TABOOT 1 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

TABOOT 1 Horror Story | Hindi Horror Stories | Scary Panchal

बेरमपुर मध्य प्रदेश की वादियों में बसा एक खूबसूरत गांव। लेकिन इस गांव में छिपे थे कुछ ऐसे भयानक रहस्य जिन्होंने उस सदी में निवास करने वाले साहसी लोगों के दिल में भी एक खौफ पैदा कर रखा था।

कहानी शुरू होती है 


विरेंद्र शहर में रहता था और अब वह अपने गांव पहुंच चुका है और साम को अपने घर से बहार निकल कर कहता है कि और आज तो बहुत दिनों के बाद मित्रों से मिलना हो रहा है।

बहुत आनंद आएगा।

फिर उसके पिताजी उसे रोकते हैं और कहते हैं - अरे विरेंद्र कहां जा रहा है इस समय।

विरेंद्र - पिताजी मेरे मित्रों से इतने दिनों बाद मिलना हो रहा है। वो सुबह होने पर वापस नगर चले जाएंगे।

विरेंद्र के पिता - अरे तुझे पता नहीं क्या? आज शनिवार की रात है। आज के दिन निशिलो गांव में घूमते हैं।

विरेंद्र - पिताजी चाहे निशिर मोलो आए या नरकासुर मुझे आज मेरे मित्रों से मिलने से कोई नहीं रोक सकता।

विरेंद्र - पिताजी - ठीक है लेकिन ध्यान रहे जैसे ही तुमको उनके कदमों की आहट सुनाई दे और उनका वो मंत्र जिसको वो दोहराते हुए आगे बढ़ते हैं तो उन्हें बिना देखे किसी ऐसी जगह छिप जाना जहां से ना वो तुमको देख सके ना तुम उनको और जब तक उनकी आवाज आना बंद ना हो जाए उनके सामने नहीं आना वो चार भयानक आदमी होते हैं जो अपने कंधों पर एक ताबूत को उठाए होते हैं और अगर कोई उन्हें देख ले तो वो ओ जिंदा नहीं बचता।

विरेंद्र - मुझे पता है पिताजी अब मैं चलता हूं।

और यह सब कहकर विरेंद्र घर से निकल गया। लेकिन उसके पिता के चेहरे पर उसकी फिक्र साफ नजर आ रही थी। निश मोलो आ जाएंगे और साथ ले जाएंगे। ऐसा लगता है कि हमारे गांव के लोग अभी भी दूसरी सदी में जी रहे हैं। वो तेज-तेज़ कदमों के साथ आगे बढ़ रहा था। कुछ देर बाद उसे जंगल की तरफ एक पगडंडी वाला रास्ता नजर आया। यहां से जाऊंगा तो जल्दी पहुंच जाऊंगा। यहीं से आगे बढ़ता हूं। बिना ज्यादा सोचे वो जंगल के अंदर बने उस पगडंडी वाले रास्ते पर आगे बढ़ गया। और बोलते हुए जा रहा था आज तो बहुत मजा आने वाला है। मिलकर खूब मदिरापान भी करेंगे।

और तभी उसे भारी कदमों की आहटों के साथ कुछ आवाजें सुनाई देने लगी। इन आहटों और आवाजों को सुनकर वह एकदम से चौंक पड़ा और उसकी आंखें डर से बड़ी हो गई।

विरेंद्र - हे भगवान

और वो जल्दी से झाड़ियों की तरफ भागा और उनमें छिप कर बैठ गया। वो झाड़ियों के ऊंट में बैठा लंबी-लंबी सांस ले रहा था। वो आवाजें अब और ज्यादा साफ होने लगी थी। उसे यकीन था कि अब वो लोग उसके करीब ही आ रहे हैं। उसने धीरे-धीरे छुप कर अपनी एक आंख से उनको देखा। और वो हैरान रह गया। बस बम बम बश बम बम बश बम बम बश बम बम बश हे भगवान मैंने इन्हें देख लिया मदन पूरी तरह से झाड़ियों में छिप गया

और कुछ देर अपनी सांस तक रो के वहां छिपा रहा फिर उसने धीरे से झांक कर देखा तो अब वो लोग कहीं नजर नजर नहीं आ रहे थे। लगता है चले गए। वो वहां से निकला और दोनों तरफ देखा तो वहां कोई नजर नहीं आया। शुक्र है भगवान। उसने एक कदम बढ़ाया ही था कि तभी उसे फिर से वही आवाजें अपने ठीक पीछे से सुनाई देने लगी।

उसने एक झटके से पलट कर देखा तो वो चारों ताबूत वाले शख्स ठीक उसके पीछे खड़े थे।

और मंत्र पढ़ रहे थे बम बम बस बम बम बस बम बम बसम इस तरफ जब देर रात भी विरेंद्र वापस नहीं लौटा तो उसके पिता को उसकी चिंता होने लगी। उसने गांव के एक आदमी विपुल को साथ लिया और जंगल की तरफ रवाना हुआ। काफी देर बाद एक बरगद के पेड़ के पास जाकर उनके कदम रुक गए और आंखें खौफ से फट पड़ी। उन्होंने विरेंद्र को रहस्यमई परिस्थिति में पाया। उसके चेहरे पर डर और आंखों में खौफ ऐसा नजर आ रहा था कि जैसे उसने हादसे से पहले बहुत ही भयानक मंजर देखा हो।

विरेंद्र 400 साल बाद...

और एक बार और अंधेरा जंगल सुनसान रास्ता। चारों तरफ सिर्फ पेड़ पौधे और कोहरा। मेघना उनके बीच अकेली खड़ी थी। कोई है? क्या यहां कोई है? उसने कुछ कदम आगे बढ़ाए। उसके सवाल का कोई जवाब तो उसे नहीं मिला। लेकिन कुछ टपकने की टप-टप की आवाज अब उसे बराबर आ रही थी। मैं यहां क्या कर रही हूं? कौन लाया है मुझे यहां पर? वो खुद को वहां पाकर बहुत परेशान थी। तभी उसने देखा कि कोई चीज उड़ती हुई उसी की तरफ आ रही है। वो उसे हैरानी से देखने लगी। पास आने पर पता चला कि वो कोई विशालकाय भयानक पक्षी था। बचाओ।

और मेघना उससे बुरी तरह से डर कर भागने लगी और वो उसका पीछा कर रहा था। मेघना ने उसे पीछे पलट कर देखा तो वो उसको पकड़ने ही वाला था। लेकिन तभी मेघना एक पेड़ से टकराई। उसने देखा कि उस पेड़ से हरे रंग का पानी टपक कर नीचे गिर रहा था। मेघना उस हरे पानी को गौर से देख रही थी।

और फिर तभी अरे ओ मेघना उठ जा यार कब तक सोएगी? मेघना आंखें मलते हुए नींद से जागी। उसने देखा कि सुबह के 9:00 बज चुके थे। ओ शिट हम तो लेट हो गए। तूने मुझे उठाया क्यों नहीं? मेघना अपनी एक पार्टनर इशिता के साथ दिल्ली में रह रही थी। जहां वो एक लैब में काम किया करती थी।

और दोनों ने साथ नाश्ता किया और फिर तैयार होकर अपनी लैब के लिए निकल गई। तेरा ऑमलेट खाकर मेरा पेट खराब हो चुका है। रोजाना कच्चा ही बना कर देती है। शुक्र मना कि कच्चा भी खाने को मिल तो रहा है। तेरे भरोसे रहेंगे तो वो भी नहीं मिलने वाला। सो कर ही 9:00 बजे उठती है। ये दोनों लैब में पहुंची। और वहां जाते ही इशिता के पास प्रोफेसर जयदेव की कॉल आई।

प्रोफेसर जयदेव - तुम दोनों ने इस बार बहुत समय ले लिया है। जो एंटीडोट बनाने का काम तुमको दिया था वो पूरा करोगे या नहीं।

इशिता - प्रोफेसर साहब बस ये समझ लीजिए कि काम होने ही वाला है। आप हमें 3 दिन का समय और दीजिए। ये कहकर उसने कॉल काट दिया।

मेघना - तो इतने दिनों से प्रोफेसर को घुमा रही है। आखिर तू ये एंटीडोट तैयार करेगी कैसे?

फिर यह सुनकर इशिता ने एक किताब निकाली। यार देख ये किताब इसमें बहुत से ऐसे लिक्विड के बारे में लिखा है जिनकी कहानी पुरानी दंत कथाओं और लोक कथाओं से जुड़ी है। तो तू कहना क्या चाहती है? मुझे इस किताब में बहुत ही अनोखे लिक्विड के बारे में पता चला है जिसे मृत्युंजय अमृत कहते हैं। हम उस लिक्विड का टेस्ट करेंगे और अगर वो हमारे काम का निकला तो उसे यूज़ भी कर सकते हैं।

मृत्युंजय अमृत देख मैं तेरे साथ कहीं नहीं जाने वाली हूं। ये सब बातें बकवास होती हैं। अरे देख तो सही। इस पेड़ से हर पूर्णमासी की रात यह हरा लिक्विड टपकता है। तभी मेघना ने देखा कि उस पन्ने पर किसी मृत्युंजय अमृत के बारे में लिखा था और उसमें ठीक वही पेड़ दिखाया गया था

और जो मेघना रोजाना अपने सपने में देखा करती थी। मतलब उस हरे पाने की बात ही इस किताब में लिखी थी। हे भगवान क्यों हिला डाला ना? है ना इंटरेस्टिंग?

मेघना ने कुछ सोचा और फिर जवाब दिया तो हम दोनों कल ही बीरमपुर गांव के लिए निकलते हैं। ये दोनों अगली सुबह ही बस से बेरमपुर के लिए निकल गए। वैसे एक बात बता तू मेरे साथ वहां जाने के लिए एक ही बार में कैसे राजी हो गई? मेघना ने सच को छिपाते हुए कहा,

ऐसी अनोखी चीज देखने के बाद भला कौन नहीं होगा जो इसको देखना नहीं चाहेगा? ओो ये हुई ना बात। मैंने तुझे पार्टनर बनाकर कोई गलती नहीं की। ये दोनों 5 घंटे के सफर के बाद एक जगह उतरी। इनके ठीक सामने एक बड़ा सा गेट था जिस पर नाम लिखा था बीरमपुर इशिता और मेघना ने जैसे ही गेट के अंदर कदम रखा तो अचानक से मौसम बदला सूरज मानो बादलों के पीछे छिप गया और एक हवा अपने साथ आंधी ले आई। अरे वाह गांव का मौसम तो बहुत ठंडा है। इधर गांव के लोग भी अचानक बदलते मौसम को देखकर हैरान रह गए।

अरे ये क्या? अभी तक तो काफी गर्मी थी। ये अचानक आंधी कहां से आ गई? मुखिया जी लगता है बारिश भी जरूर आएगी। इधर मेघना और इशिता दोनों ही गांव की तरफ बढ़ रही थी।

यार ये गांव के लोग ठीक तो होंगे ना? गांव के लोग तो ठीक ही होते हैं। अजीब तो हम शहर वाले होते हैं। ये बात तो तूने बिल्कुल पते की कही। इशिता और मेघना दोनों गांव के चौक पर पहुंची। वहां एक कुआं भी था और वहीं मुखिया भी दो आदमियों के साथ खड़ा था। अरे बच्चियों तुम दोनों कौन हो? अब नमस्ते जी। मेरा नाम इशिता है और यह है मेरी दोस्त मेघना। अच्छा बेटा वैसे हमारे गांव में किस वजह से आना हुआ?

वो असल में ओ अंकल हम लोगों को अपनी स्टडी के लिए पांच गांवों के बारे में लिखना है। इसलिए हम लोग यहां आए हैं। इसके बाद और चार गांवों में जाएंगे। ओ अच्छा फिर तो ठीक है बच्चों। हम तुम्हारी जितनी हो सके उतनी मदद करेंगे। जी अंकल। क्या हमें यहां कुछ दिन के लिए रहने के लिए कोई घर मिलेगा किराए पर? अरे बच्चों तुमको किराए के घर की क्या जरूरत है? तुम दोनों जब तक चाहो मेरे ही घर में रह सकती हो। ठकुराइन वैसे भी लड़कियों से बहुत प्यार करती है। जी शुक्रिया अंकल। मुखिया इशिता और मेघना को अपने घर ले आया।

तभी घर के मंदिर में जल रहा दीपक बुझ गया। अजी सुनती हो ठकुराइन? जी आई। ठकुराइन कमरे से बाहर आई। नमस्ते आंटी। नमस्ते बेटा। ओ जी। ये प्यारी-प्यारी बच्चियां कौन है?

यह दोनों शहर से अपनी पढ़ाई के सिलसिले में आई हैं। हमारे गांव के बारे में लिखना चाहती हैं। वो क्या होता है रे वो? रिसर्च रिसर्च करने आई हैं। तभी वहां पर एक और लड़का आया। क्या कहा? हमारे गांव पर रिसर्च। इशिता और मेघना ने उसे देखा। भला हमारे बेवकूफ गांव में आपको क्या मिल सकता है?

यह सुनकर इशिता और मेघना हैरान रह गई। चुप करो अनुज। ऐसे कोई अपने गांव में बोलता है क्या? यह मेरा बेटा है। अनुज। अनुज ने मेघा और इशिता की ओर देखा और उन्हें हाथ जोड़कर नमस्ते किया। नमस्ते। बेटा अनुज जरा इन दोनों को वो खाली कमरा दिखा दो जो तुम्हारे कमरे के बराबर में है। ठीक है पिताजी। आओ देवियों। देवियों अनुज कॉरिडोर से होते हुए उनको कमरा दिखाने ले जाने लगा। इसी समय गांव के मंदिर में बैठा पुजारी भगवान की आरती कर रहा था। तभी अचानक से दिया बुझ गया। ये संकेत तो ठीक नजर नहीं आ रहे। हे प्रभु रक्षा करना।

वैसे आप लोगों को रिसर्च करने के लिए यही गांव मिला था।

अरे हम लोगों को पांच गांवों के बारे में लिखना है तो इसीलिए जो भी गांव पास दिखा चले आए इसके बाद और किसी गांव में जाएंगे। अच्छा वैसे यहां कुछ ऐसा है जो कि रहस्यमय या ऐतिहासिक हो। हां है ना एक राजमहल। राजमहल यहां? हां 400 साल पहले जो यहां के राजा हुआ करते थे उनका महल। वैसे अनुज क्या तुम हमें उस महल में लेकर चलोगे? हां। तुम लोग जाना चाहोगी तो जरूर। तो ठीक है। रात को जब सब सो जाएंगे तो हमें वहां ले चलना। ये सुनकर मेघना इशिता को हैरानी से देखने लगी। रात के समय तुम लोग मजाक तो नहीं कर रहे? नहीं हम तो चलने को तैयार हैं। तुम्हें डर लग रहा है तो बताओ। मेरा गांव है ये। मुझे क्यों डर लगेगा? ठीक है ले चलूंगा।

लेकिन पिताजी को और मां को पता नहीं चलना चाहिए। ग्रेट। तो बताओ किस टाइम आ रहे हो? 12:00 बजे तक पिताजी और मां दोनों सो जाएंगे। मैं उसी समय तुम लोगों को ले आऊंगा। हां, सही है। यह कहकर अनुज ने उन्हें कमरे में छोड़ा और वहां से चला गया। ये क्या? हम तो उस मृत्युंजय अमृत के बारे में पता करने आए थे ना। अब हम ये राजमहल क्यों जा रहे हैं? अरे उसको सीधा पूछते तो उसे शक हो जाता ना।

आज हम राजमहल चलते हैं

और फिर कल उसे जंगल जाने को कहेंगे और वहां जाकर बातों ही बातों में उसे मृत्युंजय अमृत के बारे में पूछेंगे। हम ये सही है। इस तरफ गांव के लोग मौसम के बदलती ठंड से बहुत हैरान थे। पुजारी बार-बार आसमान की तरफ देख रहा था। जहां उसे काला अंधेरा इधर-उधर घूमता हुआ नजर आ रहा था।

और करीब 12:00 बजे जब मूखिया और उसकी पत्नी गहरी नींद में थे तो अनुज कमरे से निकला। अरे लगता है आ गया। इशिता ने उठकर दरवाजा खोला। हाय अनुज। तुम लोग तैयार हो? हां चलो हम तो रेडी हैं। तो चलो अनुज इनको लेकर घर से निकला और इन्होंने दो गलियां पार कर ली थी। उफ तुम्हारे गांव में हवा इतनी ज्यादा चलती है क्या? रोज तो नहीं चलती। लेकिन शहर की दो लड़कियों के साथ लगता है

उनके शहर का प्रदूषण भी आंधी के रूप में साथ आ गया। कुछ देर चलने के बाद ये तीनों एक बड़े से राजमहल के सामने खड़े थे। जिसे देखकर मेघना को कुछ याद आने लगा। ऐसा लगता है कि इस राजमहल को मैंने पहले कहीं देखा है। यह है राजमहल राजा सूरज भान का। वाकई में काफी आलीशान है।

यह कहते हुए इशिता ने अपने कैमरे में उसकी एक फोटो ली। हमें खिड़की से अंदर जाना पड़ेगा। इसका दरवाजा सालों से जाम है। यह तीनों एक खिड़की के रास्ते राजमहल में पहुंचे। और वहां की हर एक चीज मेघना को जानी पहचानी लग रही थी। इस तरफ गांव में आंधी का बहाव बढ़ने लगा था। सभी अपने-अपने घरों में आराम से सो रहे थे। बम बम बम बम बम बम बम अरे ये आवाज तो अपने शेर बोलो गांव के सभी लोगों के दिलों में ख्वाब उतर आया उसी समय मुखिया के कमरे में गांव का पुजारी हड़बड़ाता हुआ पहुंचा मुखिया जी उठिए मुखिया चौकता हुआ नींद से जागा।

क्या हुआ पुजारी जी? इतनी रात में आप गांव में निशिर मोलो की आवाज गूंज रही है। सब बहुत डरे हुए हैं। पुजारी जी ये कैसे हो सकता है? निशिर मोलो यहां कैसे आ सकते हैं?

वो तो कई सालों पहले सो गए थे। जरूर कुछ ऐसा हुआ है जिससे वो जाग उठे थे। हमारा मन बहुत विचलित हो रहा है। गांव के सभी लोग अपनेपने घरों में जाग चुके थे और डरे बैठे थे। यह आवाज सभी के दिलों में खौफ पैदा कर रही थी। मेघना, इशिता और अनुज तीनों इस बात से बेखबर राजमहल में घूम रहे थे। ये कैसी आवाज है? हां, मैंने भी सुनी। ऐसा लग रहा था कि कोई सिपाही भारी जूतों के साथ गलियारे में चहलकदमी कर रहा है। लेकिन दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था। उसी समय गांव के दो आदमी संपत और कप्ता जंगल की सरहद पर बैठे हुए जुआ खेल रहे थे। अरे संपत यार चल घर चलते हैं। अब बहुत समय हो गया। ओहो अब तू हार रहा है तो घर चलते हैं।

अरे चुपचाप पूरी बाजी खेल। इससे पहले तो मैं तुझे जाने नहीं दूंगा। हां। यह सुनकर कप्तान फिर से उसके साथ पत्ते बांटने लगा। उन दोनों को यह आवाज सुनाई दी।

तेज आंधी की हवाओं में उनकी आंखें बहुत मुश्किल से खुल रही थी। उन दोनों ने देखा कि सामने से चार आदमी अपने कंधों पर एक ताबूत उठाए मंत्र पढ़ते हुए चले आ रहे हैं। संपत और कप्ता इससे पहले कुछ करते वो चारों आकर उनके सामने रुक गए। हवा का रुख थोड़ा कम हुआ। वो चारों अपनी लाल चमकती आंखों से संपत और कप्ता को घोर रहे थे। इधर इशिता, मेघना और अनुज को एक दरवाजा खोलने की तेज आवाज सुनाई दी और वो चौंक पड़े।

ना जाने उस दरवाजे से कौन निकला जिसको देखकर ये तीनों चौंक पड़े। वहीं संपत और कप्ता के सामने खड़े वो चारों शख्स जो कि निशुर मोलो थे। उनके कंधों पर रखा ताबूत खुल गया। और उसके खुलते ही संपत और कविता की चीख पूरे गांव के लोगों ने सुनी। आ जिसे सुनकर सभी गांव के लोग डर गए

 यह किसकी चीख थी जी? निशिरलो निशिरलो यह चीख किसी अनहोनी की संकेत थी। निशिलो आखिर कौन है? क्या है मृत्युंजय अमृत? और क्या संबंध है मेघना का इन सब से? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहिए। इस कहानी के अगले भाग में भी तो


तो ये  था Taboot Horror Story का पहला भाग और भी ऐसी डरावनी भूतिया कहानी पडने के लिए बने रहे हमारी Website:~ Www.ScaryPanchal.Com पर और अगर आपको कहानी अच्छी लगी हो तो हमें कोमेट मे जरुर बताएं और कहानी को अपने दोस्तों को सेयर करना ना भूले और अगर आपके साथ भी कोई ऐसी भूतिया घटना घटी हो तो हमारे साथ आप अपनी कहानी सेयर कर सके है हमें कहानी भेजें हमारी Insta Id :- @ScaryPanchal666 पर धन्यवाद...


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