अगली सुबह जब जनकपुरी गांव के लोगों को उस चोर की लाश मिली तो गांव में डर का माहौल छा गया। मुझे जल्दी गिरधर बाबा को इसके बारे में बताना होगा।
यह कहकर वो आदमी वहां से चला गया और उसके आसपास खड़े लोग अभी भी वहां तमाशाहीन थे।
कुछ देर बाद वो आदमी अपने साथ एक बाबा को लेकर आया जिसने पूर्ण रूप से काले वस्त्र धारण किए हुए थे। बाबा ने लाश को ठीक से देखा और बोले हे भगवान ये किस तरह की मौत हुई है
ऐसा लगता है इसके शरीर से सारा खून चूस लिया गया हो लेकिन शरीर पर एक भी घाव नहीं है। ऐसा काम ना कोई जानवर कर सकता है ना इंसान। तो कौन हो सकता है बाबा? जरूर इसका संबंध बीरमपुर से है। जब से वो लोग यहां आकर गुफा से ताबूत उठाकर लाए हैं
तभी से हमें कुछ अनहोनी होने का एहसास हो रहा था।
इस तरफ दिल्ली में इशिता और मेघना अपनी लैब में थे। इशिता के हाथ में कांच की एक बोतल थी जिसके अंदर मृत्युंजय अमृत था।
चलो अब इसका टेस्ट करते हैं।
इशिता ने मृत्युंजय अमृत टेस्टिंग मशीन के अंदर डाला और मशीन को चालू किया। स्क्रीन पर लिखा आया कि लिक्विड की पावर 5000 प्लस पॉइंट है।
अरे वाह मेघना।
अब तो हम दोनों को कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। इसकी पावर तो जितनी मैंने सोची थी उससे 100 गुना ज्यादा है। मृत्युंजय अमृत मशीन के अंदर था।
वहीं मेघना को कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था।
इशिता ने जैसे ही मशीन का आउटर बटन प्रेस किया तो अगले ही पल मशीन के अंदर से धुआं निकलने लगा। अरे ये क्या हो रहा है?
और मशीन बंद हो गई। यार मशीन से मृत्युंजय अमृत निकलना चाहिए था। यह धुआं कैसे निकल गया? इशिता ने मशीन को खोला तो उसके अंदर लगे कंटेनर में अभी भी मृत्युंजय अमृत था। थैंक गॉड ये सही है। इशिता ने उसे उठाया ही था कि तभी मृत्युंजय अमृत भाप बनकर हवा में गायब हो गया। ओह नो ये क्या हुआ? यह देखकर इशिता बुरी तरह हैरान रह गई। लेकिन मेघना ना जाने किस सोच में डूबी थी।
इशिता ने उसे झंझोड़ा। मेघना यार देखिए क्या हुआ? तू कहां खोई हुई है। मेघना ने मशीन की तरफ देखा और फिर बिना किसी भाव के बोली।
मृत्युंजय अमृत सिर्फ उस इंसान को पिलाया जा सकता है जिसको इसकी जरूरत हो। जो किसी बीमारी से परेशान हो। इसे किसी और जगह अपने फायदे के लिए स्टोर करके नहीं रखा जा सकता। क्योंकि यह कोई व्यवसाय का पात्र नहीं है। यह खासतौर से बीमारी से बचने के लिए ही सिद्ध हुआ है। हम इसका इस्तेमाल पैसे छापने के लिए नहीं कर सकते। शिट यार तभी मैं सोच रही थी आज तक किसी और ने इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया? ये दोनों शाम होने पर अपने घर पहुंचे। इशिता के चेहरे पर परेशानी के भाव दिख रहे थे। वहीं मेघना को अजीब सी बेचैनी हो रही थी। तभी इशिता ने खाना लगाया और टीवी ऑन किया।
आज की ताजा खबर जनकपुरी गांव में एक अजीब मामला सामने आया है। वहां कल रात को ऐसा तूफान आया जैसा पहले कभी नहीं आया और आज सुबह गांव में एक आदमी की लाश पाई गई। उसका शरीर पूरी तरह से पीला पड़ा हुआ था। जिसे देखने से लग रहा है
कि उसके शरीर में एक भी बूंद खून नहीं बचा। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। लेकिन इस तरह से खून किसने किया? यह एक बहुत बड़ा सवाल है। यह खबर देखते हुए मेघना ने इशिता से कहा अरे ये जनकपुरी तो वही गांव है ना जहां से हमने महाराज की लाश बरामद की थी। हां वही है लेकिन यहां पर जो कुछ चल रहा है उसका तेरी कहानी से कोई कनेक्शन नहीं है समझी। तू बस काम पर ध्यान दे। यार मुझे टेंशन हो रही है। हमारी जॉब का क्या होगा? रात करीब 1:00 बजे दमयंती उसी गुफा में ध्यान मग्न बैठी थी। उसने अपनी आंखों को बंद किया हुआ था और कोई मंत्र बुदबुदा रही थी। उसी समय मेघना भी अपने घर पर सो रही थी।
उसने खुद को एक जंगल में खड़ा पाया। ये कौन सी जगह है? तभी उसे एक हंसी सुनाई दी और सामने से दमयंती आती हुई नजर आई।
कौन हो तुम? इस पर दमयंती ने उसे कोई जवाब नहीं दिया। तभी वहां पर इशिता आ पहुंची। अरे मेघना तू यहां क्या कर रही है? इशिता तू यहां। तभी दमयंती ने इशिता को देखा। उसकी आंखें लाल लाल चमक उठी और वो इशिता पर झपकती। इशिता इशिता दमयंती की जकड़ में थी। मेघना उठ ना। क्या हुआ तुझे? मेघना नींद से जाग गई।
तू पूरी तरह पसीने से भीगी है। फिर से कुछ डरावना देखा क्या? इशिता तू ठीक है ना? हां मैं ठीक हू लेकिन तुझे क्या हुआ? मेघना ने इशिता को कसकर गले से लगा लिया। उसकी धड़कनें तेज तेज जल रही थी। इस तरफ दमयंती ने झुंझुलाते हुए अपनी आंखें खोली। या कुछ देर और उसे सपने में डरा कर रखती तो शायद उसका पता लगाने में कामयाब हो जाती। अब कैसे पता लगाऊं कहां है वो? तभी दमयंती के शरीर की त्वचा और रंग बदलने लगा। नहीं। उसने आंखें बंद करके एक मंत्र पढ़ा तो वो ठीक हो गई। कुछ देर बाद एक लड़का रोड से गुजर रहा था।
यार आज तो पार्टी में मजा ही आ गया।
अगर एक घंटा और मिल जाता ना तो निशा के साथ फूल मस्ती करने की ख्वाहिश भी पूरी हो जाती। उसी समय उसे रोड पर बीचोंबीच दमयंती खड़ी नजर आई। अरे ये कौन लड़की खड़ी है यार? उसे देखकर लड़के ने बाइक रोक दी। दमयंती ने उस समय काले भड़कीले कपड़े पहने हुए थे।
वो लड़का उसे ऊपर से नीचे तक निहार रहा था। दमयंती भी उसके जवाब में मुस्कुराई। कौन है आप? ऐसा लग रहा है जैसे स्वर्ग से अप्सरा जमीन पर उतर आई हो। यह सुनकर दमयंती उसके बेहद करीब आ गई और उसे गले से लगा लिया। ओह माय गॉड तुम तो बहुत फास्ट फॉरवर्ड हो यार। वो दमयंती की चिकनी कमर पर हाथ फेरने लगा। तभी दमयंती के नाखून लंबे हो गए। उसकी आंखें भी लाल हो गई। और अगले ही पल उस लड़के की चीख फिजा में गूंज गई। अगली सुबह बैरमपुर के द्वार पर जनकपुर के बाबा खड़े थे।
उस समय अनुज भी अपनी जीभ से गांव में घूम रहा था। जब मेघना साथ थी तो घूमने में कितना मजा आ रहा था। अब तो यह गांव खाने को आ रहा है।
तभी उसको सामने से ऋषिधर बाबा आते हुए नजर आए। अरे तांत्रिक महाराज प्रणाम प्रणाम बेटा तुम मुझे जानते हो तांत्रिक महाराज मैं अनुज हूं मुखिया जी का बेटा क्या आप मुझे भूल गए बेटा मुझे अपने पिता के पास ले चलो जी जरूर आइए बैठिए अनुज ने ऋषिधर बाबा को जीप में बैठाया और घर लेकर पहुंचा। पिताजी आपसे तांत्रिक महाराज मिलने आए हैं। उनको देखकर सभी हैरान रह गए क्योंकि तांत्रिक महाराज तो मुखिया के साथ पहले ही घर पर मौजूद थे। अरे ये क्या? दो-दो तांत्रिक महाराज यह हमारे जुड़वा भाई ऋषिधर हैं जो कि जनकपुरी में ही निवास करते हैं। लेकिन जब हम जनकपुरी गए थे तब तो यह वहां नहीं थे।
हम उस समय गांव में मौजूद नहीं थे।
कहो ऋषिधर कैसे आना हुआ? भैया बहुत बड़ी समस्या आ गई है। हमारे गांव जनकपुर में पिछले दो दिनों में दो मौतें हो गई हैं। ठीक से बताओ ऋषिधर। उन मौतों से तुम इतना क्यों डर ग�� हो? क्या वो अकाल मृत्यु है? मरने वाले का शरीर इस तरह से पीला पड़ जाता है
जैसे उनके शरीर से सारा खून चूस लिया हो। और जिस रात पहली मौत हुई उस रात गांव में बहुत तेज आंधी आई थी। फिर तो जरूर यह किसी अनहोनी का संकेत है। लेकिन तांत्रिक महाराज निशिलो तो जा चुके। अब ये मौतें किस वजह से हो रही हैं? हमें संदेह है कि आप लोगों के आगमन का इससे कोई संबंध है। गांव के लोगों ने बताया है कि जब से आप लोग जनकपुरी से महाराज का वो ताबूत ले गए हैं
तभी से वहां का माहौल बदल गया है।
हे भगवान यह तो बहुत हैरानी की बात है। तांत्रिक महाराज मुझे लगता है कि हमें एक बार उस गुफा में फिर से जाकर देखना चाहिए। हां, तुम ठीक कह रहे हो अनुज बेटा। ये सभी उसी समय जनकपुरी की गुफा में पहुंचे। और काफी अंदर जाने के बाद उन्हें एक निशान नजर आया।
यहीं से हमने उसे उठाया था। यह उसी का निशान है। अनुज ने आगे की तरफ देखा। हां महाराज। लेकिन गुफा अभी भी खत्म नहीं हुई है। आइए अंदर चलते हैं। यह सभी अब उस गुफा के अंदर और आगे बढ़े। तो काफी देर बाद उन्हें एक और ताबूत नजर आया जो कि खुला हुआ था। अरे यहां तो एक और ताबूत है। इसकी तो हमें खबर ही नहीं थी। तांत्रिक महाराज ने उस ताबूत पर अपना हाथ रखा और आंखें बंद करके कुछ मंत्र पढ़े। तभी उन्होंने एक दृश्य देखा जिसमें इस ताबूत को चार लोगों ने उठाया हुआ था।
इस ताबूत को इसी गुफा के अंदर रख देते हैं। यहां पहले से ही एक ताबूत और रखा है। यहां यह बिल्कुल सुरक्षित रहेगा। वो चारों आदमी उस ताबूत को गुफा के अंदर रखकर चले गए। और उसके अंदर पड़ी दमयंती ताबूत को अंदर से पीट रही थी। खोलो मुझे बाहर निकालो। आ मेघालय मैं तुझे छोडूंगी नहीं। इतना देखने के बाद तांत्रिक महाराज ने आंखें खोली। अनर्थ हो गया। क्या हुआ तांत्रिक महाराज? बहुत ही अजीब बात है।
जब इस गुफा में महाराज की लाश को रखवाया जा रहा था तो पहले ही दमयंती की लाश इस ताबूत के अंदर यहां मौजूद थी। और उस दिन हम सभी इस गुफा में मेघना के साथ महाराज का शरीर लेने आए तो उसके गुफा में कदम रखने की वजह से दमयंती जाग उठी। मतलब दमयंती ही है जो लोगों को मार रही है। हां और हमें यकीन है कि अब वो अपना प्रतिशोध लेने की पूरी कोशिश करेगी। हम सबकी जान और खासतौर से मेघना की जान को बहुत खतरा है।
अरे नहीं लेकिन हम इस बाबा की जानकारी मेघना को कैसे देंगे? हमें तो उसका ठिकाना भी नहीं मालूम। अनुज अब बहुत परेशान हो गया।
अरे यार अब तो समझो हमारी जॉब चली गई। ना ही वो एंडीडोट बनेगा ना ही कभी हमारा प्रमोशन होगा। मेघना को इस बात में कोई रुचि नहीं थी। बाप भी अपने उस सपने के बारे में ही सोच रही थी। रात को करीब 12:00 बजे दमयंती फिर से ध्यान मग्न होकर बैठ गई। इस तरफ मेघना ने एक अजीब दृश्य देखा। उसने देखा कि वो एक जंगल में खड़ी है और काफी दूर पर इशिता और अनुज खड़े हैं।
मेघना अरे इशिता अनुज तुम दोनों वहां क्या कर रहे हो? मेघना इधर आ जल्दी। अरे लेकिन तुम दोनों आगे क्यों नहीं बढ़ते? तभी उसने देखा कि एक बड़े से पेड़ पर दमयंती पैर लटकाए बैठी हुई है। उस पेड़ से जटाएं निकल कर आई और वो अनुज और इशिता के गले में लिपट गई।
वो दोनों कसमसाने लगे।
यह देखकर मेघना हैरान रह गई। अनुज पीछे तो मेघना उन दोनों की तरफ भागी। लेकिन तभी उन दोनों के शरीर ने हरकत करना बंद कर दिया और मेघना चीखते हुए नींद से जाग उठी। अरुण। अरे क्या हुआ तुझे? अब क्या देख लिया? तो अनुज और तेरी जान खतरे में है।
मुझे बहुत बुरे-बुरे सपने आ रहे हैं। अरे मैं एकदम मस्त हूं यार। तू बेवजह क्यों स्ट्रेस ले रही है? हम जो बीरमपुर में देख कर आए हैं वही सब तेरे दिमाग में घूम रहा है
और इसके पीछे कोई रीज़न नहीं है। नहीं इत्तेफाक नहीं हो सकता। हम लोग सुबह ही बीरमपुर जाएंगे। बस इशिता समझ गई थी कि अब उसे फिर से बीरमपुर जाना पड़ेगा। उसने आगे मेघना से कोई सवाल नहीं किया। इस तरफ जनकपुरी में एक आदमी बड़बड़ाता हुआ घर को लौट रहा था।
बेवफा मुझे सिर्फ लूटने के लिए आई थी मेरे घर पर। पहले प्यार का नाटक किया और फिर शादी उसके बाद सब कुछ लेकर अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई।
अगर मेरा बस चले तो उसे ढूंढकर जान से मार दूं। ये कहकर उसने अपने घर के दरवाजे पर लात मारकर उसे खोल दिया। और फिर अंदर जाकर एक गिलास पानी पिया। सामने दीवार पर उसकी बीवी की तस्वीर लगी थी। मंगला तू बस एक बार मुझे मिल जा। सिर्फ एक बार।
ये कहकर उसने गिलास को इस जमीन पर दे मारा और अपने कमरे में पहुंचा। उसने जैसे ही दरवाजा बंद किया तो उसे बिस्तर पर एक लड़की लेटी नजर आई।
अरे कौन है ये? कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा। तभी उस लड़की ने उसकी तरफ करवट ली तो वह दमयंती ही थी। दमयंती का आकर्षण देखकर उस आदमी की आंखों में वासना उभर आई। ये सब सच है प्रिय। कौन हो तुम? मैं कौन हूं? यह तो तुमको दिख ही रहा होगा। एक खूबसूरत जवान लड़की। आओ मेरे पास। आओ ना। यह सुनकर उस आदमी से खुद पर काबू नहीं हुआ।
और वो झट से दमयंती के पास पहुंचा। दमयंती ने उसे कसकर खुद से चिपटा लिया और तभी उस आदमी की चीख घर के बाहर तक गूंज गई।
अगले ही पल उसकी लाश पूरी तरह से पीली पड़ चुकी थी। अगली सुबह इशिता और मेघना दोनों फिर से बैरमपुर के लिए निकल गए। मेघना तू वहां जाकर ठीक तो कर रही है ना। कहीं पिछली बार की तरह हम कोई बड़ी मुसीबत में ना फंस जाए। मुझे वहां जाना ही पड़ेगा।
तू और अनुज दोनों मेरे दोस्त हो। अगर तुम दोनों को कुछ हो गया तो मैं भी जिंदा नहीं रह पाऊंगी। मेघना की बातें इशिता के सर के ऊपर से जा रही थी। शाम होने पर मेघना ने बीरमपुर के मुख्य द्वार में कदम रखा। इस तरफ गुफा में बैठी दम्यंती जोर-जोर से हंसने लगी।
आ गई वो राजकुमारी मेघालय। बेरमपुर लौट आई। मेरी चाल कामयाब हुई। दमयंती फिर से वापस कैसी लौटी यह तो हमने जान लिया लेकिन अब वो आगे क्या करने वाली है?
यह इस कहानी का आखिरी भयानक मोड़ है या एक नए अध्याय की शुरुआत यह जानने के लिए बने रहिए दाबूद कहानी के अगले भाग में,
और भी ऐसी New Hindi Horror Story पड़ने के लिए हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर बने रहे और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा सेयर करे धन्यवाद।

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