखा दोनों तरफ ऊँची दीवारें उन पर सूखी बेलें गेट के पीछे एक बड़ी सी हवेली अंदर से सिर्फ एक कमजोर पीली रोशनी आ रही थी अंजली उतरी गेट खोला।
गाड़ी अंदर ले गई पार्क करके बोली डॉक्टर साहब आप अंदर चलिए मैं गाड़ी लगा के आती हूँ और मेरे पिताजी आपका इंतजार कर रहे होंगे।
मैं हवेली के बड़े सागौन के दरवाजे की तरफ बढ़ा दरवाजा पहले से थोड़ा खुला हुआ था और मैं अंदर घुसा तो लंबी अंधेरी बरामद मिली हवा में मिट्टी सूखे फूल और कुछ सड़ा हुआ सा गंध थी पूरा घर हवेली की तरह पुराना और बड़ा था और गहरा डरा देने वाला सन्नाटा था और वहा ऐसा लग रहा था कि अपने कदमों की आवाज भी दब रही थी।
बूढ़े आदमी का इंतजार
हॉल में एक बूढ़ा आदमी पुरानी लकड़ी की कुर्सी पर बैठा था सफेद बाल लंबी दाढ़ी खाकी कुर्ता।
और उसने मुझे देखते ही मुस्कुराया आओ मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था मैं वही रुक गया मेरा आपको पता था मैं आ रहा हूँ? बूढ़े ने धीरे से कहा मैं हर रोज यहाँ किसी न किसी का इंतजार करता रहता हूँ आज तुम आ गए आओ बैठो।
तस्वीर माला और रोना
मैं हैरान हुआ नहीं अंकल आपकी बेटी तो अभी-अभी मुझे गाड़ी में लेकर आई है।
और वही बाहर गाड़ी पार्क कर रही हैं उन्होंने कहा आप अक्सर बीमार रहते हैं बूढ़ा कुछ पल चुप रहा फिर उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे वह धीमी हिचकियों के साथ रोने लगा मेरी बेटी को मरे हुए आज तीन साल हो गए
उसने दीवार की तरफ इशारा किया वहाँ एक बड़ी सी फोटो लटकी थी वही अंजली सफेद सूट वही चेहरा फोटो के ऊपर ताजा सा गजरा लटका हुआ था जैसे अभी किसी ने चढ़ाया हो फूल सूखे नहीं थे मैं वह तस्वीर देखकर डर गया पीछे मुड़कर दरवाजे की तरफ देखा अंजली अभी तक नहीं आई थी।
बूढ़ा रोते रोते बताने लगा जिस रोड से तुम आए हो ना डॉक्टर उसी रोड पर तीन साल पहले मेरी अंजली नौकरी करके घर आ रही थी शाम हो चुकी थी चार लड़के थे उन्होंने उसकी गाड़ी रोक ली उसे उतार लिया उसके साथ जो किया मैं नहीं बता सकता जब मैं वहाँ पहुँचा वह जमीन पर पड़ी थी कपड़े फटे हुए वह पापा पापा चिल्ला रही थी कह रही थी चार लोगों ने मिलकर उसके साथ जबरदस्ती की।
मैं उसे उठाया घर लाया लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ एक बात घूमती रही कल सुबह पूरा गाँव जान जाएगा लोग क्या कहेंगे मेरी बेटी मेरी इज्जत मैं उस समाज में नहीं जी सकता था जहाँ मेरी बेटी के साथ हुआ काम रोज याद दिलाया जाए इसलिए उसी रात मैंने मैंने उसका गला दबा दिया उसने मेरी आँखों में देखा कुछ नहीं बोला बस आँसू थे फिर मैं उसी जगह गड्ढा खोदा और उसे दफनाया कुछ दिन बाद उसकी आत्मा आई रात को मेरे बिस्तर के पास खड़ी थी उसकी गर्दन पर मेरे हाथों के निशान थे उसने मुझे माफ नहीं किया उसने मुझे भी मार डाला अब हम दोनों यहीं हैं इंतजार करते हैं कभी किसी डॉक्टर को तो कभी किसी राहगीर का।
जो जिंदा नहीं था
कमरे में सन्नाटा छा गया मैं काँप गया यह यह आप क्या कह रहे हैं अंकल आप तो मेरे सामने अच्छे भले जिंदा खड़े हैं साँस ले रहे हैं मजाक मत करिए बूढ़े ने धीरे से सिर उठाया किसने कहा कि मैं जिंदा खड़ा हूँ?
उस पल उसकी आँखें पलटने लगीं पहले आँख का सफेद हिस्सा बड़ा हुआ फिर पुतलियाँ लाल होने लगीं लाल जैसे खून भर गया हो।
और तो और उसकी दाढ़ी के बाल बिना हवा के हल्के से हिलने लगे आवाज बदल गई गेहली अंदर से आती हुई अब तुम भी नहीं बचोगे मुझे मरने से नफरत हो चुकी है मेरी बेटी को भी हम दोनों को भूख लगी रहती है जीते लोगों की।
हवेली के अंदर भागना
मेरे रोंगटे खड़े हो गए आत्मा तक काँप गई दिमाग चकराने लगा मैं इधर उधर भागने लगा तभी पीछे से वही धीमी आवाज आई डॉक्टर साहब आप कहाँ जा रहे हैं? पिताजी का इलाज तो हुआ नहीं अंजली हॉल के दरवाजे पर खड़ी थी।
और उसकी आँखें अब वैसी नहीं थीं मुस्कान थी लेकिन होंठ नहीं हिल रहे थे उसकी गर्दन पर हल्का काला निशान दिख रहा था उंगलियों का।
खिड़की और छलांग
साँसें फूल चुकी थीं फिर एक लंबी गैलरी के अंत में एक खिड़की दिखी शीशा पुराना काली सिलें बाहर अंधेरा मैं हिम्मत करके उस खिड़की की तरफ भागा मुक्के से शीशा तोड़ा काँच हाथ में धंस गया दर्द हुआ खून निकला लेकिन मैं रुका नहीं खिड़की से बाहर कूद पड़ा नीचे झाड़ियाँ थीं शरीर लुढ़का हाथ और घुटने छिल गए।
मैं हवेली के बाहर भागता चला गया गेट तक पहुँचकर पीछे मुड़ा खिड़की पर दोनों खड़े थे अंजली और वह बूढ़ा दोनों मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे अभी कच्चा निगल जाएँगे उनकी आँखें लाल थीं हवा नहीं चल रही थी फिर भी उनके बाल हिल रहे थे मैं वहाँ से डरते डरते भाग खड़ा हुआ सड़क पर दौड़ता रहा जब तक गाँव की कोई रोशनी नहीं दिखी।
दोस्तों उस रात के बाद मैं उस रास्ते पर कभी नहीं गया सुबह पुलिस को बताया तो उन्होंने कहा उस इलाके में सालों से कोई हवेली नहीं है सिर्फ एक खंडहर हैं यह सब मैं देकर चौक गया कि यहां कल तक तो एक हवेली थी और आज दिन में यह खंडहर है।
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