शेतान Horror Story | Hindi Horror Stories | New Horror Story 2026

एक बार कि बात है अप्रैल का महीना था।

और रात के समय सभी गांव वाले अपनेपने घरों में बैठे थे। लेकिन कोई था जिसकी चहलकदमी जंगल में अभी भी जारी थी। रमेश जो कि पिछले महीने ही शहर से आया था। अपने हाथ में मोबाइल की फ्लैश ऑन किए आगे बढ़ रहा था।

शेतान Horror Story | Hindi Horror Stories | New Horror Story 2026

शेतान Horror Story | Hindi Horror Stories | New Horror Story 2026

में :- और भला किसी पुरानी गुफा में लिखी पुरानी बातों को पढ़ने से किसी की मौत कैसे हो सकती है? यह गांव के लोग भी ना कुछ भी कहानी गढ़ देते हैं और आज तो मैं पढ़कर ही रहूंगा। उस गुफा के अंदर क्या लिखा है

जो गांव के लोगों ने इतनी दहशत फैला रखी है।

और कुछ कदम चलने के बाद गुफा उसके सामने थी। वो बिना कदमों को रोके गुफा के अंदर चला गया। गुफा तो नॉर्मल ही लग रही है। वो बड़ी आराम से इधर-उधर देखता हुआ आगे बढ़ रहा था।

कुछ देर चलने के बाद उसे गुफा की दीवारों पर कुछ अजीब सी आकृतियां नजर आई और उनमें से कई आकृतियां बहुत ही भयानक थी।

अब उसे यह थोड़ा अजीब लग रहा था। तभी उसने एक दीवार पर कुछ लिखा हुआ देखा। जो कि संस्कृत भाषा में लिखा था। अरे बाप रे यह तो कोई बड़ी गाथा लगती है भाई। ऊपर से लेकर नीचे तक की दीवार लिखाई से भरी है। उसने दीवार पर लिखी बातों को पढ़ना शुरू किया और धीरे-धीरे उसकी आंखें बड़ी होती चली गई। जब वो दीवार की आखिरी लाइंस पर पहुंचा तो अचानक से उसके चेहरे के रंग उड़ गए। उसकी आंखें ख्वाब से बड़ी हो गई।

उसकी सांसे तेज-तेज चलने लगी।

हे भगवान ये मैंने क्या कर दिया? वो उसी समय वहां से भाग निकला और गांव की तरफ रवाना हुआ। कुछ ही देर में वो गांव पहुंच गया। और सीधा अपने घर में आकर रुका। हे भगवान मेरी रक्षा करना। वो बेड पर पहुंचा और चादर में घुस गया।

उसे बहुत तेज बुखार भी आ गया था। शरीर में अजीब सी कपकपी बंधी थी। तभी मूझे उसके दरवाजे के खुलने की आवाज आई। और मैं डर गया और उसने अपने चेहरे से हल्की सी चादर हटाई तो उसके सामने एक बहुत ही भयानक असुर खड़ा हुआ था। उसे देखकर उसकी आंखों में खौफ उतर आया। और मैं कराहने लगा और फिर सुबह होने पर मेरा दूध या दूध देने के लिए आया।

दूध वाला :- अरे रमेश बाबू दूध ले लीजिए। कहां छिपे बैठे हैं?

और फिर दूधिया ने देखा कि रमेश की लाश जमीन पर पड़ी है। उसकी आंखें खुली थी जिनमें छाया ख्वाब देखकर यह समझ आ रहा था कि उसने मरने से पहले कोई बहुत भयानक चीज देखी है। कुछ दिन बाद गांव में एक टांगा आया।

उसके अंदर से मनोज नाम का एक आदमी उतरा। टांगे वाले ने उसके दो बड़े-बड़े बैग भी टांगे से उतारे।

मनोज :- शुक्रिया भाई।

और तभी मुखिया भी अपने एक आदमी के साथ वहां आया।

मुखिया :- अरे अरे मास्टर साहब आप क्यों यह संदूक उठा रहे हैं? यह काम करने के लिए तो हमारे आदमी है ना।

मनोज मास्टर :- मुखिया जी नमस्ते। लगता है आपने मुझे पहचान लिया।

मुखिया :- हां हां मेरी बाबू से बात हुई थी।

हम इस बात से बहुत खुश हैं कि आप हमारे गांव के अशिक्षित लोगों को शिक्षा देने के इरादे से आए हैं।

मनोज मास्टर :- मुखिया जी मुझे एक घर रहने के लिए मिला है।

क्या आप मुझे वहां तक छुड़वा देंगे?

मुखिया :- हां हां मैं ही आपको छोड़ने चलता हूं।

और मनोज मुखिया की गाड़ी में बैठा और गाड़ी आगे बढ़ने लगी। वैसे वो घर बसावट से काफी दूर है। कुछ देर की यात्रा के बाद ये उस एक घर पर पहुंचे। एक पुराना सा घर। उसके ठीक पीछे ही नदी बह रही थी

और आसपास जंगल था।

मनोज मास्टर :- अरे वाह! यह तो काफी अच्छा है। मुझे ऐसा ही घर चाहिए था।

और फिर मुखिया के आदमी ने उसके दोनों बैग घर के अंदर रख दिए। और बोला मास्टर साहब आपकी पाठशाला की सफाई का काम आज पूरा हो जाएगा। आप कल से पाठशाला शुरू कर सकते हैं।

मनोज मास्टर :- बहुत शुक्रिया मुखिया जी।

और मुखिया उसे छोड़कर वहां से चला गया। मनोज ने अपने बैग्स को कमरों में रख दिया। रात हो चली थी और उसे काफी ठंड लग रही थी।

मनोज मास्टर :- हे भगवान यहां इतनी ठंड क्यों लग रही है?

और फिर उसने दूसरे कमरे में जाकर देखा। तो वहां अंगीठी और कुछ लकड़ियां रखी थी। अरे यह लकड़ियां तो बहुत बड़ी हैं। इनको बिना काटे तो अंगीठी में डाला ही नहीं जा सकता। उसने सभी कमरों में देखा। लेकिन उसे वहां कुल्हाड़ी नहीं मिली।

मनोज मास्टर :- चलो बाहर जाकर देखता हूं। हो सकता है जंगल में छोटी लकड़ियां मिल जाए। बिना काटे यह तो अंगीठी में नहीं आने वाली।

और वह घर से बाहर निकला। मौसम काफी ठंड था। उसने देखा कि नदी की तरफ कुछ छोटे पेड़ भी हैं।

मनोज मास्टर :- हम उन पेड़ों से छोटी लकड़ियों का इंतजाम हो सकता है।

और वो नदी के ही तरफ रवाना हुआ। सामने से आती लहरों का नजारा उसे बहुत मनमोहक लग रहा था। वो लकड़ियो को भूल गया और नदी के किनारे की तरफ उसके कदम चल पड़े। एक लहर आई और उसने आंखें बंद कर उसको महसूस किया। उसके घुटनों तक पानी आया और लहर वापस जाते हुए पानी वो वापस ले गई। वाह कितना खूबसूरत मंजर है

ये। आह तभी उसे उसके पैर के पास कुछ महसूस हुआ। उसने देखा कि मिट्टी में कुछ है। उसने मिट्टी हटाकर देखी तो वो हैरान रह गया। उसके पैरों में एक कुल्हाड़ी पड़ी थी।

मनोज मास्टर :- अरे भाई ये क्या? कुल्हाड़ी। हां। यहां तो आसपास कोई है भी नहीं। फिर किसने मेरी इतनी फिक्र की?

और उसके चेहरे पर मुस्कान झलक आई।

मनोज मास्टर :- हम मुझे इसी की जरूरत थी। भगवान ने समुद्र के जरिए मदद की है। थैंक यू गॉड।

और उसने कुल्हाड़ी उठाई और वापस घर में पहुंचा। कुल्हाड़ी की मदद से उसने लकड़ियां काटी। और फिर अंगीठी में डालकर आग लगाई। और वाह गहरी सांस लेने लगा

मनोज मास्टर :- अब थोड़ी राहत मिली।

और उसने अंगीठी पलंग के पास रखी और फिर सुकून की नींद सो गया। अगली सुबह मनोज अपने पाठशाला में पहुंचा। पहले दिन से ही वहां गांव के कई लोग शिक्षा लेने पहुंचे।

छात्र :- मास्टर जी ये नटोरे का क्या मतलब होता है?

यह सुनकर मनोज मुस्कुराया। हंसी पड़े

मनोज मास्टर :- अरे चाचा जी वो नटूरे नहीं नेचर है। नेचर नेचर

और सभी फिर से यह सुनकर हंस पड़े।

और गांव के लोगों को पढ़ाना काफी मुश्किल का काम था। लेकिन मनोज को यह करने में बहुत गर्व महसूस हो रहा था। दोपहर होने पर मनोज पाठशाला को ताला लगाया और फिर मुखिया उसे गांव घुमाने जगह-जगह ले गया शाम होने पर सभी आग के सामने बैठकर बातें करने लगे हैं।

मनोज मास्टर :- मुखिया जी जब से यहां आया हूं गांव की गुफा के बारे में कुछ ना कुछ अलग बात सुनी है। उस गुफा की असली कहानी क्या है?

मुखिया :- अरे वो गुफा बहुत ही विचित्र है। गुफा के अंदर जाना तो साधारण बात है। लेकिन उसके अंदर दीवारों पर संस्कृत भाषा में बहुत लंबी-लंबी बातें लिखी हैं। अब वो कोई कहानी है या कुछ और है यह नहीं पता। लेकिन जिसने भी उन दीवारों पर लिखी पंक्तियों को पढ़ा है,

उसकी रहस्यमई तरह से 3 दिन के अंदर मौत हो जाती है।

मनोज मास्टर :- हे भगवान, यह तो बहुत अजीब बात है मुखिया जी। शुक्र है मुझे संस्कृत पढ़ना नहीं आता।

और मनोज को इस बात पर भरोसा नहीं था।

क्योंकि वो एक पढ़ा लिखा व्यक्ति था। अब चलिए मुखिया जी अब आपसे कल मिलता हूं। वो फिर अपने घर पहुंच गया। लेकिन बिरजू अभी भी गुफा के बारे में ही सोच रहा था। उसके कदम उसे ऊसफा के पास खींच ले गए।

मनोज मास्टर :- मैंने झूठ बोला था कि मुझे संस्कृत नहीं आती। अब तो मेरी उन पंक्तियों को पढ़ने की जिज्ञासा और बढ़ गई है भला दीवारों पर लिखी बातों को पढ़ने से कोई मर सकता है? [हंसी] वो गुफा के अंदर चला गया। कमाल है। जितनी अंदर जा रहा हूं रोशनी उतनी ही बढ़ती जा रही है।

लेकिन समझ नहीं आ रहा रोशनी आ कहां से रही है।

और वो एक दीवार के सामने जाकर रुका और उस पर लिखी संस्कृत की लाइन पढ़ने लगा। भारत 1026वीं ईस्वी में रतनगढ़ के राजा अमर सिंह का राज था। उनके राज्य में प्रजा बहुत खुश थे और उनका तेज दूर-दूर तक फैला था लेकिन एक दिन अचानक उसने काफी देर तक दीवार पर लिखी कहानी को पढ़ा और नीचे आते-आते उसके चेहरे की रंगत उड़ गई। सर्दी में भी उसके माथे पर पसीने आ गए थे।

तभी उसे एक भयानक हंसी सुनाई दी। ओ हो हो हो उसकी हालत खराब हो गई और वो जल्दी से गुफा से बाहर भागा। वो गांव की तरफ निकल गया और कुएं पर जाकर रुका। और गहरी सांस लेने लगा और साथ हि हांफने लगा और श वो लंबी-लंबी सांसे लेने लगा। उसे बहुत प्यास भी लगी थी। पानी उसने कुएं में बाल्टी डाली और ऊपर खींची।

और उसके बाद उसने पीने के लिए जैसे ही चुल्लू में पानी लिया वो पानी एकदम लाल हो गया और उसमें से बदबू आने लगी। उसने चुल्लू का पानी फेंक दिया

और बाल्टी पर नजर मारी तो उसके अंदर साफ पानी ही था। वह जल्दी से वहां से अपने घर की तरफ भागा।

मुखिया :- अरे क्या हुआ आपको? इतना हाफ क्यों रहे हैं? कुछ नहीं खाना लगाओ। उसने अपने डर को छिपाना चाहा लेकिन इसमें वो नाकाम हो रहा था। खाइए ना। थाली आपके सामने है।

और उसने एक रोटी तोड़ी और जैसे ही मुंह में रखी तो उसे बहुत ही अजीब सा स्वाद आया। चुप। और उसने रोटी वापस उगल दी। उसने देखा कि थाली में सब्जी की जगह कीड़े रेंग रहे हैं। अरे क्या हुआ आपको? जब बििया ने देखा तो प्लेट में खाना ही था। वो कीड़े सिर्फ बिरजू को ही नजर आए थे। कुछ नहीं वो मैं मुझे भूख नहीं है। वो बिस्तर में गया और बुरी तरह से कांपने लगा। उसकी बीवी बिया को उसकी बहुत चिंता होने लगी। अगले दिन सुबह 7:00 बजे मनोज की आंख खुली। उसने उठते ही खिड़की से नदी का नजारा देखा। वाह कितना खूबसूरत नजारा है।

ठीक 8:00 बजे वो पाठशाला पहुंचा और पढ़ाने का काम शुरू किया और शाम होने तक वो मुखिया के साथ ही रहा। उस समय बिरजू भी काम से अपने घर को लौट रहा था। तभी उसे अपने पीछे से अचानक भारी कदमों की आवाज सुनाई दी।

उसने डरते हुए पीछे मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। उसने फिर से चलना शुरू किया। वो फिर से कदमों की आवाजें उसे सुनाई देने लगी।

लेकिन अब उसने रुकना ठीक नहीं समझा और अपने घर पहुंचा। बिंदिया, बि्या घर के अंदर नहीं थी। बिरजू ने मटके से लेकर पानी पिया। तभी उसे वही भारी कदमों और हंसने की आवाज सुनाई देने लगी। हंसी की आवाज और उसने देखा कि यह आवाज उसे स्नान गृह से आ रही थी। वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। बंधिया क्या तुम हो? तभी दरवाजा हल्के से खुला और एक भयानक हाथ दरवाजे पर आया। उसे देखकर वो डर गया। और उसने अपने कदमों को पीछे लिया। तभी घर की सारी लाइट बंद हो गई और उसे अंधेरे में दो लाल चमकती आंखें दिखाई दी।

उसकी चीख सुनकर आसपास मौजूद सभी लोग उसके घर की तरफ भागे। बिंदिया भी पड़ोस के ही घर में थी। वो भी वहां से निकल कर भागी। वहां जाने पर बिरजू की लाश पड़ी मिली। उसकी गर्दन पूरी पीछे तक घूमी हुई थी। मनोज भी बिरजू की लाश देखते हुए बहुत हैरान था। जरूर यह गुफा के अंदर ही गया होगा। लेकिन इसने तो कहा था कि इसे संस्कृत पढ़ना नहीं आता। मनोज को यही लग रहा था कि उसका किसी ने खून किया है

और गुफा वाली बात के सिर्फ आड़ ली जा रही है। कुछ देर बाद मनोज वापस अपने घर पहुंचा। आज तो चाय पहले ही पी लेता हूं। बहुत थकान हो रही है और चाय बनाने के लिए किचन में गया। तो पतीला खाली था। अरे यार दूध वाला तो सुबह आएगा। अब चाय कहां से पऊंगा? तभी उसने किचन के खिड़की से देखा कि नदी के किनारे एक गाय खड़ी है।

मनोज मास्टर :- ओह माय गॉड। वो घर से बाहर नदी किनारे पहुंचा तो गाय अभी भी वहां खड़ी थी कल रात जब मुझे कुल्हाड़ी की जरूरत थी तो कुल्हाड़ी नदी के किनारे आ गई और जब अब मुझे दूध की जरूरत थी तो गाय आ गई। यह क्या हो रहा है?

उसके मन में असमंजस ने जन्म ले लिया था कि नदी किनारे उसे कौन मदद भेज रहा है। और दूसरी बात यह थी कि गुफा के बारे में गांव के लोग जो फैला रहे हैं क्या वो सच है। ना जाने क्यों वो उसी समय गुफा की तरफ निकल गया। गुफा के अंदर पहुंचकर उसने दीवार पर लिखी बातों को पढ़ना शुरू किया। क्योंकि उसको संस्कृत आती थी।

भारत 1026वीं ईसवी में रतनगढ़ में राजा अमर सिंह का राज था। उनके राज्य में प्रजा बहुत खुश थी और उनका तेज दूर-दूर तक फैला था। लेकिन एक दिन अचानक महाराज बहुत बुरी खबर है। राज्य में हाहाकार मचा हुआ है। आम जन की मृत्यु हो रही है। लोगों का कहना है कि रात के समय कोई दानव आता है। उनकी जान लेकर चला जाता है। उसे देखने वाले कुछ ही लोग जिंदा है। और अब तक उसने कई लोगों की जाने ली है।

अगर वह कोई दानव है तो शीघ्र ही तांत्रिक तारानाथ को बुलाया जाए। अब वही है जो हमें उस दानव से युद्ध करने का तरीका बता सकते हैं।

तांत्रिक तारानाथ को बुलाया गया।

तांत्रिक तारानाथ :- महाराजा कोई भी दानव भला क्यों हमारे ही राज्य में आकर हाहाकार मचाएगा। हमें नहीं लगता कि यह कोई आम दानव है।

मंत्री :- महाराज उस दानव ने जहां आखिरी हमला किया था वहां से हमें कुछ मिला है।

महाराजा :- क्या मिला है? उसे सामने लाइए मंत्री जी।

और मंत्री ने ताली बजाई और एक दरबार एक थाली लेकर आया। मंत्री ने उस थाली से कपड़ा हटाया तो उसके अंदर कोई नुकीली चीज थी। उसे देखते ही तारानाथ के माथे पर लकीरें उभर आई।

महाराजा :- क्या हुआ बाबा?

फिर तारानाथ ने अपने झोले से कुछ चावल निकाले और उन पर कोई मंत्र पढ़कर उस नुकीली चीज पर डाले। उसके संपर्क में आते ही चावल जलकर राख हो गए। हे

तांत्रिक तारानाथ :- भगवान महाराज वो कोई दानव नहीं बल्कि असुर है। यह उसी असुर का नाखून है।

असुर आपके पड़ोसी दुश्मन राज्य ने हमारे राज्य को खत्म करने के लिए इस असुर को आवाहन करके यहां भेजा है।

महाराजा :- तांत्रिक तारानाथ अब हम इस असुर को कैसे वध कर सकते हैं?

तांत्रिक तारानाथ :- यह कोई आम दानव नहीं असुर है महाराज। हमारी मृत्यु ही इस असुर का अंत है। 

और यह सुनकर सभी हैरान रह गए। हमें एक महायज्ञ करना होगा और अपने शरीर को त्याग करना होगा। हमारी हड्डियों के बने वज्र से ही उसकी मृत्यु संभव है।

महाराजा :- बाबा क्या और रास्ता नहीं है?

तांत्रिक तारानाथ :- नहीं महाराज। हमें हमारी मृत्यु का कोई दुख नहीं है। आपकी रक्षा करते हुए हमारी मृत्यु हो जाए तो इससे अच्छी मृत्यु और क्या होगी?

और फिर तारानाथ एक गुफा में जाकर यज्ञ में बैठे और दो दिनों के बाद जब महाराज अमर वहां पहुंचे तो वहां तारानाथ नहीं थे। उनकी हड्डियों का एक वज्र रखा हुआ था।

महाराजा :- आपका बलिदान सदैव अमर रहेगा।

और अगले दिन राज्य पर दुश्मन राज्य के राजा रुद्र सिंह ने हमला किया। अमर सिंह अपनी सेना के साथ पूरे जोश और होश से उनका मुकाबला कर रहे थे। अमर सिंह अब तेरी मौत तय है। अब मैं तुझे मारने के लिए असुर का आवाहन करता हूं। उसने आंखें बंद की और असुर का आवाहन किया। तभी वहां एक भयानक असुर आ पहुंचा।

उसे देखकर सभी खौफ में आ गए थे। लेकिन राजा अमर सिंह ने ताराना की हड्डियों का बना वज्र निकाला। जिसे देखकर असुर के चेहरे की हंसी उड़ गई।

दानव :- ये क्या? उस तारानाथ ने अपने शरीर का त्याग दे दिया।

दूसमन राजा :- क्या हुआ तुझे? तू ऐसे क्यों डर रहा है?

दानव :- ताराना की हड्डियों का भला वज्र। इससे तो मेरा अंत हो जाएगा। अब मैं इस युद्ध में तुम्हारा साथ नहीं दे सकता। नहीं।

दूसमन राजा :- अरे मैंने तुझे असुर लोक से बुलाया है तू मेरी मर्जी के बगैर वापस नहीं जा सकता।

दानव :- हां, नहीं जा सकता। लेकिन मैं अगले 1000 साल के लिए खुद को एक गुफा में बंधित कर सकता हूं। जहां ये वजह नहीं जा सकता और ये कहकर असुर वहां से भाग गया।

अमर सिंह ने उसी समय रुद्र को खत्म करके अपने राज्य को बचा लिया। इतना पढ़कर मनोज रुक गया। अरे आगे की कथा कहां लिखी है?

वो थोड़ा और आगे गया तो उसको अगली दीवार पर आगे की कथा लिखी मिली। असुर ने इस गुफा के अंदर खुद को बंधित कर दिया। राजा अमर सिंह अब अगले 1000 साल तक उस गुफा के अंदर नहीं जा सकते थे। मतलब पूरे जीवन काल में कभी भी नहीं। इसीलिए उन्होंने आज्ञा देकर यह सारी कथा इस गुफा के अंदर लिखवा दी। लेकिन गुफा से बाहर आते ही लिखने वाले मर गए।

उस समय के ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की कि इस गुफा के अंदर जो भी जाएगा और वो यह कहानी पढ़ेगा तो असुर उसे मार देगा। जब कई सालों बाद महाराज अमर सिंह फिर से जन्म लेकर इस गुफा के अंदर जाएंगे तो उन्हें यह कथा पता चलेगी और उनके कदम पड़ते ही अगली रात में ही असुर गुफा से आजाद हो जाएगा और राज्य में हाहाकार मचा देगा। उस समय महाराज अमर सिंह को यह वज्र ढूंढकर उसे खत्म करना होगा।

इतना पढ़कर मनोज हैरान रह गया। अब उसे भी डर लगने लगा था। तभी उसे एक भयानक आवाज सुनाई दी। कराहने की आवाज़ और यह आवाज सुनकर मनोज बुरी तरह से डर गया और वहां से भाग निकला। उसे अपने पीछे किसी के आने का अंदेशा हो रहा था। वो बिना पीछे देखे भागता रहा और सीधा अपने घर आकर उसने सांस ली। [हांफने की आवाज़] हे भगवान मेरी रक्षा करना। [गहरी सांस लेने की आवाज़] मनोज बहुत डरा हुआ था।

अब वो उस नदी के बारे में सोचना भी भूल गया था। उसी रात गांव का एक लड़का रौनक छत पर सो रहा था। तभी उसे भयानक सांसों की आवाज आने लगी। [गहरी सांस लेने की आवाज़][हांफने की आवाज़] उसने उठकर जैसे ही देखा तो उसके सामने एक बहुत ही भयानक असुर खड़ा हुआ था। और मनोज की चीखने की आवाज़ असुर की पकड़ से वो खुद को छुड़ा ना सका। अगले पल चारों ओर सन्नाटा छा गया। सुबह होते ही गांव में उसके ना रहने की खबर फैल गई।

और माहौल शोकमय हो गया।

यह रौनक कैसे मारा गया? यह तो गुफा के अंदर गया भी नहीं था। मुखिया जी यह तो बहुत बुरा हुआ। गुफा में तो मैं गया था। फिर यह क्यों मारा गया? धीरे-धीरे तीन दिन गुजर गए। असुर ने इन दिनों में कई नौजवान लड़कों को गायब कर दिया। अब मुझे कोई नहीं मार सकता। मैं आजाद हो चुका हूं। हो [हंसी] गांव में एक सभा बैठाई गई।

पहले तो सिर्फ गुफा में जाने वाला इंसान ही मारा जाता था। लेकिन अब तो बिना गुफा में जाए जो भी लड़का 18 वर्ष हो रहा है उसी का अंत हो रहा है। इसे कैसे रोके मुखिया जी? मनोज मन ही मन अपने बारे में सोच रहा था। मैं गुफा में गया था।

मुझे तो कुछ भी नजर नहीं आया। ना ही मेरे साथ कुछ हो रहा है। तीन दिन के बाद भी मैं जिंदा कैसे हूं? मनोज घर पर आया और इसी सोच में डूब गया कि उसकी जगह गांव के लोग क्यों मारे जा रहे हैं। तभी उसकी नजर नदी पर पड़ी।

वो बिना कुछ सोचे नदी किनारे गया। तुमने मेरी दो बार मदद की है। अगर यह कोई इत्तेफाक नहीं है तो मेरी मदद करो। मुझे बताओ कि तुम कौन हो और क्या ताल्लुक है मेरा इस नदी से और गांव में हो रहे खूनों से। तभी उसने देखा कि लहरों के साथ कुछ उसके करीब आ रहा है। वो उसे देखता रहा और पास आने पर पता चला कि वो एक बोट थी जिसमें कोई नहीं था। ये क्या? इसमें तो कोई है ही नहीं। फिर ये यहां कैसे पहुंची?

मनोज ने उस बोट में बैठ गया। उसके बाद वो अपने आप रवाना हो गई। मनोज को डर भी लग रहा था और हैरानी भी हो रही थी।

कहीं उसकी मौत को अलग तरह से तय तो नहीं किया गया। वो बोट एक किनारे पर जा लगी। जहां सामने ही एक पुराना किला नजर आ रहा था। एक किला इस टापू पर मनोज बोट से उतर किले के अंदर गया। वहां दीवारों पर मशाले जली हुई थी।

आ जाइए महाराज। यह सुनकर मनोज ने सामने देखा तो उसे वही तांत्रिक तारानाथ नजर आया। कौन हो तुम? मुझे महाराज क्यों कह रहे हो? मैं तांत्रिक तारानाथ। इस जन्म में आप भले ही मनोज है लेकिन पिछले जन्म में आप हमारे महाराज अमर सिंह थे। यह सुनकर मनोज हैरान रह गया। तुम अगर तारानाथ हो तो तुम तो मर गए थे। आपके सामने मेरी आत्मा है महाराज। इसका मतलब है कि मैं ही राजा अमर सिंह हूं।

इसीलिए मेरी मौत नहीं हुई। जी महाराज जैसा कि आने पढ़ लिया होगा कि आपके कदम गुफा में पड़ने के बाद असुर गुफा से आजाद हो जाएगा तो वो आजाद हो चुका है। हे भगवान मतलब जितने भी गांव के लोग मारे जा रहे हैं

उनका जिम्मेदार मैं हूं। ऐसा ना सोचे महाराज आप बस उस असुर का अंत कर दें। वो खासकर 18 वर्ष के नौजवानों को इसलिए मार रहा है कि अगर उसने 21 नौजवानों को मार दिया तो फिर वो मेरी हड्डियों के बने वज्र से भी नहीं मारा जाएगा। उसकी शक्ति बढ़ जाएगी। मेरी हड्डियों के बने वज्र को इस्तेमाल करने का समय आ गया है।

कहां है वो वज्र? आपको डर था कि आपके दुश्मन उस वज्र को ढूंढकर खत्म ना कर दें। इसीलिए आपने उसे इस किले के तहखाने में रखवा दिया था और मेरी आत्मा उसकी देखभाल कर रही थी। मैं आपको बुलाने के लिए ही आपकी मदद कर रहा था कि आप एक दिन मन में सवाल लिए जरूर यहां आएंगे और अपने कर्तव्य के बारे में जानेंगे। यह सुनकर मनोज ने आगे कुछ नहीं कहा। तारानाथ की आत्मा के साथ वो तहखाने में पहुंचा।

जहां रखा हुआ वज्र चमक रहा था। अगली रात गांव के लोगों में डर का माहौल था। रविशंकर के बेटे मोहित का जन्मदिन था। लेकिन खुशी मनाने की जगह सभी खौफ में थे। रविशंकर और उसकी पत्नी मोहित के पास ही बैठे थे। मां बाबूजी आप इस तरह क्यों मेरे सर पर बैठे हैं? मुझे मेरा जन्मदिन मनाना है।

अरे बेटा तुम्हारी जान खतरे में है। हम तुमको अकेला नहीं छोड़ सकते। हां। वहीं कुछ लोग घर के बाहर भी टहल रहे थे। मोहित रविशंकर का इकलौता बेटा है। उसकी मौत नहीं होनी चाहिए। हमें उसे हर हाल में बचाना है। हां मुखिया जी। तभी इन सभी को भारी कदमों की आवाज सुनाई देने लगी। इन सभी ने पहली बार असुर को आते देखा। इनकी आंखें खौफ से फट पड़ी और दिल बुरी तरह दहल गया। तुम लोग मुझे नहीं रोक सकते। वो रविशंकर के घर की तरफ बढ़ा। तभी कुछ गांव वाले उसकी तरफ भागे। उसने अपने एक ही हाथ से उनको ऐसा धकेला कि वो दूर जा गिरे। और फिर उसने रविशंकर के घर का दरवाजा तोड़ दिया।

उसे देखकर रविशंकर और उसकी पत्नी डर गए और मोहित का दिल दहल उठा। [हांफने की आवाज़] असुर ने आगे बढ़कर मोहित को अपने कंधे पर उठा लिया। तुझे तो मैं गुफा में ले जाकर आराम से खाऊंगा। वो मोहित को लेकर घर से निकला। तभी उसके सामने मनोज आ गया। छोड़ दे इसको असुर। छोड़ ओ [कराहने की आवाज़] तो तू मुझे रोकेगा। [हंसी] उसने मनोज को धक्का देना चाहा। लेकिन उसे छूते ही असुर को एक झटका सा लगा। [कराहने की आवाज़] मोहित उसके हाथ से छूट गया। और उसके माता-पिता ने उसे खुद से चिमटा लिया। यह कैसे हो सकता है? मैं तो तुझे मच्छर की तरह मसलने की शक्ति रखता हूं।

तभी मनोज ने अपने पीछे छिपाया हुआ वज्र निकाला। जिसे देखकर असुर है रह गया। मैं कोई आम इंसान नहीं। राजा अमर सिंह तेरी मौत।

यह सुनकर असुर के चेहरे पर ख्वाब उतर आया। वो वहां से भागने लगा। तभी मनोज ने आगे बढ़कर उसकी सीने में मुझे घंट दिया। और असुर की कराहने की आवाज़ आने लगी और असुर बुरी तरह से अहंकार बनने लगा। सभी गांव के लोग वहां इकट्ठे हो गए।

आ एक ते चीख के साथ वो खत्म हो गया और राख बनकर ढेर हो गया। मास्टर साहब आप ही हमारे पूर्व काल महाराज थे। जी वो तो पिछले जन्म की बात है। मैं अब सिर्फ आपका मास्टर साहब ही हूं।

मोहित के माता-पिता ने मनोज का धन्यवाद किया और सभी ने उसकी हिम्मत की सराहना की। मनोज को अब बहुत अच्छा लग रहा था

क्योंकि उसने गुफा के खौफ को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था और असुर के साथ बुराई का वध कर दिया था।

Author Note... तो दोस्तो यह थी मेरी सच्ची भूतिया घटना जो मेरे साथ हरियाणा में घटी थी  और यह कहानी बिल्कुल 100% सच्ची है और एसी छोटी मोटी घटनाएं होती रहती है जिन्हें हम इग्नोर कर देते और सिदे मोती के मू मे चले जाते हैं और अक्सर देखा जाता है कि कोई भूत प्रेत या कोई आत्मा के हम बहुत करीब होते हैं और हम उनसे बात तक करते हैं पर हमे पता तक नही लगता है।

Your experience...

1, कहानी में आपको कौन सा हिस्सा सबसे अच्छा लगा – पुनर्जन्म वाला या असुर का वध?,

2, क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई डरावनी घटना हुई है जिसमें कोई अजनबी मदद या खतरा आया हो?,

3, क्या आपको कभी कोई पुरानी गुफा या सुनसान जगह में अजीब एहसास हुआ है?,

4, इस कहानी में सबसे डरावना सीन कौन सा लगा गुफा वाली पढ़ाई, असुर का आना या आखिरी लड़ाई?,

5, आपको यह “शेतान” वाली भूतिया कहानी पढ़कर कैसा लगा?,

6, बचपन में आपके दादा-दादी या किसी ने आपको असुर, राजा या गुफा की कहानियाँ सुनाई थीं?,

7, क्या इस कहानी को पढ़कर आपको रात को अकेले रहते हुए डर लगता है?,

8, क्या आपको ऐसी गुफा-असुर वाली डरावनी कहानियाँ पढ़ना पसंद है?,

9, क्या आपका कभी आत्मा या कोई अलौकिक शक्ति से सामना हुआ है?,

10, क्या आप भूत-प्रेत, असुर और पुनर्जन्म जैसी चीज़ों में यकीन करते हैं?,

Your Advice...

1, अब आगे कोनसी कहानी आनी चाहिए,

2, क्या ईस कहानी से आगे भूतों कि कहानी आनी चाहिए,

3, क्या ईस कहानी से आगे अब प्रेत कि कहानीया आनी चाहिए,

4, क्या ईस कहानी से आगे पिसाच कि कहानी आनी चाहिए,

5, क्या ईस कहानी से आगे अब डायन कि कहानी आनी चाहिए,

6, क्या ईस कहानी से आगे अब चुड़ैल कि कहानी आनी चाहिए,

7, क्या ईस कहानी से आगे छलावा कि कहानी आनी चाहिए,

8, क्या ईस कहानी से आगे अब कर्ण पिशाचनी कि कहानी आनी चाहिए,

9, क्या ईस कहानी से आगे और भी डरावनी कहानी आनी चाहिए,

10, क्या ईस कहानी से आगे भ्रम राक्षस कि कहानी आनी चाहिए हमें कोमेंट मे बताये,

तो ये थी दोस्तो मेरी सच्ची डरावनी और दिल दहला देने वाली भूतिया कहानी और आप सबको मेरी ये भूतिया कहानी केसी लगी कोमेंट में जरुर बताएं और अगर आपको इसी तरह कि भूत प्रेत या आत्मा डाय चुड़ैल कि डरावनी भूतिया कहानी पढ़ना पसंद है तो आप सभ बने रहे हमारी वेबसाइट Www.ScaryPanchal.Com पर,

Post a Comment

0 Comments